
Fake ST Certificate: शिवपुरी जिले में गुरुवार को असम में तैनात एक आईटीबीपी जवान गांव में बकरी चराता मिला, लेकिन जब.बकरी चराते मिले युवक का राज खुला तो मामले ने लोगों को हैरत में डाल दिया. मामला फर्जी आदिवासी प्रमाण पत्र से जुडा है. केस की परतें उधेड़ने के बाद अब आईटीबीपी मुख्यालय आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में जुट गया है.
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आईटीबीपी में नौकरी पाने के लिए फर्जी आदिवासी दस्तावेज बनाए
रिपोर्ट के मुताबिक कोलारस तहसील के भूरा गुर्जर ने आईटीबीपी में नौकरी पाने के लिए गांव के हरीसिंह नामक आदिवासी युवक के दस्तावेजों को फोर्ज किया था. दस्तावेज में आदिवासी हरीसिंह बनकर आईटीबीपी में भर्ती हुआ भूरा सिंह पिछले एक साल नौकरी कर रहा है और तनख्वाह भी उठा रहा है, लेकिन एक दिन अधिकारियों को उस पर शक हो गया.
अजब MP में गजब फर्जीवाड़ा... नाम किसी का,ITBP में नौकरी कर रहा कोई और शख्स #MadhyaPradesh pic.twitter.com/LVsX16EwaB
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) March 27, 2025
हाव-भाव से अधिकारियों को उसे आदिवासी नहीं होने का शक हुआ
अधिकारियों को सोनिपुर जिले में तैनात भूरा गुर्जर के हाव-भाव देखकर उसके आदिवासी नहीं होने का शक हुआ, तो मामले जांच-पड़ताल की गई, फिर इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलती चली गई. दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला कि हरीसिंह नाम से एक नहीं, बल्कि दो युवक हैं, तो आईटीबीपी अधिकारियों को माथा ठनक गया.
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बकरी चराने वाले हरी सिंह और ITBP में तैनात हरीसिंह का खुला राज
मामले की जांच के लिए आईटीबीपी मुख्यालय से रिपोर्ट शिवपुरी जिला कलेक्टर मुख्यालय पर भेजी गई और कलेक्टर की जांच में मामले का खुलासा हुआ. युवक के वेरिफिकेशन के लिए भूरा सिंह का निवास प्रमाण पत्र जांचने के लिए पटवारी को गांव भेजा गया, जिसमें बकरी चराने वाले हरी सिंह और आईटीबीपी में तैनात हरीसिंह का राज खुल गया.
कोलारस एसडीम बोले, आरोपी भूरा सिंह पर र्ज कराृया जा रहा है FIR
इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले एसडीएम, कोलारस अनूप श्रीवास्तव,ने बताया कि मामले की जानकारी आईटीबीपी को भेज दी गई है और आरोपी भूरा सिंह पर एफआईआर भी दर्ज कराृया जा रहा है. बताया जा रहा है कि आरोपी भूरा गुर्जर वर्तमान में आईटीबीपी की 54वीं वाहिनी में असम के सोनितपुर जिले में तैनात है.
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9 साल पहले आगरा गए आदिवासी युवक हरीसिंह से मिला था आरोपी
जानकारी में सामने आया है कि बकरी चराते गांव में मिले असली हरीसिंह 9 साल पहले आलू खोदने के लिए आगरा गया था, वहां उसकी मुलाकात भूरा गुर्जर से हुई थी. वहीं, पर आरोपी ने हरी सिंह को 10 बीघा जमीन देने का लालच देकर उसकी 8वीं की अंकसूची, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र ले लिया था.
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असली और नकली हरीसिंह के आधार कार्ड पर अलग-अलग नबंर मिले
जांच में सामने आया कि असली और नकली हरीसिंह के आधार नंबर अलग-अलग पाए गए हैं, लेकिन नाम और पता एक जैसा है. यही नहीं, आरोपी भूरा गुर्जर के माता-पिता के आधार कार्ड भी अलग-अलग नंबरों के साथ दर्ज मिले हैं. मामले की पूरी जांच आईटीबीपी मुख्यालय फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले भूरा गुर्जर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी.
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