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गिरफ्त में "पुलिस"! छाछ-आम जैसे कोडवर्ड, 2 से 10 लाख में मान्यता का सौदा, देखिए NDTV नर्सिंग कॉलेज पड़ताल

Nursing Scam: एक कॉलेज को पात्र बनाने के नाम पर आरोपी 2-10 लाख तक वसूलते थे, जांच में पता चला है कि वसूली का गिरोह सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज ही चला रहा था, उसने अलग-अलग जिलों में बिचौलियों की टीम बना रखी थी. जिस कॉलेज से सौदा तय होता था, उनके यहां निरीक्षण का समय और दिन पहले ही बता दिया जाता था.

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गिरफ्त में

MP Nursing College Scam: मध्यप्रदेश में नर्सिंग घोटाले (Madhya Pradesh Nursing Scam) की जांच करने वाली जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) के इंस्पेक्ट और अधिकारी तक जांच की आंच पहुंच चुकी है. सीबीआई के ही चार अफ़सरों पर रिश्वत लेने के आरोप में एफआईआर (FIR) दर्ज हो गई है. इनमें एक डिप्टी सुपरीटेंडेंट स्तर का अधिकारी भी शामिल है. सीबीआई ने नर्सिंग घोटाले के सिलसिले में 23 लोगों पर केस दर्ज किया है. पिछले साल एनडीटीवी की तफ्तीश के बाद अगस्त 2023 में राज्य के 19 ऐसे नर्सिंग कॉलेजों (Nursing College) की मान्यता रद्द कर दी गई थी, जो सिर्फ़ क़ाग़ज़ों में चल रहे थे. इसके अगले महीने यानी सितंबर 2023 में हाइकोर्ट (MP High Court) ने राज्य में 2020-21 के दौरान रजिस्टर्ड 670 नर्सिंग कॉलेजों की CBI जांच (CBI Investigation) का आदेश दिया था. अब एक बार फिर नर्सिंग घोटाले को लेकर NDTV ने पड़ताल की है जिसमें कई चौंकाने वाली बाते सामने आयी हैं.

पहले देखिए पुरानी कहानी

पिछले साल एनडीटीवी की तफ्तीश में दिखाया गया था कि जिन पर जांच और सत्यापन का जिम्मा था, वो खुद कॉलेज खोलकर बैठे थे. कैसे मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन मंजिला अपार्टमेंट के पहले माले पर कुछ लोग रहते हैं दूसरे पर लिखा है सविता इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस. ये कॉलेज पूर्व निदेशक चिकित्सा शिक्षा और उनके परिजनों के नाम पर है. यहां तीन कमरे में पूरा नर्सिंग कॉलेज चल रहा था.

सविता इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस बताता है कि जो नियम बना रहे थे, वही कैसे इन नियमों को धता बता रहे थे. ना कॉलेज की बिल्डिंग, ना लैब, ना अस्पताल ना ट्रेनिंग. ज़रा सोचिए यहां से पढ़े लिखे नर्स क्या काम करते होंगे क्योंकि सविता इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंस से 4 बैच पढ़कर निकल चुके हैं.

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फिर शुरु हुई CBI जांच

इस घटना के बाद बहुत कुछ बदला. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh Court Order) के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू की, 600 में से 308 नर्सिंग कॉलेजों की जांच रिपोर्ट दी. रीवा के सरकारी कॉलेज तक को अनफिट बता दिया. वहीं भोपाल के साकेत नगर में स्थित एपीएस एकेडमी को योग्य यानी फिट बताया.

लेकिन जरा देखिये. इस बिल्डिंग से बीएससी नर्सिंग की 40 और जीएनएम की 60 सीटें संचालित होने का दावा किया गया जहां 300 बिस्तर का अस्पताल अनिवार्य था. कॉेलज ने कहा उन्होंने निजी अस्पताल से अनुबंध किया है. हकीकत ये है कि किराये की बिल्डिंग है जिसमें भोपाल पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल चलता है.

नर्सिंग फर्जीवाड़े मामले में व्हिसलब्लोअर और NSUI नेता रवि परमार का आरोप है कि सीबीआई के अफसर के साथ मिलकर नर्सिंग के संचालकों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर क्लीन चीट ली. रवि परमार को आशंका है कि अभी भी कई और नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं जिनकी जांच होनी चाहिए.

रवि परमार ने NDTV को बताया कि हम लगातार नर्सिंग कॉलेज में हो रहे फ़र्ज़ीवाड़े को लेकर आवाज़ उठाते आए हैं. कई ऐसे कॉलेज है जहाँ पर भ्रष्टाचारियों दलालों ने पैसा लेकर उन्हें सूटेबल क़रार दिया है, जबकि वो कॉलेज सिर्फ़ काग़ज़ों में चल रहे हैं. असल में देखा जाए तो ये सिर्फ़ एक कॉलेज नहीं बल्कि कई ऐसे कॉलेज है जिन में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. इसमें और भी बहुत बड़े ख़ुलासे होने हैं हम कई और दलालों और भ्रष्टाचारियों की जानकारी CBI को ज़रूर सौंपेंगे. भ्रष्टाचारियों और दलालों के बीच स्टूडेंट का भविष्य अंधकार में जा रहा है पहले परीक्षा की परेशानी थी और अब घोटाले में कॉलेज की ये तस्वीरें सामने आ रही है

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सीबीआई जांच में 169 कॉलेज फिट, 73 में कमियां और 66 अनफिट

मामले में फर्जीवाड़े के आरोपों की वजह से 375 नर्सिंग कॉलेजों के करीब 1 लाख स्टूडेंट्स पिछले 4 साल से परीक्षा का इंतजार कर रहे थे, अब जाकर परीक्षा शुरु हुई लेकिन उसमें भी जिन 139 कॉलेजों को फर्जी बताया गया उनमें पढ़ने वाले 12,000 छात्रों का भविष्य अधर में चला गया.

अब जांच पर आंच, उठ रहे हैं ये सवाल

अब नर्सिंग कॉलेज घोटाले मामले में 4 सीबीआई अफसरों सहित कुल 23 आरोपी हैं. जिनपर रिश्वत ले-देकर अपात्र कॉलेजों को पात्र बनाने का आरोप है. गिरफ्तार सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज को बर्खास्त कर दिया गया है, डीएसपी आशीष प्रसाद और इंस्पेक्टर रिषिकांत असाठे नामजद हैं, सीबीआई अधिकारी सुशील कुमार मजोका भी गिरफ्तार हैं. सीबीआई की छापेमारी में 2.33 करोड़ नकद, चार सोने के बिस्किट और 36 डिजिटल डिवाइस मिली है.

एक कॉलेज को पात्र बनाने के नाम पर आरोपी 2-10 लाख तक वसूलते थे, जांच में पता चला है कि वसूली का गिरोह सीबीआई इंस्पेक्टर राहुल राज ही चला रहा था, उसने अलग-अलग जिलों में बिचौलियों की टीम बना रखी थी. जिस कॉलेज से सौदा तय होता था, उनके यहां निरीक्षण का समय और दिन पहले ही बता दिया जाता था रिश्वत के लेन देन में छाछ गिलास, अचार की बरनी जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल होता था, पैसा उठाने वाले को कैरियर, लाखों रुपए को अचार की बरनी और रुपयों की गिनती किलो आम कहते थे लेकिन सवाल ये है कि क्या सीबीआई के इस दफ्तर के कुछ अधिकारी-कर्मचारी इस खेल में शामिल थे या मामले की आंच ऊपर तक है.
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NDTV ने जब घोटाले की परतें खोली तो कई और बातों का हुआ खुलासा

कागजों पर चल कॉलेज तो एक मसला था, लेकिन NDTV पड़ताल में ये भी पता लगा कि इन कॉलेजों में पढ़ाने वाले हजारों शिक्षक दूसरे राज्यों से हैं, जिन्हें एक साथ कई कॉलेजों में पढ़ाना बताकर मान्यता ली गई है. इसके बाद सरकार ने सख्ती की बात भी कही. लेकिन हकीकत में नियम कड़े करने के बजाए उन्हें आसान बना दिया गया.

पुराना नियम था कि कॉलेज 23,000 वर्ग फीट में हो, नया कॉलेज अब 8000 वर्ग फीट में भी संचालित हो सकता है. पुराना नियम कहता है कि असिस्टेंट प्रोफेसर एवं शिक्षक - प्रति 10 छात्र पर एक हो, नए नियम में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं शिक्षक- प्रति 20 छात्र पर एक कर दिया गया, पुराना नियम - नर्सिंग लैब के लिये 1500 वर्गमीटर की जगह हो जबकि नये में इसे 900 वर्ग मीटर कर दिया गया.
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सालों से घोटाला चल रहा है, भ्रष्टाचार, अनदेखी और लापरवाही की वजह से लाखों छात्रों के भविष्य पर संकट है लेकिन ना पहले और ना अब पता चला कि विभागीय मंत्री या सरकार कर क्या रही है.

ये एमपी है साहब... अजब है और गजब भी

जहां 5 नये मेडिकल कॉलेजों की मान्यता इसलिए खतरे में है क्योंकि 445 में सिर्फ 160 पद भरे गये हैं, जहां नर्सिंग घोटाले की जांच करने वाले ही घोटाले के आरोप में गिरफ्तार हो गये हैं. ये वो प्रदेश हैं जहां मंत्री-अफसरों की कार, बाइक, लैपटॉप खरीदी को भी विकास कार्य के खर्च में माना जाएगा. जहां आचार संहिता हटते ही मंत्रीजी के लिये नई चमचमाती इनोवो क्रिस्टा आएगी लेकिन आपके हिस्से में कभी अस्पताल के लिये ठेला, साइकिल, अगर मौत हो गई तो कंधा, रिक्शा. इसलिये हमने कहा है कि राज्य में स्वास्थ्य मंत्री नहीं हैं, हों तो हमें भी बता दीजिएगा, कहां हैं, कैसे हैं, और क्या करते हैं? इसका इंतजार रहेगा.

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