विज्ञापन

सरकार ने मानी इंदौर में दूषित पानी से हुई 20 मौतें, CM ने मुआवजा बढ़ाया, कहा- सियासत से ऊपर का है मामला

Indore Bhagirathpura Deaths: इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 20 मौतों की सरकार ने विधानसभा में पुष्टि की है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये मुआवजे का एलान करते हुए कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है.

सरकार ने मानी इंदौर में दूषित पानी से हुई 20 मौतें, CM ने मुआवजा बढ़ाया, कहा- सियासत से ऊपर का है मामला

Bhagirathpura Contaminated Water Deaths: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा गरमाया रहा. प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस विषय पर सरकार को घेरा, जिसके जवाब में सरकार ने लिखित में स्वीकार किया कि क्षेत्र में दूषित पानी की बीमारी (आउटब्रेक) के कारण अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि, चर्चा के दौरान सदन में मौतों के आंकड़ों और मुआवजे की राशि को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.

विधानसभा में गूंजा मौतों का मामला

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या विभाग को भागीरथपुरा में फैल रही बीमारी की समय पर जानकारी थी. इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि 29 दिसंबर 2025 को पहली बार इस बीमारी की सूचना मिली थी. सरकार ने आधिकारिक तौर पर माना कि अब तक कॉलरा (हैजा) और ई.कोलाई संक्रमण के कारण 20 लोगों की मौत हुई है. इस दौरान कुल 459 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

मुआवजे पर मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणा

सदन में चर्चा के दौरान जब नेता प्रतिपक्ष ने मौतों का आंकड़ा ज्यादा होने और मुआवजा कम मिलने की बात कही, तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हस्तक्षेप किया. मुख्यमंत्री ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि यह विषय राजनीति से ऊपर है और इसमें पक्ष-विपक्ष नहीं होना चाहिए. उन्होंने एलान किया कि सरकार अब मृतकों के परिजनों को 4 लाख के बजाय 5 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करेगी. मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले आईएएस अधिकारी तक को सस्पेंड कर सख्त कार्रवाई की गई है.

मंत्री के इस्तीफे की मांग और तीखी नोकझोंक

विपक्ष ने इस पूरी घटना के लिए नगर निगम और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय करने की मांग की. उमंग सिंघार ने सदन में पूछा कि क्या इस लापरवाही के लिए विभागीय मंत्री और महापौर जिम्मेदार नहीं हैं? उन्होंने नैतिक आधार पर मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की. हालांकि, सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल प्रभाव से उचित कदम उठाए गए और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया है.

जांच रिपोर्ट में हुआ संक्रमण का खुलासा

इस पूरे मामले की वैज्ञानिक जांच के लिए कोलकाता और इंदौर की लैब में मरीजों के स्टूल और पानी के सैंपल भेजे गए थे. जांच रिपोर्ट में हैजा और ई.कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है. सरकार ने सदन को यह भी जानकारी दी कि फिलहाल यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका के रूप में विचाराधीन है. इन सबके बीच दिलचस्प ये है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद सरकार ने खुद बताया कि इस संबंध में इंदौर नगर निगम से कोई विस्तृत रिपोर्ट नहीं मांगी गई है.
ये भी पढ़ें: MP Vidhan Sabha: थाली लेकर पहुंचे विपक्षी नेता; बजट सत्र के चौथे दिन कांग्रेस ने इन मुद्दों पर सरकार को घेरा

MPCG.NDTV.in पर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार,लाइफ़स्टाइल टिप्स हों,या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें,सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Close