विज्ञापन
Story ProgressBack

वीरता पुरस्कार पाने पर मिली जमीन का सरकार ने 14 साल तक नहीं दिया पट्‌टा, अब High Court ने लगायी फटकार

MP High Court: एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अगस्त 2010 में नोटिस जारी किये गये थे. सरकार को अप्रैल 2024 में जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया गया था. अंतिम अवसर प्रदान किये जाने के बावजूद भी जवाब पेश नहीं किया गया.

वीरता पुरस्कार पाने पर मिली जमीन का सरकार ने 14 साल तक नहीं दिया पट्‌टा, अब High Court ने लगायी फटकार

Madhya Pradesh High Court News: सेना (Indian Army) में रहते हुए दो युद्ध (Army War) में शिरकत करते हुए वीरता पुरस्कार (Gallantry Award) पाने वाले व्यक्ति को सरकार (Madhya Pradesh Governmnet) की ओर से दी गई पंद्रह एकड़ जमीन (Land) का पट्टा आवंटित न किये जाने के मामले को हाईकोर्ट (MP High Court) ने काफी गंभीरता से लिया है. सुनवाई के दौरान (High Court Hearing) न्यायालय (Court) ने पाया कि जमीन के पट्टे के लिए उसने तहसीलदार (SDM) के समक्ष आवेदन किया था. तहसीलदार द्वारा आवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं किये जाने के खिलाफ उनके पुत्र ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जस्टिस (High Court Justice) एमएस भट्टी की एकलपीठ ने पाया कि 14 साल पूर्व दायर की गयी याचिका में अभी तक सरकार की ओर से कोई जवाब पेश नहीं किया गया है. एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए तहसीलदार सोहागपुर को निर्देशित किया है कि वे चार माह में याचिकाकर्ता के आवेदन का निराकरण करें, तब तक न्यायालय ने उक्त जमीन पर अपनी रोक बरकरार रखी है.

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता साहेब सिंह बनकर की ओर से हाईकोर्ट में साल 2010 में एक याचिका दायर की गयी थी. याचिका में कहा गया था कि उनके पिता भोला सिंह भारतीय सेना (Indian Army) में थे और दो युद्ध लड़े थे. युद्ध में शौर्य का प्रदर्शन करने के कारण उन्हें वीरता पुरस्कार भी मिला था.

वीरता पुरस्कार मिलने के कारण सरकार की ओर से उन्हें ग्राम महुआ खेड़ा तहसील सोहागपुर जिला होशंगाबाद में 15 एकड़ भूमि दी गयी थी. उनके पिता ने जमीन के पट्टा जारी किये जाने के लिए साल 1995 में सोहागपुर तहसीलदार के समक्ष आवेदन दायर किया था. आवेदन अभी तक लंबित है और उनके पिता की मृत्यु हो गयी है.

एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अगस्त 2010 में नोटिस जारी किये गये थे. सरकार को अप्रैल 2024 में जवाब पेश करने के लिए अंतिम अवसर प्रदान किया गया था. अंतिम अवसर प्रदान किये जाने के बावजूद भी जवाब पेश नहीं किया गया.

कोर्ट ने क्या कहा?

एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए अपने आदेश में कहा है कि तहसीलदार सोहागपुर ने अभी तक आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया है, तो वह ग्राम सरपंच सहित अन्य संबंधित को सुनवाई का अवसर प्रदान करें. तहसीलदार चार माह की निर्धारित अवधि में आवेदन का निराकरण करें.

यह भी पढ़ें : MP High Court: फिर बनेगी मेरिट लिस्ट... MPPSC प्री एग्जाम के दो सवालों पर HC की आपत्ति, जानिए क्या थे प्रश्न

यह भी पढ़ें : NEET के बाद अब NET Exam पर उठे सवाल, एडमिट कार्ड न मिलने से परीक्षार्थी परेशान, NTA नहीं कर रहा समाधान

यह भी पढ़ें : World Blood Donor Day 2024: पहली बार डॉग को चढ़ाया गया था ब्लड, जानिए कौन किसे दे सकता है रक्त

यह भी पढ़ें : गेहूं की बढ़ती कीमतों पर सियासत, PCC चीफ ने मोहन सरकार, PMO समेत कृषि मंत्री शिवराज से मांगा जवाब

MPCG.NDTV.in पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार,लाइफ़स्टाइल टिप्स हों,या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें,सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
NDTV Madhya Pradesh Chhattisgarh
डार्क मोड/लाइट मोड पर जाएं
Our Offerings: NDTV
  • मध्य प्रदेश
  • राजस्थान
  • इंडिया
  • मराठी
  • 24X7
Choose Your Destination
Previous Article
भाजपा पार्षद पर आर्थिक सहायता के बहाने महिला से दुष्कर्म का लगा आरोप, एक्टिव हुई पुलिस
वीरता पुरस्कार पाने पर मिली जमीन का सरकार ने 14 साल तक नहीं दिया पट्‌टा, अब High Court ने लगायी फटकार
167 year old tradition was followed in Rewa Tajia was taken out on the day of Moharram know the history of Moharram month of islam religion
Next Article
रीवा में निभाई गई 167 साल पुरानी परंपरा, मोहर्रम के दिन निकाली गई ताजिया, जानें इन दिन का इतिहास
Close
;