
Illegal occupation of Jiwaji University: जमीन पर कब्जा होना आम बात है और लोग उस जमीन को दंबगों के चंगुल से छुड़ाने के लिए जिला प्रशासन के सामने गुहार लगाते नजर आते हैं, लेकिन अतिक्रमण छुड़ाने के मामले में प्रशासन का रवैया कैसा है इसका जीता-जागता सबूत जीवाजी विश्वविद्यालय (Jiwaji University) की जमीन पर अवैध कब्जा है. जीवाजी विश्वविद्यालय की लगभग सौ करोड़ रुपये की जमीन भू माफिया ने अवैध तरीके से बेच डाली और प्रशासन 19 सालों में कुछ नहीं कर पाया.
अवैध कब्जे के 33 प्लॉट पर बन गए आलीशान कोठी
दरअसल, कैलाश विहार गृह निर्माण सोसायटी ने जीवाजी विश्वविद्यालय के जमीन के 65 प्लॉट काटकर अवैध तरीके से बेच डाले, जिसमें से 33 प्लॉट पर अब आलीशान कोठियां भी बन चुकी है. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस जमीन को लेकर कलेक्टर से लेकर राजस्व मंडल तक से घोषित करवा चुका है कि ये जमीन जीवाजी विश्वविद्यालय की है, लेकिन 2005 से लेकर अब तक प्रशासन इस जमीन से अतिक्रमण को हटाकर जमीन विश्वविद्यालय को नहीं सौंप पाया और इन 19 सालों में जमीन पर अवैध कब्जा लगातार बढ़ता ही गया.

आदेश के बावजूद आखिर क्यों माफिया के आगे बेबस है प्रशासन?
जब यह मामला संज्ञान में आया तो साल 2005 में तत्कालीन तहसीलदार ने सीमांकन किया, जिसमें पाया गया कि जो जमीन कैलाश विहार हाउसिंग सोसायटी के प्रबंधकों ने बेच दी है वो जमीन जीवाजी विश्वविद्यालय की है. वहीं 24 से 30 अप्रैल, 2010 तक स्टेटिकल मशीन से सीमांकन के बाद तहसीलदार ने आदेश पारित किया कि विश्विद्यालय के 65 प्लॉट पर अवैध कब्जा है, जिसमें से 33 पर मकान बने हुए हैं, जबकि 32 खाली पड़े हैं. हालांकि तहसीलदार के फैसले के खिलाफ कैलाश विहार हाउसिंग सोसायटी ने राजस्व मंडल में अपील की. जिसके बाद राजस्व मंडल ने 30 अप्रैल, 2012 को आदेश दिए कि वे इसके सीमांकन का कार्य अपनी निगरानी में कराएं. जिसके बाद सीएलआर द्वारा एक दल गठित किया गया. वहीं 2018 में तहसीलदार द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट के बाद जेयू को कब्जा सौंपने के आदेश भी दिए गए.

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विश्वविद्यालय अपनी जमीन मुक्त कराने की लगा रहा गुहार
बता दें कि तहसीलदार ने अवैध कब्जा को लेकर जब आदेश पारित किया तब से जीवाजी यूनिवर्सिटी के प्रबंधक लगातार प्रशासन को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की भूमि से अवैध कब्जा को हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अफसर कोई न कोई बहाना बनाकर इस पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. हालांकि इस बीच जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने कलेक्टर को फिर चिट्ठी लिखी है कि उनको कब्जा दिलाया जाए.
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