Sidhi Collector Vikas Mishra Action: सीधी जिले में मौसम खराब होने के बीच गेहूं उपार्जन केंद्रों पर प्रशासन की सख्ती सामने आई है. जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा ने खराब मौसम के दौरान अचानक खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया. चौपाल उपार्जन केंद्र पर पहुंचने पर भारी लापरवाही सामने आई, जहां किसानों की उपज को बचाने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं थे. हालात इतने खराब थे कि कलेक्टर को खुद अपने हाथों से पॉलीथिन पकड़कर गेहूं की बोरियों को ढकना पड़ा. इस गंभीर लापरवाही पर केंद्र प्रभारी को तत्काल निलंबित कर दिया गया.
खराब मौसम में कलेक्टर का औचक निरीक्षण
सीधी जिले में इन दिनों मौसम खराब बना हुआ है और कई इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है. ऐसे में किसानों से खरीदे गए गेहूं को सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसी उद्देश्य से कलेक्टर विकास मिश्रा उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करने निकले. चौपाल खरीदी केंद्र पहुंचते ही यहां की बदहाल व्यवस्था ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी.
खुले में पड़ी बोरियां, कोई इंतजाम नहीं
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि चौपाल उपार्जन केंद्र में गेहूं की बोरियां खुले में पड़ी थीं. बारिश से बचाव के लिए न तो तिरपाल की समुचित व्यवस्था थी, न ही भंडारण की कोई ठोस योजना. मौके पर उपार्जन केंद्र का प्रभारी और अन्य जिम्मेदार कर्मचारी भी मौजूद नहीं थे. किसानों की मेहनत से उगाए गए अनाज को नुकसान होने की पूरी आशंका बनी हुई थी.
कलेक्टर ने खुद संभाली जिम्मेदारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर विकास मिश्रा ने मौके पर मौजूद पुरानी और कटी‑फटी पॉलीथिन को खुद अपने हाथों से पकड़ा और गेहूं की बोरियों को ढकवाया. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए चौंकाने वाला था. प्रशासनिक अधिकारी के इस कदम ने लापरवाह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया.
लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई
इस गंभीर लापरवाही के लिए चौपाल उपार्जन केंद्र के प्रभारी शैलेंद्र सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया. कलेक्टर ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि खरीदी केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तुरंत दुरुस्त की जाएं, ताकि किसानों और सरकारी संपत्ति को किसी भी तरह का नुकसान न हो.
उपार्जन केंद्रों में व्यवस्था बदहाल
बताया जा रहा है कि जिले में गेहूं खरीदी का काम तेजी से चल रहा है और हर सीजन में इसके लिए पर्याप्त राशि भी जारी की जाती है. इसके बावजूद कई खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था के नाम पर कुछ नजर नहीं आता. न तिरपाल ठीक हालत में हैं, न भंडारण की वैज्ञानिक व्यवस्था.
‘लूट का अड्डा' बनने के आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि कई उपार्जन केंद्रों को लूट का अड्डा बना लिया गया है. प्रभारी अधिकारियों पर शासकीय राशि के दुरुपयोग, किसानों से अधिक गेहूं लेने और वजन में गड़बड़ी जैसे आरोप भी सामने आते रहे हैं. यह भी कहा जाता है कि बाहरी मजदूरों के जरिए इस तरह की अनियमितताएं कराई जाती हैं. हालांकि, इन आरोपों की जांच अलग‑अलग स्तर पर की जाती है.
आगे और निरीक्षण की तैयारी
कलेक्टर विकास मिश्रा की इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि अन्य उपार्जन केंद्रों के प्रभारी भी व्यवस्था सुधारने में जुटेंगे. प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य खरीदी केंद्रों का भी औचक निरीक्षण किया जाएगा.
किसानों के हित में सख्ती का संदेश
यह कार्रवाई किसानों के हित में बड़ा संदेश मानी जा रही है. यदि शीर्ष अधिकारी खुद मैदान में उतरकर व्यवस्था संभालने को मजबूर हों, तो यह साफ संकेत है कि लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अब देखना यह है कि प्रशासन की यह सख्ती जमीनी स्तर पर सुधार ला पाती है या नहीं.
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