Chhattisgarh High Court Verdict Davanbod Sarpanch Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलौदा बाजार-भाटापारा जिले की ग्राम पंचायत दावनबोद की सरपंच कौशल्या तुरकिया को बड़ी राहत देने से इनकार करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी है. अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद शुरू हुई नई सरपंच चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाए तो उसमें हस्तक्षेप से बचना चाहिए. हालांकि कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि सरपंच द्वारा दायर आवेदन का समयसीमा के भीतर विधिसम्मत निराकरण किया जाए. इस फैसले के बाद पंचायत में चल रही चुनाव प्रक्रिया पर कोई कानूनी अड़चन नहीं रहेगी.
अविश्वास प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला ग्राम पंचायत दावनबोद की सरपंच कौशल्या तुरकिया से जुड़ा है. उनके खिलाफ 23 मार्च 2026 को पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. यह प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया, जिसके बाद सरपंच ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 21(4) के तहत कलेक्टर के समक्ष आवेदन दिया.
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनके आवेदन पर निर्णय लिए बिना ही राज्य निर्वाचन आयोग ने नए सरपंच के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी. चुनाव कार्यक्रम के तहत 1 जून को मतदान और 4 जून को शपथ ग्रहण की तारीख तय की गई थी, जिसे सरपंच ने चुनौती दी थी.
हाईकोर्ट में दी गई दलील
सरपंच की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि पहले अविश्वास प्रस्ताव की वैधता की जांच होनी चाहिए थी, उसके बाद ही चुनाव कराया जाना चाहिए था. इस आधार पर उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की.
कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने साफ कहा कि कानून के मुताबिक कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव के प्रभाव को स्थगित करने का अधिकार नहीं है. इसलिए कलेक्टर द्वारा अंतरिम राहत न देने का फैसला सही है और इसमें कोई अवैधता नहीं है.
चुनाव प्रक्रिया में दखल से बचने की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद न्यायालय को सामान्यतः उसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले “संदीप सिंह बोरा बनाम नरेंद्र सिंह देओपा” का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में चुनाव याचिका ही उचित कानूनी उपाय है.
कलेक्टर को दिए गए निर्देश
हालांकि अदालत ने कलेक्टर बलौदाबाजार को निर्देश दिया कि वे सरपंच के आवेदन पर 8 जून 2026 या उसके बाद 10 दिनों के भीतर निर्णय लें. साथ ही यह भी कहा गया कि संबंधित पक्ष कार्यवाही में सहयोग करें और अनावश्यक विलंब न करें.
चुनाव प्रक्रिया पर नहीं रहेगा कोई असर
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दावनबोद ग्राम पंचायत में चल रही चुनाव प्रक्रिया पर कोई कानूनी बाधा नहीं रहेगी. मतदान और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ सकेगी.
अविश्वास प्रस्ताव की वैधता पर अलग सुनवाई
हालांकि अविश्वास प्रस्ताव की वैधता को लेकर उठाए गए सवालों पर कलेक्टर अलग से निर्णय लेंगे. इसका मतलब है कि चुनाव प्रक्रिया और अविश्वास प्रस्ताव की जांच दो अलग-अलग स्तर पर आगे बढ़ेगी.
स्थानीय प्रशासन और राजनीति पर असर
इस फैसले से जहां एक ओर पंचायत स्तर की राजनीति में हलचल बनी हुई है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर कानूनी स्पष्टता भी सामने आई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है.
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