ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की पुष्टि करते हुए उन्हें "शहीद" घोषित किया है. यह बयान ट्रंप द्वारा खामेनेई की हत्या की घोषणा के कुछ घंटों बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है कि सर्वोच्च नेता के उत्तराधिकारी के रूप में किसे नियुक्त किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की ओर से किए जाने वाले हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक आवश्यक होगा.
नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया तेज
ईरानी सरकारी मीडिया ने देश में 40 दिनों के शोक की घोषणा की है और बताया है कि खामेनेई की बेटी, दामाद और पोते भी अमेरिका-इजराइल हमलों में मारे गए हैं. खामेनेई की हत्या के बाद ईरानी संविधान के तहत एक प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसके तहत ईरानी राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और संरक्षक परिषद के एक धर्मगुरु देश का नेतृत्व करने के लिए एक परिषद का गठन करेंगे.
40 दिन के शोक की घोषणा
ईरान में लगातार बमबारी के बीच खामेनेई के निधन पर शोक मनाने का ऐलान किया गया है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर के बाद ईरानी राजधानी तेहरान की सड़कों पर लोग उमड़ पड़े हैं. इस बीच 40 दिनों के शोक की घोषणा के बाद आगे चलकर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होने की संभावना है. ऐसी संभावना है कि संभवतः देशभर में जारी बमबारी के बीच होंगी. गौरतलब है की खबरों के मुताबिक कुछ घंटे पहले भी राजधानी तेहरान में एक और जोरदार विस्फोट की आवाज सुनाई दे दी.
आईआरजीसी ने बताया महान नेता
ईरानी क्रांति रक्षक कोर (आईआरजीसी) ने 'महान नेता' के निधन पर शोक व्यक्त किया और बदला लेने का संकल्प व्यक्त किया है. फ़ार्स समाचार एजेंसी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ईरानी क्रांति रक्षक कोर ने खामेनेई के निधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमने एक महान नेता को खो दिया है और हम उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हैं." बयान में आगे कहा गया है कि खामेनेई की "सबसे क्रूर आतंकवादियों और मानवता के जल्लादों के हाथों शहादत इस महान नेता की वैधता और उनकी सच्ची सेवाओं की स्वीकृति का प्रतीक है." बयान में यह भी कहा गया है कि "ईरानी राष्ट्र का बदला लेने वाला हाथ... उन्हें नहीं छोड़ेगा." बयान में कहा गया है कि आईआरजीसी "घरेलू और विदेशी साजिशों का डटकर सामना करेगा."
ऐसा रहा खामनेई का राजनीतिक सफर
एक दशक पहले इस्लामी क्रांति का नेतृत्व करने वाले करिश्माई नेता अयतुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद, खामनेई ने 1989 में इस्लामी गणराज्य की बागडोर संभाली थी. हालांकि, खुमैनी उस क्रांति के पीछे वैचारिक शक्ति थे, जिसने पहलवी राजशाही के शासन का अंत किया, लेकिन खामेनेई ने ही ईरान के सैन्य और अर्धसैनिक तंत्र को आकार दिया, जो न केवल ईरान को उसके शत्रुओं से बचाता है, बल्कि उसे उसकी सीमाओं से परे भी प्रभाव प्रदान करता है.
सर्वोच्च नेता बनने से पहले, उन्होंने 1980 के दशक में इराक के साथ एक खूनी युद्ध के दौरान राष्ट्रपति के रूप में ईरान का नेतृत्व किया था. विश्लेषकों का कहना है कि इस भीषण संघर्ष और पश्चिमी देशों द्वारा इराकी नेता सद्दाम हुसैन का समर्थन करने के कारण कई ईरानियों में अलगाव की भावना ने खामनेई के पश्चिम और विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति अविश्वास को और गहरा कर दिया. यह भावना उनके दशकों लंबे शासन की नींव बनी और इस विचार को पुख्ता किया कि ईरान को बाहरी और आंतरिक खतरों से निरंतर रक्षात्मक स्थिति में रहना चाहिए.