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Chhattisgarh Tourism: शिशुपाल पर्वत युवाओं का एडवेंचर हब; ट्रैकिंग से लेकर रोजगार के नए अवसर तक सब है यहां

Shishupal Parvat Adventure Tourism: कहा जाता है कि अंग्रेजों ने जब शिशुपाल को घेर लिया था, तब उन्होंने वीरता का परिचय देते हुए अपने घोड़े समेत पर्वत से छलांग लगा दी. इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम शिशुपाल पर्वत पड़ा और यहां स्थित जलप्रपात को भी शिशुपाल जलप्रपात कहा जाने लगा.

Chhattisgarh Tourism: शिशुपाल पर्वत युवाओं का एडवेंचर हब; ट्रैकिंग से लेकर रोजगार के नए अवसर तक सब है यहां
Chhattisgarh Tourism: शिशुपाल पर्वत युवाओं का एडवेंचर हब; ट्रैकिंग से लेकर रोजगार के नए अवसर तक सब है यहां

Chhattisgarh Tourism Shishupal Parvat: महासमुंद जिले (Mahasamund District) के सरायपाली क्षेत्र में स्थित शिशुपाल पर्वत (Shishupal Parvat) इन दिनों प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर (Adventure Tourism) के शौकीनों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. समुद्र तल से 900 फीट की ऊंचाई पर बसे इस पर्वत तक पहुंचने का मार्ग रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता से भरा हुआ है. रायपुर (Raipur) से लगभग 157 किलोमीटर और सरायपाली से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थल पर्यटकों को प्रकृति के करीब ले जाने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है.

Shishupal Parvat: शिशुपाल पर्वत के झरने

Shishupal Parvat: शिशुपाल पर्वत के झरने

क्यों खास है ये पर्यटन स्थल?

घने जंगलों, चट्टानों और प्राकृतिक पगडंडियों से होकर जाने वाला ट्रैकिंग मार्ग साहसिक गतिविधियों के प्रेमियों को आकर्षित करता है. पर्वत के शीर्ष पर एक विशाल खुला मैदान है, जहां से वर्षा ऋतु के दौरान 1100 फीट की ऊंचाई से गिरते जलप्रपात का दृश्य मन मोह लेता है. इस अद्भुत जलप्रपात और आसपास की हरियाली के कारण यहां आने वाले सैलानी घंटों तक ठहरकर दृश्यावलोकन करते हैं. पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए प्रशासन ने इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयास भी तेज कर दिए हैं.

प्राकृतिक शांति का अनोखा अनुभव

शिशुपाल पर्वत की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनछुई प्राकृतिक सुंदरता और शांति है. घने जंगलों के बीच स्थित यह पर्वत शहर के शोर-शराबे से दूर मानसिक सुकून का अनुभव कराता है. फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है. यहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य विशेष रूप से आकर्षक होता है, जिसे कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय युवक पहुंचते हैं.

पर्वत की ऊंचाई पर बहने वाली ठंडी हवा, झरनों की आवाज़ और आसपास फैली हरियाली मिलकर एक मनोहारी वातावरण तैयार करती है. प्रकृति के साथ समय बिताने और तनाव से राहत पाने के इच्छुक पर्यटकों के लिए यह एक आदर्श स्थान बन चुका है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में यहां पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिला है.

Shishupal Parvat: शिशुपाल पर्वत का नजारा

Shishupal Parvat: शिशुपाल पर्वत का नजारा

इतिहास और लोककथाओं से जुड़ा शिशुपाल पर्वत

प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ शिशुपाल पर्वत अपने ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के लिए भी जाना जाता है. स्थानीय रूप से ‘बड़ा डोंगर' के नाम से प्रसिद्ध इस पर्वत का संबंध राजा शिशुपाल से जुड़ी किंवदंतियों से है. लोककथाओं के अनुसार इस पर्वत पर कभी राजा शिशुपाल का महल हुआ करता था. पर्वत पर मौजूद जर्जर किले के अवशेष, प्राचीन मंदिर और तालाब आज भी उसकी ऐतिहासिक विरासत को जीवित रखते हैं.

कहा जाता है कि अंग्रेजों ने जब शिशुपाल को घेर लिया था, तब उन्होंने वीरता का परिचय देते हुए अपने घोड़े समेत पर्वत से छलांग लगा दी. इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम शिशुपाल पर्वत पड़ा और यहां स्थित जलप्रपात को भी शिशुपाल जलप्रपात कहा जाने लगा.

पर्वत के इतिहास और लोककथाओं ने इसे और अधिक आकर्षक पर्यटन स्थल बना दिया है, जहां पर्यटक रोमांच के साथ-साथ इतिहास की अनुभूति भी करते हैं.

धार्मिक आस्था और रोजगार के अवसर

शिशुपाल पर्वत केवल प्राकृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था से भी गहराई से जुड़ा है. मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. पर्वत शिखर पर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ ही आसपास के क्षेत्र में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जो स्थानीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है. इन धार्मिक आयोजनों के कारण स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और छोटे व्यापार के अवसर भी बढ़े हैं. मेले में हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और खाद्य सामग्री के स्टॉल बड़ी संख्या में लगाए जाते हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों को आर्थिक लाभ मिलता है. पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों के संयोजन ने शिशुपाल पर्वत को एक संपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया है.

पर्यटन विकास की बढ़ती संभावनाएं

सरायपाली क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा शिशुपाल पर्वत को पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित करने की पहल की जा रही है. आसपास के गांवों में बांस से बनी हस्तशिल्प वस्तुएं स्थानीय लोगों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती हैं. इसके साथ ही प्रशासन इसे बड़े पर्यटन सर्किट से जोड़ने की योजना पर भी काम कर रहा है. शिशुपाल पर्वत से चंद्रहासिनी देवी मंदिर, गोर्मदा अभयारण्य, सिंघोड़ा मंदिर, देवदरहा जलप्रपात और नरसिंहनाथ जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ा जा सकता है. इससे क्षेत्र में पर्यटन का दायरा बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी. प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास, रोमांच और सांस्कृतिक गतिविधियों का यह विशिष्ट संगम शिशुपाल पर्वत को तेजी से छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में बदल रहा है.

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