Raipur Cyber Fraud Cases: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपराध का तरीका बदल गया है. पहले जहां चोरी, लूट और डकैती जैसी घटनाएं समाज के लिए बड़ी चिंता थीं, अब इन मामलों में कमी आई है. लेकिन इसके साथ ही साइबर फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. तकनीक और डिजिटल लेन-देन के बढ़ते इस्तेमाल ने अपराधियों को भी ‘स्मार्ट' बना दिया है. अब ठग मोबाइल और इंटरनेट के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं.
चोरी-लूट में कमी
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, बीते साल लूट की वारदातों में 2.74 प्रतिशत और चोरी की घटनाओं में 3.67 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. रायपुर जिले में चोरी, लूट और डकैती के कुल 1520 मामले सामने आए. यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम है.
साइबर फ्रॉड में तेजी
चोरी-लूट में कमी आई है, लेकिन साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं. साल 2025 में रायपुर जिले में साइबर फ्रॉड की 8680 शिकायतें दर्ज हुईं. यानी हर दिन औसतन 24 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए. यह संख्या चोरी और लूट के मामलों से लगभग छह गुना ज्यादा है.
पुलिस की चुनौती
एसएसपी रायपुर डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने बताया कि साइबर अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है. उन्होंने कहा कि जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है. अगर लोग सतर्क रहें और डिजिटल लेन-देन करते समय सावधानी बरतें, तो ठगी से बचा जा सकता है.

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साइबर एक्सपर्ट की सलाह
साइबर एक्सपर्ट अविषा नामदेव का कहना है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन करते समय हमेशा सतर्क रहना चाहिए. किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अनजान कॉल या मैसेज से बचें. उन्होंने कहा कि ठग तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित करते हैं, इसलिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है.
सतर्कता ही सुरक्षा
“सतर्कता हटी तो दुर्घटना घटी” वाली कहावत साइबर ठगी पर पूरी तरह लागू होती है. पुलिस और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग जागरूक रहें तो इस अपराध से बचा जा सकता है. बहरहाल, रायपुर पुलिस के लिए साइबर फ्रॉड रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.
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