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बलौदा बाजार: गोदाम में मजदूरी कर रही थी मां, खेलते-खेलते चने की बोरी के नीचे दबकर दोनों बच्चों की मौत

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के धौराभाटा गांव स्थित बंशी गोपाल वेयरहाउस में दो मासूम बच्चों की चने की भारी बोरी के नीचे दबकर मौत हो गई.

बलौदा बाजार: गोदाम में मजदूरी कर रही थी मां, खेलते-खेलते चने की बोरी के नीचे दबकर दोनों बच्चों की मौत

बलौदा बाजार जिले से एक दर्दनाक खबर घटना से झकझोर कर रख दिया है. पेट पालने के लिए मजदूरी कर रही एक मां की आंखों के सामने उसकी पूरी दुनिया उजड़ गई. वेयरहाउस में सुरक्षा के अभाव में चने की भारी बोरी के नीचे दबकर उसके दो मासूम बच्चों की मौत हो गई.

जानकारी के अनुसार, भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र के धौराभाटा गांव स्थित बंशी गोपाल वेयरहाउस में मंगलवार की शाम करीब 4 बजे यह हादसा हुआ था. बिलासपुर के बेलगहना की रहने वाली महिला श्रमिक अपने बच्चों को साथ लेकर काम कर रही थी. इसी दौरान वेयरहाउस के भीतर खेल रहे उसके दो बच्चे प्रतिमा पटेल (6) और अखिलेश पटेल (5) अचानक चने की भारी बोरी के नीचे दब गए.

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मां मजदूरी में व्यस्त, बच्चे मौत से लड़ते-लड़ते हारे

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला वेयरहाउस में चने की बोरियों की ढुलाई और अन्य काम में लगी हुई थी. उसके दोनों बच्चे पास ही चने की झिल्लियों और बोरियों से चना निकालकर खेल रहे थे. किसी ने उन्हें रोका नहीं, न ही वेयरहाउस प्रबंधन की ओर से बच्चों के लिए कोई सुरक्षित जगह तय की गई थी. खेलते-खेलते अचानक चना की भारी बोरी बच्चों के ऊपर गिर गई और दोनों बच्चे पूरी तरह दब गए.

बचाने की कोशिश, लेकिन हो चुकी थी देर

वेयरहाउस में मौजूद मजदूरों ने जब बच्चों की हलचल बंद देखी तो शोर मचाया और दौड़कर मौके पर पहुंचे. जैसे-तैसे चने की बोरी हटाई और दोनों बच्चों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दोनों बेहोश हो चुके थे. आनन-फानन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भाटापारा ले गए, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया. प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना (Asphyxia) बताया गया है.

पहले पति गया, अब बच्चों का साया भी उठा

ग्रामीणों और परिजनों के अनुसार, महिला पहले ही अपने पति को खो चुकी है. पति की मौत के बाद वही मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी. काम पर जाना उसकी मजबूरी थी और बच्चों को साथ रखना उसकी बेबसी. अब इस हादसे ने उससे उसका आखिरी सहारा भी छीन लिया.

वेयरहाउस की सुरक्षा पर सवाल, जिम्मेदारी से बचता सिस्टम

इस हादसे ने भाटापारा क्षेत्र की मीलों और वेयरहाउस में सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है. इधर जानकारों का कहना है कि वेयरहाउस जैसे जोखिम भरे स्थल पर बच्चों की मौजूदगी रहने पर उन्हें खेलने के लिए सुरक्षित संसाधन नहीं दिए गए. साथ ही व्यवस्था पर सवाल भी उठाए कि चने की भारी बोरियों को रखने और स्टॉक करने के तय मानकों का पालन हुआ या नहीं? क्या वेयरहाउस प्रबंधन ने मजदूरों के बच्चों के लिए कोई सुरक्षित इंतजाम किया था?
यदि सुरक्षा नियम थे, तो हादसा कैसे हुआ? क्योंकि स्थानीय लोगों का कहना है कि मजदूरों की मजबूरी को जानते हुए भी प्रबंधन ने सुरक्षा को नजर अंदाज किया है.

पुलिस जांच पर संदेह

भाटापारा ग्रामीण थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू करने की बात कही है. पुलिस का कहना है कि दुर्घटना में लापरवाही के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. हालांकि, स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि ऐसे मामलों में जांच अक्सर औपचारिकता बनकर रह जाती है और जिम्मेदार बच निकलते हैं.

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