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छत्तीसगढ़ में 'प्रशासनिक सर्जरी'पर छिड़ी जंग: 2 साल में एक दर्जन OSD और PA बाहर

Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंत्रियों के करीब एक दर्जन से ज्यादा OSD और PA को हटाए जाने के बाद सियासी भूचाल आ गया है. पिछले 2 साल में हुई इस बड़ी 'प्रशासनिक सर्जरी' को लेकर कांग्रेस ने सीधे भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं बीजेपी इसे कामकाज में पारदर्शिता लाने की एक सामान्य प्रक्रिया बता रही है.

छत्तीसगढ़ में 'प्रशासनिक सर्जरी'पर छिड़ी जंग: 2 साल में एक दर्जन OSD और PA बाहर

BJP Ministers Staff Change: छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में इन दिनों 'ओएसडी' (OSD) और 'पीए-पीएस' (PA-PS) शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. बीजेपी सरकार के पिछले दो सालों के कार्यकाल में मंत्रियों के निजी स्टाफ को हटाने का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब तक एक दर्जन से अधिक खास सिपहसालारों को उनके पदों से विदा किया जा चुका है. ताजा मामला राजस्व और उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के स्टाफ पर गिरी गाज का है, जिसने प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी वार-पलटवार शुरु कर दिया है.

किन मंत्रियों के यहाँ चली ‘तबादला एक्सप्रेस'?

पिछले दो वर्षों में हुए फेरबदल की फेहरिस्त काफी लंबी है, जिसने प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मचा रखा है. 

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बंटवारे की जंग या पारदर्शिता? कांग्रेस का तीखा हमला

विपक्ष ने इस फेरबदल को भ्रष्टाचार के चश्मे से देखना शुरू कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह अधिकारियों को हटाने का मामला नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की रकम के 'कमीशन और बंदरबांट' में हुई खींचतान का नतीजा है. वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने चुटकी लेते हुए सवाल किया है कि "अगर सब कुछ पारदर्शी है, तो बार-बार स्टाफ बदलने की नौबत क्यों आ रही है? दाल में कुछ काला है, तभी तो कार्रवाई हो रही है."

बीजेपी का पलटवार: ‘जो भ्रष्टाचार में डूबे, उन्हें सब वैसा ही दिखता है'

कांग्रेस के इन हमलों पर सरकार ने भी कड़ा रुख अपनाया है. उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विशुद्ध रूप से 'प्रशासनिक निर्णय' करार दिया है. साव ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस खुद भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी रही है, इसलिए उन्हें हर काम में खोट नजर आता है. सरकार कामकाज को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए समय-समय पर अपने स्टाफ में बदलाव करती है, यह एक सामान्य प्रक्रिया है.

 सुशासन या कुछ और?

मंत्रियों के 'खास' माने जाने वाले इन अधिकारियों का अचानक हटना कई सवाल छोड़ रहा है. क्या यह वाकई सुशासन की दिशा में उठाया गया कदम है या फिर पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही है? फिलहाल, ओएसडी और पीए की इस सामूहिक छुट्टी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को 'हॉट' बना दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़कों तक गूंजने वाला है.
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