रायसेन जिले की बाड़ी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत समनापुर जागीर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने वाले 13 गरीब परिवार आज बेघर होने की कगार पर खड़े हैं. सरकार ने जिन गरीबों को कच्ची झोपड़ियों से निकालकर पक्की छत देने का सपना दिखाया था, आज वही परिवार राजस्व विभाग के नोटिस हाथ में लेकर दर-दर भटकने को मजबूर हैं.
मामला यह है कि ग्राम पंचायत समनापुर जागीर के 13 गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान स्वीकृत किए गए. योजना के अनुसार मकान बने और परिवारों ने वहीं रहकर अपना जीवन-यापन शुरू कर दिया. लेकिन अब इन्हीं पक्के मकानों को अतिक्रमण बताते हुए राजस्व विभाग ने उन्हें तोड़ने के नोटिस जारी कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब ग्राम पंचायत ने योजना का लाभ दिया और मकान बनवाए गए, तब राजस्व विभाग, सरपंच और सचिव की जिम्मेदारी कहां थी. मकान बन जाने के बाद अब गरीब परिवारों को बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर ये मकान बने हैं, वह उद्योग विभाग की भूमि है.

PM Awas Yojana: राजस्व विभाग का नोटिस लेकर बैठी महिलाएं.
40 वर्षों से भूमि पर निवास
योजना के तहत यहीं मकान क्यों बनवाए गए
सवाल यह है कि यदि भूमि उद्योग विभाग की थी, तो फिर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहीं मकान क्यों बनवाए गए. आज हालात यह हैं कि जिन गरीबों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पक्का मकान मिला, वही परिवार कलेक्टर कार्यालय से लेकर अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं. पीड़ित परिवारों का कहना है, सरकार ने हमें घर दिया, अब वही घर हमसे छीना जा रहा है. हमने कोई गलत काम नहीं किया, फिर हमारे पेट पर लात क्यों मारी जा रही है.
35 लाख का लोन चुकाने के लिए पति ने पत्नी के मर्डर का किया प्रयास, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार