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RTI से बड़ा खुलासा- सामान्य सर्जन वर्षों से कर रहा था सिजेरियन ऑपरेशन, HC ने स्वास्थ्य विभाग से मांगा जवाब

RTI: याचिकाकर्ता ने आरटीआई के तहत जानकारी में पाया कि उक्त अस्पताल में विशेषज्ञ है ही नहीं. अस्पताल द्वारा सीएमएचओ (CMHO) को भी अपने जवाब में बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला रोग विशेषज्ञ की केवल सलाह ली जाती है.

RTI से बड़ा खुलासा- सामान्य सर्जन वर्षों से कर रहा था सिजेरियन ऑपरेशन, HC ने स्वास्थ्य विभाग से मांगा जवाब

Right to Information: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक निजी अस्पताल (Private Hospital) में सामान्य डॉक्टर या जनरल सर्जन से सिजेरियन आपरेशन कराने का आरोप लगाया गया है. इस संबंध में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने जनहित याचिका पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (Health and Family Welfare Department) के सचिव सहित अन्य से जवाब मांगा है. हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि हरदा स्थित एक निजी अस्पताल में विशेषज्ञ के स्थान पर सामान्य डाॅक्टर (Doctor) या जनरल सर्जन (General Surgeon) द्वारा सिजेरियन ऑपरेशन (Cesarean Operation) किया जा रहा है.

कोर्ट ने क्या कहा?

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति (Justice) विनय सराफ की युगलपीठ ने इस सिलसिले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, नेशनल मेडिकल कमीशन, कलेक्टर हरदा, सीएमएचओ और श्री वेंकटेशन हास्पिटल को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है.

किसने रखा था ये मामला?

जनहित याचिकाकर्ता हरदा निवासी विजय बजाज की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि जनहित याचिकाकर्ता ने आरटीआई (RTI) के तहत मिली जानकारी में पाया कि श्री वेंकटेश अस्पताल में कई वर्षों से सामान्य डॉक्टरों द्वारा प्रसव के दौरान महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया जा रहा है. नियमानुसार महिला रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) द्वारा ही यह ऑपरेशन किया जाना चाहिए.

याचिकाकर्ता ने आरटीआई के तहत जानकारी में पाया कि उक्त अस्पताल में विशेषज्ञ है ही नहीं. अस्पताल द्वारा सीएमएचओ (CMHO) को भी अपने जवाब में बताया कि सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला रोग विशेषज्ञ की केवल सलाह ली जाती है.

जनहित याचिकाकर्ता ने इस संबंध में एमपी मेडिकल काउंसिल को शिकायत की थी. काउंसिल ने सीएमएचओ को शिकायत बढ़ा दी. इसके अलावा कलेक्टर को भी शिकायत कर अस्पताल के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने की मांग की गई. जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी.

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