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दूषित पानी मामला: UP, MP और राजस्थान की सरकारों से NGT ने मांगा जवाब, CPCB को भी भेजा नोटिस

एनजीटी ने तीनों राज्यों की सरकारों, उनके प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से जवाब मांगा है. यह कार्रवाई मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर की गई है.

दूषित पानी मामला: UP, MP और राजस्थान की सरकारों से NGT ने मांगा जवाब, CPCB को भी भेजा नोटिस

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी, NGT) ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया है. एनजीटी ने तीनों राज्यों की सरकारों से जवाब तलब किया है. एनजीटी ने यह कार्रवाई मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर की है, जिनमें जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे उजागर हुए हैं.

इन रिपोर्टों में बताया गया है कि पुरानी, जर्जर और दशकों पुरानी पाइपलाइन व्यवस्था के कारण कई स्थानों पर सीवेज का पानी पेयजल पाइपलाइनों में मिल रहा है. राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर, अजमेर और बोरा जैसे शहर इससे प्रभावित बताए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित तस्वीरों में पेयजल की पाइपलाइनें खुले नालों और सीवेज लाइनों से होकर गुजरती हुई दिखाई गई हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती हैं.

यूपी नोएडा में भी सीवेज का पानी

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा (सेक्टर डेल्टा-1) में सीवेज मिले पानी के सेवन से बच्चों सहित कई लोग बीमार पड़ गए, जिनमें उल्टी और दस्त जैसे लक्षण देखे गए. हालांकि, अधिकारियों ने लीकेज की मरम्मत कर प्रभावित लोगों को दवाइयां दीं, फिर भी स्थानीय निवासियों ने इंदौर जैसी जल-प्रदूषण त्रासदी की आशंका जताई है.

भोपाल में भी पानी मिला ई-कोलाई बैक्टीरिया

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भोपाल के कुछ इलाकों में पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया, जिसका कारण सीवेज का ट्यूबवेल में रिसाव बताया गया है. NGT ने माना कि ये मुद्दे गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़े हैं. प्रथम दृष्टया पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के उल्लंघन को दर्शाते हैं.

एनजीटी ने इनसे मांगा जवाब

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को क्षेत्रीय कार्यालय में तलब किया है. साथ ही राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) को भी समन भेजा है.

इसके साथ ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से भी जवाब मांगा है. यह मामला पर्यावरणीय कानूनों के पालन, जिम्मेदारी तय करने तथा नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए विचाराधीन रहेगा.

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