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    मजदूर सत्याग्रह; ऐसी थी बापू की पहली भूख हड़ताल

    Shramik Andolan: मोहनदास करमचंद गांधी को फरवरी 1918 में श्रमिक आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए अहमदाबाद में आमंत्रित किया गया था. जब मिल मालिकों ने अनुरोधों पर अनुकूल प्रतिक्रिया नहीं दी तब गांधी ने 22 फरवरी की मध्यरात्रि को अहिंसक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया.

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    World Health Day 2026: तुम ठीक हो? बात करने से बदलाव तक 

    स्वास्थ्य अब केवल अस्पतालों, दवाओं या बजट आवंटनों का विषय नहीं रह गया है. यह उस वातावरण का प्रश्न बन चुका है, जिसमें व्यक्ति अपने अनुभवों को व्यक्त कर सके, सुना जा सके और समझा जा सके. भारत में यह प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है.

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    रमेशचंद्र झा पुण्यतिथि: जिसने आज़ादी लड़ी भी और उसे लिखा भी

    Ramesh Chandra Jha Death Anniversary: “रमेशचंद्र झा और उनके परिवार का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम में बर्बाद होकर अट्टाहास करने का इतिहास है. वे उनमें हैं, जिन्होंने गुलामी की बेड़ियां तोड़ने के लिए खुद हथकड़ियां पहनी हैं और खौफनाक फरारी जिंदगी का लुत्फ भी उठाया है.

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    अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच जुंदिशापुर क्यों चर्चा में है?

    UNESCO Heritage Sites in Iran: ईरान‑अमेरिका/इजरायल युद्ध के बीच जुंदिशापुर सुरक्षित है. जानिए इसका ऐतिहासिक महत्व, भारतीय विद्वानों का योगदान और यूनेस्को संरक्षण.

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    सरपंच–विधायक मानदेय अंतर; ‘समाजसेवा’ पर सरकारी दलील

    बुद्धिबल्लभ जी ने निष्कर्ष दिया ... “गांव में लोकतंत्र ‘मिनी पैक’ में आता है ... 300 रुपए प्रति बैठक. राजधानी में वही लोकतंत्र ‘फैमिली पैक’ में आता है ... लाखों में.” और पंचों ने तय किया ... अब अगली बैठक में एजेंडा यही रहेगा ... “क्या 300 रुपए में हँसना फ्री है… या उस पर भी जीएसटी लगेगा?”

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    आत्मविश्वास एक दिन में नहीं बनता... तो क्या करें?

    आज हमें पहचान और पद की इच्छा होती है. यह विचार हमें सबसे अधिक विचलित करता है क्योंकि आज युवा आधुनिक भी बनना चाहता है और अपनी जड़ों से कटना भी नहीं चाहता.

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    धैर्य नहीं, तैयारी की अपेक्षा... बजट 2026 क्यों खास?

    भारत की जनसांख्यिकी भी इसी बात को सिद्ध करती है. देश की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है और हर वर्ष करीब 1.2 करोड़ युवा कार्यबल में प्रवेश करते हैं. यह संख्या चुनौती नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अवसर है.

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    UGC Act 2026: विश्वविद्यालय केवल नियमों का पालन करने की जगह बन गए तो ज्ञान का निर्माण नहीं कर पाएंगे

    UGC Act 2026: प्रश्न यह नहीं है कि नियमन चाहिए या नहीं. प्रश्न यह है कि कैसा नियमन? क्या ऐसा नियमन जो विश्वविद्यालयों को केवल अनुपालन करने वाली संस्थाएं बना दे, या ऐसा नियमन जो उन्हें आत्म-मूल्यांकन, संवाद और सुधार की स्वतंत्रता दे? क्या हम शिक्षा को शासन का विषय मान रहे हैं, या ज्ञान-निर्माण की जीवंत प्रक्रिया?

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    एक दिन नहीं, एक सोच: राष्ट्रीय बालिका दिवस और ज़मीनी हकीकत

    National Girl Child Day: भारत के कई अन्य हिस्सों में आज भी बेटियों को “सुरक्षा” के नाम पर सीमित किया जाता है, शिक्षा को बोझ समझा जाता है और आर्थिक निर्भरता को सामान्य माना जाता है. यहाँ नीतियाँ तो हैं, लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन और सामाजिक स्वीकार्यता कमजोर है. यही कारण है कि एक ही देश में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर दो अलग-अलग भारत दिखाती है.

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    मकर संक्रांति और भारतीय युवा: परंपरा से नए अर्थ में ‘रीकनेक्ट’

     मकर संक्रांति का मूल संदेश है उत्तरायण. यह केवल सूर्य की दिशा परिवर्तन की कथा नहीं है, बल्कि मानव चेतना की दिशा बदलने का संकेत है. आज का युवा उसी संकेत को नए संदर्भ में पढ़ रहा है. वह परंपरा से कट नहीं रहा. वह परंपरा को नए अर्थ दे रहा है. 

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    'माही' मार नहीं रहा...अब मात खा रहा है!

    धोनी के फैन्स माही को सिर्फ मारते देखने आता है, क्योंकि उन्होंने धोनी को विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में ही सरआंखों पर बिठाया है. धोनी की कप्तानी और विकेट कीपिंग से कितना भी कहर बरपा दें, फैन्स की नजर में धोनी का ये हुनर हमेशा दोयम रहा है.

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    'चाइनीज' मौत... बहता सुर्ख लाल खून और दम तोड़ती जिंदगी

    चाइनीज मांझा, जो 2017 से प्रतिबंधित है, आज भी भारत में मौत का कारण बन रहा है. दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में इससे कई लोगों और पक्षियों की जान जा चुकी है. पुलिस और प्रशासन की सीमित कार्रवाई अवैध बिक्री रोकने में नाकाम रही है. मकर संक्रांति जैसे त्योहारों से पहले यह सवाल गंभीर है कि आखिर प्रतिबंध के बावजूद यह जानलेवा मांझा बाजार में कैसे बिक रहा है.

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    Chhattisgarh Rajyotsava: छत्तीसगढ़ की रजत जयंती, विश्वास और विकास के 11 साल

    Chhattisgarh Rajyotsava: आज 25 साल बाद, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो संतोष होता है. जो सपना अटल जी ने देखा था, उसे आज मोदी जी पूरा कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक है. हमारा 'धान का कटोरा'  मोदी जी के नेतृत्व में अब 'विकास का कटोरा' भी बन रहा है.

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    कैसे हुई थी माधवराव सिंधिया की मौत? PM अटल समेत पूरी संसद पहुंची थी अंत्येष्ठि में

    30 सितंबर को यह फाइनल होना था और दोपहर का समय इसको अंतिम रूप देने के लिए तय हुआ था. माधव राव इस आयोजन को लेकर बहुत ही उत्साहित थे और प्रफुल्लित भी, लेकिन 30 सितंबर को अचानक उनका दिल्ली से कानपुर जाने का कार्यक्रम बन गया.

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    विश्व पर्यटन दिवस 2025: एक तिथि नहीं, एक दर्शन

    World Tourism Day: “पर्यटन और सतत परिवर्तन” का मर्म है—प्रकृति का संरक्षण, संस्कृति का सम्मान, समुदाय का सशक्तिकरण और प्रौद्योगिकी का सार्थक उपयोग. मध्यप्रदेश में यह केवल नीति नहीं; हमारे परियोजना-डिज़ाइन, कार्यान्वयन, क्षमता-निर्माण, स्थानीय सहभागिता और निरंतर मूल्यांकन की कार्यविधि में जीवंत है. हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—ऐसा पर्यटन तंत्र जो कार्बन-संवेदनशील, संसाधन-कुशल और सामाजिक-न्यायसंगत हो; जहाँ हर यात्री केवल आगंतुक न होकर हमारी सामूहिक विकास-यात्रा का सहभागी बने.

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    भारत की जीवंत आत्मा के उपासक पंडित दीनदयाल उपाध्याय

    Pandit Deendayal Upadhyaya Jayanti: आज जब भारत यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर बनने और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा की ओर अग्रसर है, वोकल फॉर लोकल' की बात हो रही है, तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन और अधिक प्रासंगिक हो जाता है. एकात्म मानववाद केवल एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि यह एक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक मार्गदर्शन भी है.

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी : स्वदेशी का संकल्प और राष्ट्र निर्माण के प्रेरक - CM मोहन यादव

    "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व सेवा, त्याग, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है. उनके द्वारा चलाए गए कार्यक्रमों ने आम नागरिक को राहत दी, स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की, आर्थिक विकास की राह दिखाई, सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा दिया. उनके नेतृत्व में भारत ने संघर्ष से समाधान, संकट से अवसर और सीमित संसाधनों से वैश्विक प्रतिष्ठा की यात्रा तय की है."

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    ‘’राष्‍ट्र प्रथम’’ हित के संवाहक: नरेन्द्र मोदी

    "प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आधुनिक भारत में ‘राष्‍ट्र प्रथम’ की नीति के अग्रदूत हैं. उनके दार्शनिक चिंतन में राष्‍ट्र सर्वदा प्रथम पायदान पर होता है. उनकी राष्ट्र साधना एवं सामाजिक सरोकार के अनगिनत पुनीत कार्यों को देखकर हम यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि यह सब असंभव से दिखने वाले कार्य किसी सामान्य से दिखने वाले एक व्यक्तित्व ने कैसे संभव कर दिखाए हैं."

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    डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजनीति के आकाश में दमकते नक्षत्र ...

    डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस धारणा के प्रबल समर्थक थे कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम सब एक हैं. इसलिए धर्म के आधार पर वे विभाजन के कट्टर विरोधी थे. वे मानते थे कि विभाजन सम्बन्धी उत्पन्न हुई परिस्थिति ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से थी.

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    जल संरक्षण का जन आंदोलन बना जल गंगा संवर्धन अभियान - डॉ. मोहन यादव

    Mohan Yadav on Water Conservation: जल संरक्षण के क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान एक बड़ा मुहिम बनकर समाज में फैल रहा है. इसकी भविष्य के लिए जल संरक्षण में बहुत बड़ी भूमिका है.

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