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जीवाजी यूनिवर्सिटी: 114 में से 91 स्टूडेंट एक ही सब्जेक्ट में क्यों हुए फेल? विवि ने कहा RTI से मांगों जवाब

Education News: ग्वालियर शहर के एक कॉलेज में MBA 3rd सेमेस्टर के 114 में से 91 स्टूडेंट एक ही सब्जेक्ट टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट में फेल हो गए. हैरानी की बात यह भी है कि बीते सेमेस्टर जिन छात्रों ने टॉप किया था वे भी फेल हो गए या कर दिए गए. छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से परीक्षाओं (University Exam) और उसके रिजल्ट (University Exam Results) में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है.

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जीवाजी यूनिवर्सिटी: 114 में से 91 स्टूडेंट एक ही सब्जेक्ट में क्यों हुए फेल? विवि ने कहा RTI से मांगों जवाब

Jiwaji University Gwalior News: ग्वालियर के जीवाजी विश्विद्यालय (Jiwaji University Gwalior) की चर्चा हमेशा ही अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए होती रहती है. हालिया मामला भी ऐसा ही अजब-गजब है, विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक कॉलेज में चलने वाले एमबीए (MBA Course) कोर्स में पढ़ने वाले 114 छात्र-छात्राओं (MBA Students) में से 91 सिर्फ एक सब्जेक्ट टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट (Total Quality Management) में फेल (Fail Student) हो गए हैं. वे आंदोलन कर अपनी कॉपी (Answer Sheet Reopen) दिखाने की मांग कर रहे हैं. सवाल ये भी कि जब एक सब्जेक्ट ने 90 फीसदी बच्चे पास होने लायक भी नंबर नहीं ले सके, तो क्या इसके लिए पढ़ाने वालों की योग्यता पर सवालिया निशान नहीं है?

पूरा मामला ऐसे समझिए

ग्वालियर शहर के एक कॉलेज में MBA 3rd सेमेस्टर के 114 में से 91 स्टूडेंट एक ही सब्जेक्ट टोटल क्वालिटी मैनेजमेंट में फेल हो गए. हैरानी की बात यह भी है कि बीते सेमेस्टर जिन छात्रों ने टॉप किया था वे भी फेल हो गए या कर दिए गए. छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से परीक्षाओं (University Exam) और उसके रिजल्ट (University Exam Results) में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है.

सिथौली स्थित अनंत कॉलेज (Anant College) के MBA तीसरे सेमेस्टर के 114 छात्र छात्राओं में से 91 छात्रों को एक ही सब्जेक्ट में फेल कर दिया गया है. पूर्व में जो छात्र टॉपर थे उन्हें भी फेल कर दिया गया है. आरोप है कि विश्विद्यालय के VC और कुल सचिव गलत तरह से कॉपियां चेक करवाते हैं, इसी के चलते स्टूडेंट्स के साथ अन्याय हो रहा है.

अब बीते दो दिनों से छात्र-छात्राएं कुलपति (Vice Chancellor या VC) और रजिस्ट्रार के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि 91 बच्चों में से दो कॉपियां टॉपर की रिचेक की जाए, ताकि इस फर्जीवाड़े का खुलासा हो सके.

आंदोलन में पहुंचे NSUI नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि ठेके पर कॉपियां चेक कराई जा रही हैं. ठेके पर कॉपियां चेक कराने पर विश्वविद्यालय को कमीशन मिलता है, लेकिन इसके चलते छात्रों को भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.

छात्र रिव्यू और रीचेकिंग के समय जब देखते हैं तो उसमें पता चलता है कि कॉपी चेक तो हुई है लेकिन नंबर नहीं दिए जा रहे हैं. इसलिए छात्रों के साथ बहुत गलत काम हो रहा है. यदि प्रबंधन सुनवाई नहीं करता है तो कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा.

विश्वविद्यालय का क्या कहना है?

वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन कुछ अजीब ही तर्क दे रहा. यूनिवर्सिटी के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी डॉ विमलेंद्र सिंह राठौर का कहना है कि विश्वविद्यालय ने उनमें से कुछ छात्रों की रैंडम कॉपियां चेक की तो उसमें मूल्यांकन सही निकला है. फिर भी छात्रों को लगता है तो वे सूचना के अधिकार (Right To Information) यानी कि आरटीआई (RTI) के तहत कॉपियां निकलवा सकते हैं.

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