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उलझ ना जाना ! चौंकने की नहीं... सतर्क रहने की जरूरत, साइबर ठगों के चंगुल से ऐसे बचे ग्वालियर के कारोबारी दंपति

Digital Arrest Alert: लोगों के बीच डिजिटल अरेस्ट शब्द इस समय काफी चर्चा में है. यह साइबर फ्रॉड का एक तरीका है. इसमें ठग पुलिस या सरकारी अधिकारी बन कॉल करते हैं और फिर वीडियो पर बंधक बनाकर आपका अकाउंट खाली कर देते हैं.

उलझ ना जाना ! चौंकने की नहीं... सतर्क रहने की जरूरत, साइबर ठगों के चंगुल से ऐसे बचे ग्वालियर के कारोबारी दंपति

Digital Arrest in MP:  ग्वालियर में एक महिला और उसके पति को डिजिटल अरेस्ट कर घर में 17 घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाकर रखा गया. जब दंपति ने बेटे का फोन नहीं उठाया तो उसने कनाडा से अपने एक कजिन के जरिये कॉल कर पुलिस को इसकी सूचना दी. जिसके बाद आधी रात को महिला डीएसपी पुलिस फोर्स लेकर हरिशंकर पुरम स्थित साईनी अपार्टमेंट पहुंची. बता दें कि रात 1:40 बजे इस बुजुर्ग दंपति को 17 घण्टे के बाद डिजिटल अरेस्ट से मुक्त कराया गया. 

ग्वालियर में ऑटोमोबाइल का कारोबार दंपति को किया  डिजिटल अरेस्ट 

ग्वालियर के झांसी रोड थाना क्षेत्र के हरिशंकर पुरम में स्थित सईनी अपार्टमेंट में रहने वाली महिला अमरजीत कौर और उनके पति का ऑटोमोबाइल का कारोबार है. बीते दिन साइबर ठगों ने इन्हें डिजिटल अरेस्ट कर धोखाधड़ी की कोशिश की.

दरअसल, महिला के पास पुलिस और सीबीआई के नाम से अज्ञात नंबर से कॉल आए और फिर ठगों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर डराया धमकाया. इसके बाद महिला को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. दंपति के पास सुबह कॉल आया था जो रात साढ़े तीन बजे तक जारी रहा.

 ऐसे साइबर ठगों के चंगुल से बचें कारोबारी दंपति

इस दौरान महिला अपने बेटे का भी कॉल अटेंड नहीं की. जिसके बाद परिजनों को कुछ संदेह हुआ. ऐसे में परिजनों ने अपने एक  परिचित पुलिस अधिकारी से पूरे मामले पर चर्चा की. वहीं पुलिस अधिकारी ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को मामले की सूचना दी. रात 1:40 बजे के करीब डीएसपी किरण अहिरवार पुलिस बल के साथ मौक़े पर पहुंची. तब महिला ने गेट खोलने से इनकार कर दिया.

हालांकि पुलिस के काफी प्रयास के बाद महिला गेट खोली. पुलिस ने जब उनका मोबाइल चेक किया तब खुलासा हुआ कि महिला को शातिर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट करके रखा हुआ था. पुलिस की सतर्कता से इस तरह दंपति शिकार होने से बच गए.

आपको भी सावधान होने की जरूरत

ठगों के जाल में फंसे जसपाल आहूजा और उनकी पत्नी अमरजीत कौर ग्वालियर के पॉश इलाका हरिशंकर पुरम में रहते हैं. उनके पास सुबह 9 बजे कॉल आया. कॉल पर उन्हें बताया गया कि साइबर क्राइमऔर सीबीआई से बोल रहे हैं. उनका मोबाइल नम्बर साइबर क्राइम और ठगी में उपयोग हुआ है. उनसे सीबीआई से गिरफ्तारी का ऑर्डर होने की बात कहते हुए हमदर्दी दिखाई और कहा कि अगर वो किसी से संपर्क नहीं करेंगे तो वो उनकी मदद करेंगे.

बेटे को भी नहीं आने दिया घर के अंदर

ठग ने ये भी कहकर डरा दिया कि अगर वे किसी को बताएंगे या संपर्क करेंगे तो वह भी अधिकारी बन जाएगा. इससे वे इतनी डर गए कि उसी अपार्टमेंट में रहने वाले भाई से भी बात नहीं की. भाई का बेटा सुबह दस बजे भोपाल जाने के लिए कहने घर गया भी तो उसे बाहर से ही लौटा दिया. इसके अलावा कोचिंग गए अपने बेटे के घर आने के बजाय उसे भी बाहर से ही बुआ के घर भेज दिया. इस बीच कनाडा में रहने वाले बेटे का कॉल आया, लेकिन उन्होंने उसका भी कॉल नहीं रिसीव नहीं किया.

बेटे ने मां-बाप को ऐसे बचाया

हालांकि तभी बुआ के घर गए हुए बेटे ने अपने भाई और बुआ को बताया कि जिस समय मां अमरजीत कौर उसे बुआ के घर जाने की बोल रही थी तब पिता जसपाल फोन पर किसी से बात करते हुए गिड़गिड़ाते हुए सॉरी सर... सॉरी सर गलती हो गई बोल रहे थे. जिसके बाद यह बात कनाडा में रह रहे बेटे ने अपने एक दोस्त को बताई. उसने तत्काल इंदौर में पदस्थ परिचित एएसपी मनजीत सिंह को बताई. एएसपी समझ गए ये डिजटल अरेस्ट का मामला है.

मनजीत ने खुद जसपाल को कॉल किया. उनसे बात की कि वे ठगों के जाल में फंसे है कॉल काट दें. उस पर जसपाल  ने एएसपी को कहा नहीं वे लोग तो हमारी मदद कर रहे हैं. इसके बाद एएसपी ने ग्वालियर कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी. कंट्रोल ने फटाफट झांसी रोड एफआरबी और एएसआई विभूति नारायण को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची. 

पुलिस 30 मिनट तक बेल बजाती रही, लेकिन जसपाल ने गेट नहीं खोला. रात 1:40 बजे जैसे तैसे उन्होंने गेट खोला. हालांकि तब दंपति बहुत डरे हुए थे.

बता दें कि ठगों ने व्हाट्सएप कॉल बन्द न करने की बात कहते हुए धमकी दी थी कि सुबह तक पैसे जमा नहीं किए तो दोनों को अरेस्ट कर लिया जाएगा. डीएसपी किरण अहिरवार ने लगभग डेढ़ घंटे तक काउंसलिंग करने के बाद रात लगभग 3:30 बजे डिजटल अरेस्ट से मुक्त कराया. 

डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निरंजन शर्मा ने लोगों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई चीज नहीं होती है. अगर आपको व्हाट्सएप कॉलिंग या चैटिंग के माध्यम से कोई ईडी सीबीआई का डर दिखाता है या धमकाता है तो आप बिल्कुल डरें नहीं और हो सके तो अपने परिजनों और पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराएं. ऐसे में आप इस तरह की धोखाधड़ी से बच सकते हैं.

'डिजिटल अरेस्ट' में चली जाएगी सारी जमा पूंजी

लोगों के बीच डिजिटल अरेस्ट शब्द इस समय काफी चर्चा का विषय है. यह साइबर फ्रॉड (Cyber ​​fraud) का एक तरीका है. इसमें ठग पुलिस या सरकारी अधिकारी बन कॉल करते हैं और फिर वीडियो पर बंधक बनाकर आपका अकाउंट खाली कर देते हैं. इसमें सबसे पहले लोगों के पास एक कॉल या ईमेल आता है. कॉल या ईमेल करने वाला खुद को पुलिस या सरकारी विभाग का अधिकारी बताता है. वो कहता है कि आपके खिलाफ जांच चल रही है और आप वीडियो कॉल से हमसे कनेक्ट करें. फिर वो वीडियो पर कहता है कि आपको अरेस्ट कर लिया गया है. वीडियो में फ्रॉड करने वाला ठग वर्दी में भी हो सकता है. वो पीड़ित को कई घंटों तक धमकाता है. धीरे-धीरे वो आपसे बैंक, यूपीआई, ओटीपी आदि मांगता है और आपकी सारी जमापूंजी हड़प लेता है. बता दें कि ये सबकुछ ऑनलाइन होता है. 

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