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धोखेबाजी से आरक्षक बने दोषी को कोर्ट ने सुनाई दो साल की सजा, हिंदी तक नहीं लिख पाया आरोपी, ऐसे हुआ खुलासा?

MP News: मध्य प्रदेश में धोखाधड़ी कर नौकरी प्राप्त करना पुलिस विभाग के  एक आरक्षक को बहुत महंगा पड़ गया. इस मामले में कोर्ट ने उसे सजा सुनाई है. आइए जानते हैं... 

धोखेबाजी से आरक्षक बने दोषी को कोर्ट ने सुनाई दो साल की सजा, हिंदी तक नहीं लिख पाया आरोपी, ऐसे हुआ खुलासा?

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के सतना में धोखाधड़ी कर आरक्षक की नौकरी प्राप्त करने के मामले में  प्रथम अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार मिश्रा की अदालत ने  टिंकू कुमार यादव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है.

 इसके अलावा मध्यप्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम, 1937 के अंतर्गत एक वर्ष का सश्रम कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है.

प्रकरण में शासन की ओर से अभियोजन अधिकारी चन्द्र प्रकाश मिश्रा द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। अभियोजन प्रवक्ता संदीप कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी टिंकू कुमार यादव, पिता अरविन्द प्रसाद यादव, उम्र 34 वर्ष, निवासी ग्राम बरौंधा, शंभूगंज, जिला बांका (बिहार) का चयन आरक्षक संवर्ग भर्ती परीक्षा वर्ष 2013 में हुआ था. प्रशिक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अभ्यर्थी ने हिंदी विषय का अध्ययन नहीं किया था, जिससे उसके चयन पर संदेह उत्पन्न हुआ.

कटनी  के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक,द्वारा मामले की जांच कराई गई. जांच के दौरान आरोपी की ओएमआर उत्तर शीट, उपस्थिति पत्रक, प्रश्न पत्र का मुख्य पृष्ठ तथा उत्तर पुस्तिका जब्त की गई. साथ ही आरोपी के दाएं और बाएं हाथ के अंगूठों के निशान लिए गए. विवादित अंगूठा चिन्हों की वैज्ञानिक जांच कराई गई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि ओएमआर शीट पर अंकित अंगूठा चिन्ह आरोपी के नहीं थे.

इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना माधवनगर में अपराध पंजीबद्ध किया गया. बाद में घटना स्थल थाना कोलगवां क्षेत्र में पाए जाने के कारण थाना कोलगवां में अपराध क्रमांक 318/17 अंतर्गत धारा 419 एवं 420 भादवि के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान साक्षियों के कथन दर्ज कर आवश्यक जब्ती कार्रवाई पूर्ण कर आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए माननीय न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध मानते हुए उपरोक्त दंडादेश पारित किया.

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