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सागौन की तस्करी का अनूठा तरीका! बांस की आड़ में छिपाई करोड़ों की लकड़ी, अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश

मऊगंज में सागौन तस्करी का बड़ा खुलासा हुआ, जहां बांस की आड़ में करोड़ों की लकड़ी छुपाकर कई राज्यों से ले जाई जा रही थी. GPS लोकेशन, फर्जी कागजात और ड्राइवर की झूठी कहानी ने पूरे इंटरस्टेट तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया.

सागौन की तस्करी का अनूठा तरीका! बांस की आड़ में छिपाई करोड़ों की लकड़ी, अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश

Teak Smuggling Case India: सागौन की तस्करी का अनूठा तरीका सामने आया है, जिसमें बांस की आड़ में करोड़ों की इमारती लकड़ी छुपाकर कई राज्यों से ले जाई जा रही थी. पश्चिम बंगाल से चली यह गाड़ी उत्तर प्रदेश के बरेली पहुंचनी थी, लेकिन रास्ते में ट्रक के एमपी के मऊगंज पहुंचते ही पूरे खेल का पर्दाफाश हो गया. GPS लोकेशन, फर्जी कागजात और ड्राइवर की झूठी कहानी ने इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का बड़ा खुलासा कर दिया.

ट्रक की गायब लोकेशन और पहला बड़ा सुराग

15 मार्च को पश्चिम बंगाल से सागौन की लकड़ी से भरा ट्रक रवाना हुआ था. बरेली जाना था, लेकिन 18 मार्च को वह एमपी के मऊगंज में पाया गया. बांस की बल्लियों के बीच छुपाए गए 127 नग सागौन की कीमत लगभग 18 लाख रुपये बताई गई. जब ट्रांसपोर्टर ने वाहन पर लगाए गए GPS से लोकेशन ट्रैक की तो ट्रक प्रयागराज के घूरपुर इलाके में मिला. पुलिस ने ड्राइवर रसपाल को पकड़ा तो उसने खुद को लूटे जाने की झूठी कहानी सुनाई, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर सारा सच सामने आ गया.

ड्राइवर का कबूलनामा और तस्करों का कनेक्शन

ड्राइवर रसपाल ने कबूला कि सागौन की लकड़ी मऊगंज में ही उतार दी गई थी और इसे दूसरी गाड़ी से बिहार भेजने की तैयारी चल रही थी. मामला आगे बढ़ा तो पता चला कि इस खेल में बिहार के पूर्णिया निवासी बड़े तस्कर चंदन जायसवाल का नाम सामने आ रहा है. मऊगंज के ही मोहम्मद शाहिद ने हनुमना बॉर्डर पर ट्रक रिसीव किया था और मिलकर लकड़ी को दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने की साजिश रची थी. पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने उनके इरादों पर पानी फेर दिया.

तस्करी का नेटवर्क कई राज्यों में फैला  

जांच गहराई में गई तो परत दर परत खुलासा होने लगा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से जुड़ा एक संगठित नेटवर्क है. मूल्यवान सागौन की लकड़ी को फर्जी दस्तावेजों, अंडर‑इनवॉइसिंग और टैक्स चोरी के जरिए अवैध रूप से खपाया जा रहा था, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हो रहा था.

फर्जी दस्तावेजों का खेल 

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि लकड़ी 15 मार्च को लोड हुई, लेकिन बिल्टी 18 मार्च को बनी और E‑Way Bill 19 मार्च को तैयार किया गया. यानी पहले तस्करी हुई और बाद में कागज़ बनाकर माल को वैध दिखाने की कोशिश हुई. यह भी सामने आया कि पश्चिम बंगाल के लोडर ने दावा किया कि कागज़ात तैयार किए जा रहे थे और ट्रांसपोर्टर ट्रक लेकर भाग गया. सवाल ये उठता है कि यदि ऐसा था तो 9 मार्च से 17 मार्च तक कोई शिकायत क्यों दर्ज नहीं हुई?

मऊगंज पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

मऊगंज पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 150/2026 दर्ज किया है और बीएनएस धारा 316(3) के तहत केस पंजीबद्ध किया है. तीन में से दो आरोपी हिरासत में हैं और पूछताछ जारी है. पुलिस का कहना है कि जैसे‑जैसे साक्ष्य मिल रहे हैं, तस्करी में शामिल अन्य लोगों पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी.

सिस्टम पर बड़ा सवाल 

यह मामला अब केवल मऊगंज तक सीमित नहीं है. यह पूरे सिस्टम पर सवाल उठाता है कि जब कागज़ पर सब कुछ सही दिखता है, तब भी जमीन पर अंतरराज्यीय सागौन तस्करी का बड़ा खेल चल रहा है. सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क में वन विभाग की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है, जो मामले को और गंभीर बनाती है.

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