
Meri Maa Karma Movie, : बलरामपुर जिले के एक छोटे से गांव सरनाडीह (Sarnadih) के रहने वाले मृत्युंजय सिंह (Mritunjay Singh) आजकल अपने क्षेत्र में बहुत चर्चा में है. उनकी पहली बॉलीवुड (Bollywood) फिल्म "मेरी मां कर्मा" रिलीज होने वाली है. जानकारी सामने आने के बाद आसपास के जिले से लोग उनके घर पहुंच रहे हैं और उनके परिवार वालों को बधाइयां दे रहे हैं. एक्टर मृत्युंजय सिंह इससे पहले कई धारावाहिक सीरियल के साथ छत्तीसगढ़ी फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं.
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छोटे से गांव से आते है मृत्युंजय
मृत्युंजय सिंह छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिला के मुख्यालय से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरनाडीह गांव के रहने वाले हैं. पिता कृष्ण मोहन सिंह एक सरकारी शिक्षक हैं, जो गांव के ही स्कूल में पढ़ाते हैं. पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ लिखकर अफसर बने. मृत्युंजय पढ़ाई-लिखाई में भी काफी अच्छे थे, लेकिन उनका मन फिल्मों में काम करने का था. उनके जिद्द के आगे उनके परिवार वाले हार गए और उन्हें फिल्मों में काम करने के लिए सपोर्ट करने लगे, जिससे एक्टर मृत्युंजय को आगे बढ़ने का हौसला मिला.
करियर की ऐसी हुई थी शुरुआत
मृत्युंजय सिंह 2015 में बिलासपुर से एनीमेशन से बीएससी करने के बाद मुंबई चले गए. वहां, उन्होंने 'मेरी दुर्गा' में पहली बार काम किया. इसके बाद मृत्युंजय ने कई बार वेब सीरीज में डायरेक्शन का काम किया. ओटीटी पर रिलीज हुई 'चाचा विधायक है' में भी उन्होंने डायरेक्शन का काम किया. इसके बाद 2019 तक मृत्युंजय सिंह टीवी सीरियल और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लगातार काम करते रहे, लेकिन उन्हें यहां ज्यादा ख्याति प्राप्त नहीं हुई.
फिल्मों का भी किया निर्देशन
उन्होंने 2020 से बॉलीवुड और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में डायरेक्शन का काम शुरू किया. उनके डायरेक्शन में बनी उनकी पहली फिल्म 'ले चलूं अपन दुहारी' छत्तीसगढ़ी फिल्म जनवरी 2023 में रिलीज हुई थी. फिल्म रिलीज होते ही इसने लोकप्रियता के मामले में कई सारे रिकॉर्ड तोड़े. इसके बाद मृत्युंजय ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. हाल ही में उनकी बॉलीवुड फिल्म 'मेरी मां कर्मा' रिलीज होने वाली है, जिसे लेकर मृत्युंजय के घर पर खुशियों की लहर है.
जिले और प्रदेश का नाम किया रोशन
बलरामपुर जैसे नक्सल प्रभावित जिले के एक छोटे से गांव से पढ़ाई-लिखाई कर मुंबई जैसे महानगर में बॉलीवुड फिल्मों में काम कर मृत्युंजय सिंह अपने गांव ही नहीं, बल्कि बलरामपुर जिला और पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है. मृत्युंजय सिंह के पिता का कहना है कि एक छोटे से गांव से बॉलीवुड तक पहुंचना इतना आसान नहीं है. बहुत कठिन परिश्रम एवं लगन के कारण आज मृत्युंजय सिंह इस मुकाम को हासिल करने में सफल हो पाएं है.
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