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This Article is From Sep 02, 2024

महाकाल की नगरी में निकली 'राजसी' सवारी, भक्ति में ऐसे डूबे दिखे ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके बेटे

Ujjain Mahakal Temple: उज्जैन के बाबा महाकाल की नगरी सोमवार को बोल बम के जयकारों से गूंज उठी. 6 मुखारबिंद, 70 भजन मंडली, 5 बैंड, और लोक कलाकार शामिल होकर इस क्षण को यादगार बनाया. इस दौरान भगवान चंद्रमोलेश्वर की पालकी पर सबकी नजरें टिकी रह गईं.

महाकाल की नगरी में निकली 'राजसी' सवारी, भक्ति में ऐसे डूबे दिखे ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके बेटे
Baba Mahakal की निकली शाही सवारी, एमपी के इस राजवंश ने की पूजा,पालकी पर टिकी रह गईं नजरें..

Baba Mahakal Ujjain News in Hindi: उज्जैन में भादौ मास के दूसरे सोमवार को शाम 4 बजे बाबा महाकाल की राजसी सवारी मंदिर परिसर से निकली. सवारी में बाबा के छह स्वरूप में दर्शन होते ही लाखों श्रद्धालु ने जय महाकाल और हर-हर महादेव के जयकारों से आसमान गूंजा दिया. सवारी में 70 भजन मंडली, 5 बैंड, और लोक कलाकारो की प्रस्तुतियों ने भी समा बांध दिया. सवारी करीब सात किलोमीटर क्षेत्र में नगर भ्रमण कर रात 10 बजे मंदिर पहुंचेगी.

यहां भादौ में दो सवारी निकलती है

निकली बाबा महाकाल की निकली राजसी सवारी, जयकारों से गूंजा आसमान.

निकली बाबा महाकाल की निकली राजसी सवारी, जयकारों से गूंजा आसमान.

बता दें, श्रावण मास में विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की पांच सवारी और भादौ में दो सवारी निकलती है. अंतिम सवारी को राजसी कहते हैं, जो कि परंपरा के चलते सोमवार शाम चार बजे निकली. सवारी में पालकी में विराजित चंद्रमोलेशवर सहित सभी छह मुखारबिंद की सभामंडप में कलेक्टर नीरज सिंह द्वारा पूजन अर्चना के बाद शाही सवारी मंदिर से निकली. द्वार पर सशस्त्र बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर देने के बाद सवारी पूर्व निर्धारित मार्गों से होती हुई रामघाट पहुंची. शिप्रा नदी के जल से पूजन के बाद सवारी पुनः रवाना हो गई.

शाही सवारी अब राजसी बनी

बता दें बाबा महाकाल की अंतिम सवारी को अब तक शाही सवारी कहा जाता था, लेकिन सोमवार को प्रदेश सरकार ने इसका नाम राजसी सवारी घोषित कर दिया. राजसी सवारी तय समय पर सवारी मंदिर में पहुंचाने और श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन व सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी की है.

ऐसा रहा सवारी का स्वरूप

राजसी सवारी में आगे  तोपची, (पांच कड़बीन) फिर चांदी ध्वज, घुड़सवार, विशेष सशस्त्र बल,स्काउट, गाइड सदस्य,कांग्रेस सेवा दल,सेवा समिति बैंड के बाद 70 भजन मंडलियां,साधु-संत, पुलिस बैंड, नगर सेना सलामी गार्ड, पुजारी-पुरोहित गण थे. फिर भगवान चंद्रमोलेश्वर की प्रमुख पालकी,गरुड़ पर शिव तांडव,नंदी रथ पर उमा-महेश,होलकर स्टेट का मुखारबिंद,घटाटोप मुखौटा, रथ पर सप्तधान मुखारबिंद, हाथी पर मनमहेश स्वरुप विभिन्न बैंड के साथ दर्शन देते हुए निकले.

पूरे सवारी मार्ग को सजाया

राजसी सवारी होने से रविवार से ही भक्तों द्वारा सवारी मार्ग को सजाया जाने लगा था. सवारी के स्वागत के लिए 100 से अधिक स्टेज बनाए गए. वहीं, सोमवार को सोमवती अमावस्या का संयोग होने से दर्शनार्थियों की संख्या में भी इजाफा हुआ. वहीं, मध्यप्रदेश के लालपुर, डिंडोरी के आदिवासी धूलिया जनजाति गुदुम बाजा लोक नर्तक दल दिनेश कुमार भार्वे के नेतृत्व में पालकी के आगे भजन मंडलियों के साथ अपनी प्रस्तुति देते हुए चले, जिससे राजाधिराज की सवारी का उत्साह दोगुना हो गया.

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केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने की पूजा

शाही सवारी में सिंधिया राजवंश के सदस्य भगवान महाकाल का पूजन करने आते हैं.

शाही सवारी में सिंधिया राजवंश के सदस्य भगवान महाकाल का पूजन करने आते हैं.

परंपरानुसार शाही सवारी में सिंधिया राजवंश के सदस्य भगवान महाकाल का पूजन करने आते हैं. इसलिए केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सोमवार शाम 5.10 बजे रामघाट पहुंचकर भगवान का पूजन अर्चन करेंगे. उनके साथ  जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल भी रहेंगे.प्रभारी मंत्री टेटवाल मंगलवार सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने के बाद भोपाल रवाना होंगे. 

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