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अजब MP में गजब फर्जीवाड़ाः गांव में बकरियां चराता मिला ITBP का जवान, रिकॉर्ड में असम में है तैनात!

Youth Become ITBP Soldier: फर्जी दस्तावेजों के जरिए आईटीबीपी बल में एक साल से नौकरी कर रहे भूरा सिंह का राज खुला तो मुख्यालय में बैठे अधिकारियों के होश उड़ गए. गांव के हरीसिंह नामक आदिवासी युवक के दस्तावेजों से जाली दस्तावेज तैयार कर फौज में भर्ती हुआ आरोपी अभी सोनितपुर जिले में तैनात है.

अजब MP में गजब फर्जीवाड़ाः गांव में बकरियां चराता मिला ITBP का जवान, रिकॉर्ड में असम में है तैनात!
Youth become ITBP Jawan with Fake Certificate

Fake ST Certificate: शिवपुरी जिले में गुरुवार को असम में तैनात एक आईटीबीपी जवान गांव में बकरी चराता मिला, लेकिन जब.बकरी चराते मिले युवक का राज खुला तो मामले ने लोगों को हैरत में डाल दिया. मामला फर्जी आदिवासी प्रमाण पत्र से जुडा है. केस की परतें उधेड़ने के बाद अब आईटीबीपी मुख्यालय आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में जुट गया है.

फर्जी दस्तावेजों के जरिए आईटीबीपी बल में एक साल से नौकरी कर रहे भूरा सिंह का राज खुला तो मुख्यालय में बैठे अधिकारियों के होश उड़ गए. गांव के हरीसिंह नामक आदिवासी युवक के दस्तावेजों से जाली दस्तावेज तैयार कर फौज में भर्ती हुआ आरोपी अभी सोनितपुर जिले में तैनात है.

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आईटीबीपी में नौकरी पाने के लिए फर्जी आदिवासी दस्तावेज बनाए

रिपोर्ट के मुताबिक कोलारस तहसील के भूरा गुर्जर ने आईटीबीपी में नौकरी पाने के लिए गांव के हरीसिंह नामक आदिवासी युवक के दस्तावेजों को फोर्ज किया था. दस्तावेज में आदिवासी हरीसिंह बनकर आईटीबीपी में भर्ती हुआ भूरा सिंह पिछले एक साल नौकरी कर रहा है और तनख्वाह भी उठा रहा है, लेकिन एक दिन अधिकारियों को उस पर शक हो गया.

हाव-भाव से अधिकारियों को उसे आदिवासी नहीं होने का शक हुआ

अधिकारियों को सोनिपुर जिले में तैनात भूरा गुर्जर के हाव-भाव देखकर उसके आदिवासी नहीं होने का शक हुआ, तो मामले जांच-पड़ताल की गई, फिर इस सनसनीखेज फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलती चली गई. दस्तावेजों की पड़ताल में पता चला कि हरीसिंह नाम से एक नहीं, बल्कि दो युवक हैं, तो आईटीबीपी अधिकारियों को माथा ठनक गया. 

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जांच में पता चला कि कोलारस तहसील के चकरा गांव का मूल निवासी हरी सिंह एक आदिवासी है, जिसके दस्तावेजों के आधार पर जाली कागज बनाकर भूरा गुर्जर ने आईटीबीपी में भर्ती हुआ था. भूरा गुर्जर ने अपना पता भी चकरा गांव का दिया था. दस्तावेजों की जांच में इसकी पुष्टि हुई है.

बकरी चराने वाले हरी सिंह और ITBP में तैनात हरीसिंह का खुला राज

मामले की जांच के लिए आईटीबीपी मुख्यालय से रिपोर्ट शिवपुरी जिला कलेक्टर मुख्यालय पर भेजी गई और कलेक्टर की जांच में मामले का खुलासा हुआ. युवक के वेरिफिकेशन के लिए भूरा सिंह का निवास प्रमाण पत्र जांचने के लिए पटवारी को गांव भेजा गया, जिसमें बकरी चराने वाले हरी सिंह और आईटीबीपी में तैनात हरीसिंह का राज खुल गया.

कोलारस एसडीम बोले, आरोपी भूरा सिंह पर र्ज कराृया जा रहा है FIR

इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाले एसडीएम, कोलारस अनूप श्रीवास्तव,ने बताया कि मामले की जानकारी आईटीबीपी को भेज दी गई है और आरोपी भूरा सिंह पर एफआईआर भी दर्ज कराृया जा रहा है. बताया जा रहा है कि आरोपी भूरा गुर्जर वर्तमान में आईटीबीपी की 54वीं वाहिनी में असम के सोनितपुर जिले में तैनात है.

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आदिवासी युवक ने पूछताछ में बताया कि असम में तैनात भूरा गुर्जर ने 10 बीघा जमीन का लालच देकर उसके आदिवासी जाति और निवास प्रमाण पत्र लिए थे और उसके दस्तावेज पर अपने नाम अंकित कर फर्जी दस्वावेज बनावकर आईटीबीपी भर्ती की परीक्षा पास की थी. 

9 साल पहले आगरा गए आदिवासी युवक हरीसिंह से मिला था आरोपी

जानकारी में सामने आया है कि बकरी चराते गांव में मिले असली हरीसिंह 9 साल पहले आलू खोदने के लिए आगरा गया था, वहां उसकी मुलाकात भूरा गुर्जर से हुई थी. वहीं, पर आरोपी ने हरी सिंह को 10 बीघा जमीन देने का लालच देकर उसकी 8वीं की अंकसूची, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र ले लिया था.

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आरोपी ने आदिवासी युवक हरीसिंह के दस्तावेजों पर अपने फोटो लगवाकर डिजिटल प्रमाण पत्र बनाए थे. उसने जाली दस्तावेज में न सिर्फ खुद को आदिवासी बताया था, बल्कि अपने माता-पिता, पत्नी और दादा के आधार कार्ड में भी हरीसिंह आदिवासी की पीढ़ियों के नाम दर्ज करवाए थे.

असली और नकली हरीसिंह के आधार कार्ड पर अलग-अलग नबंर मिले

जांच में सामने आया कि असली और नकली हरीसिंह के आधार नंबर अलग-अलग पाए गए हैं, लेकिन नाम और पता एक जैसा है. यही नहीं, आरोपी भूरा गुर्जर के माता-पिता के आधार कार्ड भी अलग-अलग नंबरों के साथ दर्ज मिले हैं. मामले की पूरी जांच आईटीबीपी मुख्यालय फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाले भूरा गुर्जर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी.

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