छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के नगर पंचायत फिंगेश्वर से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है. यहां खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए एकमात्र खेल स्टेडियम के उन्नयन कार्य को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है. 50 लाख की लागत से हो रहे इस काम में घटिया निर्माण सामग्री और अनियमितताओं के चलते स्थानीय युवाओं और खिलाड़ियों में भारी आक्रोश है.
स्टेडियम के कायाकल्प के लिए सरकार ने 50 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं, जिसमें से ठेकेदार को अब तक लगभग 30 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है. लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. खिलाड़ियों का आरोप है कि पवेलियन निर्माण और भवन के उन्नयन में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का उपयोग किया गया है. वहीं खेल मैदान की लेवलिंग भी गुणवत्ताहीन तरीके से की गई है, जिससे मैदान खेलने लायक नहीं रह गया है.
पेटी कॉन्ट्रैक्ट बना बर्बादी की जड़
मामले में यह भी सामने आया है कि जिस मुख्य ठेकेदार ने इस कार्य का टेंडर लिया था, उसने स्वयं काम कराने के बजाय इसे एक स्थानीय पेटी ठेकेदार को सौंप दिया है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पेटी ठेकेदार द्वारा अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती जा रही है. मुख्य ठेकेदार की गैरमौजूदगी और पेटी ठेकेदार की मनमानी ने स्टेडियम की हालत खराब कर दी है.
सीएमओ ने लगाई फटकार, ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी
भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद नगर पंचायत के सीएमओ जब स्टेडियम का निरीक्षण करने पहुंचे, तो वे भी निर्माण की बदहाली देखकर नाराज हो गए. उन्होंने मौके पर ही ठेकेदार को जमकर फटकार लगाई. खराब गुणवत्ता को देखते हुए सीएमओ ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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युवाओं ने की कार्रवाई की मांग
स्थानीय युवाओं और खिलाड़ियों ने ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के कारण स्टेडियम की हालत सुधरने के बजाय और खराब हो गई है. युवाओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों से राशि की वसूली कर गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित किया जाए. नगर पंचायत फिंगेश्वर के सीएमओ चंदन मानकर ने बताया कि मौके पर पहुंचकर जांच की गई है. स्टेडियम में कई कार्य अधूरे पाए गए हैं. ठेकेदार को जल्द से जल्द सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं.
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