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क्या आप अपनी गोद में लैपटॉप रखकर करते हैं काम? तो जान लें इसके गंभीर परिणाम

कोरोना काल के बाद से वर्क फ्रॉम होम ने लोगों के लैपटॉप के साथ काम करने के समय में इजाफा कर दिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्थिति आपके हेल्थ के लिए कितनी खतरनाक है?

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क्या आप अपनी गोद में लैपटॉप रखकर करते हैं काम? तो जान लें इसके गंभीर परिणाम
फाइल फोटो

laptop serious consequences: बदलते परिवेश में जहां आज बड़ी संख्या में लोग अपने इंस्टिट्यूट में काम कंप्यूटर और लैपटॉप (Working with Laptop) पर करते हैं, वहीं कोरोना काल के बाद से वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) ने लोगों के लैपटॉप के साथ काम करने के समय में इजाफा कर दिया है. उस पर भी घरों में प्रोपर वर्किंग टेबल नहीं होने के चलते लोग अपने सोफे और अपने बेड पर बैठकर लैपटॉप को अपनी गोद में रखकर काम (Working with laptop on your lap) करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्थिति आपके हेल्थ के लिए कितनी खतरनाक है?

लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल से आपकी रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर असर पड़ सकता है. इतना ही नहीं लैपटॉप से निकलने वाली हीट हमारी स्किन और अंदर के टिशू को डैमेज कर सकती है. इसे देर तक गोद में रखकर काम करने से पुरुषों में इंफर्टिलिटी (Infertility problems in Men) की समस्या भी हो सकती हैं.

वर्क फ्रॉम होम कल्चर ने बढ़ाई मुसीबत

दरअसल, कोरोना काल के बाद से ही देश-दुनिया में वर्क फ्रॉम होम कल्चर बढ़ा है. इसके चलते ज्यादातर लोग घर में लैपटॉप यूज करने के आदी हो गए हैं और काफी ज़्यादा समय अपने लैपटॉप के साथ ही बिताने लगे हैं. फिर चाहे सीरीज देखने से लेकर कुछ इम्पोर्टेन्ट काम करने की बात क्यों न हो, और देखा जाये तो यह सब कोरोना के बाद से ही ज़्यादा देखने को मिल रहा है. यह अगर एक लिमिट में हो तब तक सबके लिए सही है, लेकिन जब इसका यूज़ बहुत ज्यादा होता है तब सिचुएशन बिगड़ने लगती है और आपकी सेहत पर सीधा असर करती है.

पुरुषों को है ज्यादा खतरा

ऐसी स्थिति में, एक बात साफ कर दें कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों के लिए यह ज्यादा खतरनाक है. इसका कारण पुरुषों की शरीर की बनावट है. महिलाओं के शरीर में यूटरस शरीर के अंदर होता है जबकि पुरुषों में टेस्टिकल शरीर के बाहरी हिस्से में होता है. जिससे हीट रेडिएशन ज्यादा करीब रहती है. यही कारण है कि पुरुषों को लैपटॉप इस्तेमाल करते समय खास ख्याल रखना चाहिए. इस तरह की समस्याएं तेजी से मेट्रो शहरों में नजर भी आ रही हैं. 

वाईफाई से फैलता है रेडिएशन

असल में लैपटॉप की हॉर्डड्राइव से लो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन (frequency radiation) होता है. वहीं ब्लूटूथ कनेक्शन (bluetooth connection) से भी रेडिएशन बाहर होता है. इसके असर से आपको नींद न आना, सिर में तेज दर्द जैसी परेशानी हो सकती है. इतना ही नहीं लैपटॉप के इस्तेमाल के वक्त पैरों को चिपकाकर बैठने से लैपटॉप की रेडिएशन (laptop radiation) सीधे शरीर पर पड़ती है. डिवाइस से निकलने वाली हीट आपको बीमार कर सकती है.

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