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भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद मामले में प्रशासन अलर्ट, थोड़ी देर में आएगा HC का फैसला; छावनी बना इलाका

Bhojshala Temple Kamal Maula Mosque Dispute: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर की धार्मिक प्रकृति के विवाद के मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई की तारीख तय की है.

भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद मामले में प्रशासन अलर्ट, थोड़ी देर में आएगा HC का फैसला; छावनी बना इलाका
भोजशाला विवाद में हैं तीन पक्ष, फैसले से पहले धार में सुरक्षा चाकचौबंद.

Bhojshala Dispute: धार स्थित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट कुछ समय बाद (15 मई को लगभग ढाई बजे) अपना फैसला सुनाने वाला है. उससे पहले ही भोजशाला के आसपास और धार जिले में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी है. कमाल मौला मस्जिद में आज जुम्मे की नमाज भी पढ़ी जानी है, जिसको लेकर प्रशासन अलर्ट पर है. इंदौर स्थित हाईकोर्ट बेंच के फैसले पर हिंदू, जैन और मुस्लिम पक्ष की नजरें टिकी हुई हैं. करीब 25 दिनों तक चली मैराथन बहस और सभी संबद्ध पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने इस मामले से संबंधित पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू की थी. मामले से जुड़े वकीलों ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार के लिए जारी वाद सूची में भोजशाला विवाद को लेकर दायर सभी छह मुकदमों में निर्णय सुनाने का जिक्र किया गया है.

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तीन पक्षों ने पेश की दलीलें

हाईकोर्ट ने विवादित स्मारक से जुड़े अलग-अलग धार्मिक विश्वासों, ऐतिहासिक दावों, कानूनी प्रावधानों की जटिलताओं के साथ ही हजारों दस्तावेजों की पृष्ठभूमि में सुनवाई की है. सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश कीं और स्मारक में अपने-अपने समुदाय के लोगों के लिए उपासना का विशेष अधिकार मांगा है. यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है.

मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते लोग.

मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते लोग.

तीनों पक्ष करते हैं ये दावा

धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने विवादित परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है.

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एएसआई ने किया ये दावा

एएसआई ने स्मारक के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद एक विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था.

गश्त कर रही पुलिस.

गश्त कर रही पुलिस.

मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के सर्वे को बताया एकपक्ष वाला

हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख गवाही देते हैं कि यह परिसर मूलत: एक मंदिर था. उधर, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट ‘पक्षपातपूर्ण' है और इसे हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं के दावों का समर्थन करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

एएसआई ने इस दलील का खंडन करते हुए अदालत में कहा था कि सर्वेक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विशेषज्ञों की मदद से अंजाम दिया गया है. एएसआई ने कहा कि सर्वेक्षण दल में तीन मुस्लिम जानकार शामिल थे और सर्वेक्षण के दौरान इस समुदाय के प्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे.

ASI 98 दिनों तक किया सर्वे

हाईकोर्ट ने 11 मार्च 2024 को एएसआई को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था. एएसआई ने 22 मार्च 2024 से इस परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था. एएसआई ने 98 दिनों के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 15 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की थी.

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