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This Article is From Oct 17, 2025

Dhanteras 2025: उज्जैन में है अनोखा कुबेर मंदिर, पंडित जी ने बताया धनतेरस पर क्यों खास यहां की पूजा

Kundeshwar Mahadev Mandir: मान्यता है कि यहां धन तेरस पर कुबेर जी की पूजा कर उनके पेट पर इत्र लगाने से समृद्धि आती हैं. इसलिए देश भर से लोग आकर दर्शन कर सुख समृद्धि की प्राथना करते है. शनिवार को धन तेरस पर यहां दो बार विशेष आरती कर सूखे मेवा, इत्र, मिष्ठान और फल का भोग लगाएंगे.

Dhanteras 2025: उज्जैन में है अनोखा कुबेर मंदिर, पंडित जी ने बताया धनतेरस पर क्यों खास यहां की पूजा
Dhanteras 2025: उज्जैन में है अनोखा कुबेर मंदिर, पंडित जी ने बताया धनतेरस पर क्यों खास यहां की पूजा

Dhanteras 2025: दीपावली से पहले धनतेरस पर कुबेर भगवान की पूजा का विशेष महत्व है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित कुबेर मंदिर में शुक्रवार से ही देश भर से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं. मान्यता है कि संदीपनी आश्रम में कुबेर जी की इस प्रतिमा की स्थापना भगवान श्रीकृष्ण ने की थीं. मंगलनाथ मार्ग पर गुरू संदीपनी का आश्रम है. यहां स्थित श्रीकृष्ण बलराम मंदिर के पास 84 महादेव में 40 वें नंबर के कुंडेश्वर महादेव का मंदिर हैं. इसी के गर्भ गृह में कुबेर देवता की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है. छत पर श्री यंत्र की आकृति का है.

क्या है मान्यता?

मान्यता है कि यहां धन तेरस पर कुबेर जी की पूजा कर उनके पेट पर इत्र लगाने से समृद्धि आती हैं. इसलिए देश भर से लोग आकर दर्शन कर सुख समृद्धि की प्राथना करते है. शनिवार को धन तेरस पर यहां दो बार विशेष आरती कर सूखे मेवा, इत्र, मिष्ठान और फल का भोग लगाएंगे. कहा जाता है कि इनके दर्शन मात्र से  धन की प्राप्ति होती है. मंदिर के द्वार पर खड़े नंदी की अद्भुत प्रतिमा भी है.

श्रीकृष्ण भगवान लाए थे कुबेर को

मंदिर के पुजारी शिवांश व्यास ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण जब महर्षि सान्दीपनि के आश्रम से शिक्षा पूरी कर जाने लगे तो गुरू दक्षिणा देने के लिए कुबेर धन लेकर आए थे. लेकिन गुरू-माता ने श्री कृष्ण से कहा कि उनके पुत्र का शंखासुर राक्षस ने हरण कर लिया है. उसे वापस ले आओ यही गुरू दक्षिणा होगी. कृष्ण ने गुरू पुत्र को राक्षस से मुक्त करा कर गुरू-माता को सौंप दिया. इसके बाद श्रीकृष्ण तो द्वारका चले गए,लेकिन कुबेर आश्रम में ही बैठे रह गए. इसलिए यहा कुबेर की प्रतिमा बैठी मुद्रा में है.  

शंगु काल की प्रतिमा

पुजारी व्यास के अनुसार मंदिर में विराजित कुबेर जी की यह प्रतिमा मध्य कालीन 800 से 1100 वर्ष पुरानी है. जिसे शंगु काल के उच्च कोटि के शिल्पकारों ने बनाया था. बेसाल्ट से बनी  कुबेर की प्रतिमा शुंग काल की है करीब 3.5 फ़ीट की इस प्रतिमा के चार हाथ है जिसमें दो हाथो में धन सहित एक हाथ में सोम पात्र एक आशीर्वाद की मुद्रा है. प्रतिमा तीखी नाक, उभरा पेट, शरीर पर अलंकार आदि से कुबेर का स्वरूप आकर्षक है. कुबेर जी की प्रतिमा देश में सिर्फ तीन जगह विराजित है. उत्तर और दक्षिण के साथ मध्य में उज्जैन में विराजित है.

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