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World Blood Donor Day 2024: पहली बार डॉग को चढ़ाया गया था ब्लड, जानिए कौन किसे दे सकता है रक्त

World Blood Donor Day: रिचर्ड लोअर रक्तदान के विज्ञान की जांच करने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने जानवरों के साथ यह प्रयोग किया था. वे बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के दो डॉग्स के बीच सफलतापूर्वक रक्त टांसफ्यूज करने में सफल रहे थे. विश्व का पहला ब्लड बैंक वर्ष 1937 में रेडक्रॉस की पहल पर अमेरिका में खुला था.

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World Blood Donor Day 2024: पहली बार डॉग को चढ़ाया गया था ब्लड, जानिए कौन किसे दे सकता है रक्त

World Blood Donor Day: अखण्ड आत्मभाव जो असीम विश्व में भरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिये मरे... अनित्य देह के लिए अनादि जीव क्या डरे? वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे... ये पंक्तियां महान कवि मैथिलीशरण गुप्त की हैं, जो हमें मनुष्यता के विभिन्न पहलुओं के बारे में सोचने को मजबूर करती हैं. कवि ने अपनी रचना के माध्यम से बताया है कि सही मायने में मनुष्य होना क्या हैं. हम निस्वार्थ भाव से सेवा करके कई अन्य मनुष्यों के जीवन में काम आ सकते हैं. रक्तदान (Blood Donation) की वजह से हम कई जिंदगी बचा सकते हैं, इसीलिए दुनिया भर में लोगों को ब्लड डोनेट करने के लिए प्रेरित किया जाता है. रक्तदान के महत्व के बारे में दुनियाभर के लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे (World Blood Donor Day) या विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है.

क्यों और कब से मनाया जा रहा है यह दिवस?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (World Health Organization) यानी डब्ल्यूएचओ (WHO) की ओर से 2004 में पहली बार वर्ल्ड ब्लड डोनर डे मनाने के बारे में विचार किया गया था. इसके अगले साल यानी वर्ष 2005 में वर्ल्ड हेल्थ असेंबली (World Health Assembly) की 58वीं महासभा में ब्लड डोनेट करने के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 14 जून को हर साल दुनिया भर में वर्ल्ड ब्लड डोनर डे के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया. 14 जून की तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इस दिन आॅस्ट्रियन-अमेरिकी वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर का जन्मदिन होता है. लैंडस्टीनर को एबीओ ब्लड ग्रुप की खोज के लिए नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) से सम्मानित किया गया था.

इस वर्ष की थीम : ‘Celebrating 20 years of giving: thank you, blood donors!'

विश्व रक्तदाता दिवस हर वर्ष किसी एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है. चूंकि इस वर्ष विश्व रक्तदाता दिवस के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं ऐसे में इस बार की थीम 20 साल जिन्होंने रक्तदान किया है उनको धन्यवाद देने व 20 वर्षों के जश्न को मनाने के लिए Celebrating 20 years of giving: thank you, blood donors! थीम निर्धारित की गई है. इस वर्ष की थीम का उद्देश्य उन लाखों स्वैच्छिक रक्त दाताओं को धन्यवाद देना है, जिन्होंने दुनिया भर के लाखों लोगों के स्वास्थ्य और वेलनेस में योगदान दिया है. ब्लड डोनेशन यानी रक्तदान को सबसे अहम उपकार माना जाता है. सुरक्षित रक्त जीवन बचाता है. जब भी और जहां भी जरूरत हो, वहां रक्त हमेशा और पर्याप्त संख्या उपलब्ध रहे इयके लिए स्वस्थ लोगों द्वारा नियमित रक्तदान करने की अहम आवश्यकता है. विश्व रक्तदाता दिवस के दिन इस दिन कई जगहों पर ब्लड डोनेशन कैंप यानी रक्तदान शिविर भी लगाए जाते हैं.

पिछले पांच वर्षों की थीम इस प्रकार हैं :-

⇒ 2023 : Give blood, give plasma, share life, share often

⇒ 2022 : Donating blood is an act of solidarity. Join the effort and save lives

⇒ 2021 : Give blood and keep the world beating

⇒ 2020 : Safe blood saves lives

⇒ 2019 : Safe blood for all

रक्तदान के फायदे अनेक

अगर आप रक्तदान करने जाते हैं तो आपको फ्री में फिजिकल चेकअप भी मिल जाता है, रक्तदान से पहले डोनर की पूरी तरह जांच होती है. नियमित रूप से रक्तदान करने वालों की बॉडी में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे दिल की बीमारी और कैंसर का खतरा कम होता है. रक्तदान से फिजिकल हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ ठीक रहती है, किसी का जीवन बचाने में योगदान व्यक्ति को मानसिक संतोष प्रदान करता है. ब्लड डोनेशन से अधिक कैलोरी बर्न होती हैं, ऐसे में रक्तदान के बाद अगर आप हेल्दी डाइट लेते हैं तो आपका वजन तेजी से कम हो सकता है.

कितने अंतराल के बाद कर सकते हैं रक्तदान

एक स्वस्थ व्यक्ति तीन महीने के अंतराल में रक्तदान कर सकता है. हमारे शरीर में 90 से 120 दिन के अंदर रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाएं) अपने आप डेड (मृत) हो जाती हैं और नए सेल्स बनती हैं, इसी वजह से तीन महीने के बाद फिर से रक्तदान करने की सलाह दी जाती है. वहीं प्लेटलेट्स डोनेट करने से पहले आपको रक्तदान करने के बाद कम से कम 7 दिन इंतजार करना जरूरी होता है. ब्लड डोनेट करने के बाद आराम करना बहुत महत्वपूर्ण होता है, वहीं आराम के साथ ही पर्याप्त मात्रा में भोजन करना चाहिए. रक्तदान के बाद ब्लड सेंटर से आपको रिफ्रेशमेंट दिया जाता है, उसे ग्रहण करना चाहिए. रक्तदान से कमजोरी नहीं होती, यह एक गलत धारणा है. एक व्यक्ति के शरीर में 5-6 लीटर रक्त होता है और वह हर 90 दिन (3 महीने) में रक्तदान कर सकता है. शरीर बहुत जल्दी यानी 24 से 48 घंटों के भीतर ही खून, लगभग 3 सप्ताह में लाल रक्त कोशिकाएं और मिनटों के भीतर प्लेटलेट्स तथा श्वेत रक्त कोशिकाओं की रिकवरी कर सकता है. इससे कोई कमजोरी नहीं आती.

कौन रक्तदान कर सकता है, कौन नहीं?

कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसकी उम्र  18-65 साल है वे रक्तदान कर सकता है. अगर आप ब्लड डोनेट करना चाहते हैं तो आपका हीमोग्लोबिन का लेवल 12.5 ग्राम से कम नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही ब्लड देने वाले का वजन 45 किलोग्राम से कम नहीं होना चाहिए. अगर आपको एक साल में हेपेटाइटिस या पीलिया की समस्या हो रही है तो आपको ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए. इसके साथ अगर आपको किसी गंभीर बीमारी का इलाज चल रहा हो तो भी ब्लड डोनेट न करें. किसी तरह के एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं तो रक्तदान न करें. मिर्गी, अस्थमा, ब्लीडिंग डिसऑर्डर, थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, पॉलीसिथीमिया के मरीज को रक्तदान नहीं करना चाहिए. पिछले एक साल में टैटू कराया है या एक्यूपंक्चर थेरेपी ली है, तो ब्लड डोनेट नहीं कर सकते. डायबिटीज में इंसुलिन का इंजेक्शन ले रहे लोग ब्लड डोनेट नहीं कर सकते हैं. रक्तदान के बाद अगर आपको जरा भी बेचैनी या परेशानी महसूस हो, तो तत्काल ब्लड सेंटर से संपर्क करें.

कौन किसे रक्त दे सकता है?

⇒ A+ ब्लड ग्रुप वाले A+ और AB+ ग्रुप वाले लोगों को अपना रक्त दे सकते हैं.

⇒ A- ब्लड ग्रुप वाले डोनर A+, AB+, A- और AB- ग्रुप वाले लोगों को अपना रक्त दे सकते हैं.

⇒ B+ ब्लड ग्रुप वाले लोग B+ और AB+ ग्रुप वाले लोगों को रक्तदान कर सकते हैं.

⇒ B- ब्लड ग्रुप वाले डोनर B-, B+, AB- और AB+ ग्रुप वाले लोगों को डोनेट कर सकते हैं.

⇒ O+ ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति A+, B+, AB+ और O+ ग्रुप वाले लोगों को रक्तदान कर सकते हैं.

⇒ O- ब्लड ग्रुप वाले यूनिवर्सल डोनर किसी भी ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को डोनेट कर सकते हैं.

⇒ AB+ ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति AB+ ग्रुप वाले लोगों को अपना रक्तदान कर सकते हैं.

⇒ AB- ब्लड ग्रुप वाले लोग AB- और AB+ ब्लड ग्रुप वाले को डोनेट कर सकते हैं.

रक्त केंद्रों के संचालन के संबंध में शीर्ष नीति निर्माणकारी निकाय है NBTC

NBTC का पूरा नाम नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल (National Blood Transfusion Council) है, जिसे राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद के नाम से भी जाना जाता है. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार वर्ष 1996में राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद का गठन किया गया था. NBTC रक्त केंद्रों के संचालन से संबंधित सभी मामलों के संबंध में शीर्ष नीति निर्माणकारी निकाय है. यह केंद्रीय निकाय है जो राज्य रक्त आधान परिषदों (State Blood Transfusion Council या SBTC) का समन्वय करता है. रक्त संचार सेवा (Blood Transfusion Services या BTS) से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के लिये अन्य मंत्रालयों तथा स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल होना भी एनबीटीसी सुनिश्चित करता है. इसका एक कार्य राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (National AIDS Control Organisation या NACO) और राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद में समन्वय प्रभाग के रूप में कार्य करना भी है. स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना, सुरक्षित रक्त आधान सुनिश्चित करना, रक्त केंद्रों को बुनियादी ढाँचा प्रदान करना और मानव संसाधनों विकास करना जैसे इसके उद्देश्य हैं.

यह भी जानिए :

रिचर्ड लोअर रक्तदान के विज्ञान की जांच करने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने जानवरों के साथ यह प्रयोग किया था. वे बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के दो डॉग्स के बीच सफलतापूर्वक रक्त टांसफ्यूज करने में सफल रहे थे. विश्व का पहला ब्लड बैंक वर्ष 1937 में रेडक्रॉस की पहल पर अमेरिका में खुला था. आज विश्व के अधिकांश ब्लड बैंकों का संचालन रेडक्रॉस एवं उसकी सहयोगी संस्थाओं द्वारा किया जाता है. WHO के अनुसार दुनिया भर में लगभग 118.54 मिलियन ब्लड डोनेशन एकत्र किया जाता है. इनमें से 40% उच्च आय वाले देशों में एकत्र किए जाते हैं, जहां दुनिया की 16% आबादी रहती है.

किस व्यक्ति का का रक्त समूह क्या हैं ये एंटीजन से निर्धारित होता है. सबसे सामान्य चार रक्त समूह A, B, AB और O हैं. इसके आधार पर रक्त समूह 8 तरह के होते हैं A+, A-, B+, B-, O+, O-, AB+ और AB- 

ब्लड या खून जिन लाल रक्त कोशिकाओं से बना होता है, उनके ऊपर प्रोटीन की एक परत होती है, जिन्हें एंटीजन या Rh कहा जाता है. Rh या तो पॉजिटिव होता है या नेगेटिव. ब्लड टाइप A में सिर्फ़ एंटीजन A होते हैं, ब्लड B में सिर्फ B, ब्लड AB में दोनों एंटीजन होते हैं और टाइप O में दोनों ही नहीं होते हैं. O ब्लड ग्रुप वाले लोगों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है, ऐसे लोगों में न तो एंटीजन A, B होते हैं और न ही RhD, इस कारण से ये ग्रुप किसी भी दूसरे ब्लड ग्रुप में आसानी से मिल जाता है. यही वजह है कि O ब्लड ग्रुप वालों का खून किसी को भी आसानी से चढ़ाया जा सकता है. हालांकि सही मायने में यूनिवर्सल डोनर O- है, क्योंकि ये रक्त किसी को भी चढ़ाया जा सकता है. जबकि O+ ब्लड ग्रुप सिर्फ A+, B+, AB+ और O+ को ही चढ़ाया जा सकता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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