Reservation in promotion for disabled government employees: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया है कि दिव्यांग शासकीय कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है? यह मामला तब सामने आया जब दिव्यांग अधिकारी कर्मचारी संघ ने इस विषय पर याचिका दायर की. संघ की ओर से अधिवक्ता समदर्शी तिवारी ने अदालत के समक्ष दलील पेश की कि 2016 में लागू हुए दिव्यांग अधिकार अधिनियम की धारा 36 के तहत दिव्यांगों को न केवल सीधी भर्ती में, बल्कि पदोन्नति में भी आरक्षण का अधिकार है.
SC ने राज्यों में उचित नियम बनाने के दिए निर्देश
इस याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई के लिए 4 नवंबर की तारीख निर्धारित की है. याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में दिव्यांगों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि वे केंद्र द्वारा बनाए गए दिव्यांग अधिकार अधिनियम के तहत अपने राज्यों में उचित नियम बनाए.
2017 में दिव्यांगों के लिए आरक्षण से संबंधित बनाए गए थे नियम
बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने 2017 में दिव्यांगों के लिए आरक्षण से संबंधित नियम बनाए, लेकिन यह नियम केवल सीधी भर्ती तक सीमित थे. इन नियमों में पदोन्नति में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं रखा गया जो कि 2016 के अधिनियम के उद्देश्यों के विपरीत है. इसी कारण से दिव्यांग अधिकारी कर्मचारी संघ ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.
4 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
अधिवक्ता तिवारी ने तर्क दिया कि पदोन्नति में आरक्षण न देना, दिव्यांग कर्मचारियों के साथ भेदभाव है और यह उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी, जब राज्य सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करेगी.
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