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This Article is From Feb 18, 2026

भोजशाला विवाद में बड़ा मोड़: अब मुख्य न्यायाधीश की पीठ करेगी सुनवाई, इंदौर से जबलपुर शिफ्ट हुआ मामला

Bhojshala- Kamal Maula Masjid Vivad: याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता विनय जोशी ने बताया कि इंदौर पीठ में लंबित चार रिट याचिकाओं को जबलपुर स्थित प्रधान पीठ भेज दिया गया है. चूंकि इस मामले में एक रिट अपील पहले से ही जबलपुर में लंबित है, इसलिए सभी संबंधित मामलों की संयुक्त सुनवाई अब वहीं होगी.

भोजशाला विवाद में बड़ा मोड़: अब मुख्य न्यायाधीश की पीठ करेगी सुनवाई, इंदौर से जबलपुर शिफ्ट हुआ मामला
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Bhoajshala Vicad: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar) स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े बहुचर्चित विवाद ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है. अब इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष होगी.

याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता विनय जोशी ने बताया कि इंदौर पीठ में लंबित चार रिट याचिकाओं को जबलपुर स्थित प्रधान पीठ भेज दिया गया है. चूंकि इस मामले में एक रिट अपील पहले से ही जबलपुर में लंबित है, इसलिए सभी संबंधित मामलों की संयुक्त सुनवाई अब वहीं होगी.

आज सुनवाई के लिए है सूचीबद्ध

बताया गया है कि जबलपुर स्थित प्रधान पीठ में इन पांचों मुकदमों को 18 फरवरी यानी बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है. इससे पहले इंदौर पीठ में इस मामले पर बहस होनी थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण सुनवाई टल गई थी. अब सभी की निगाहें आज की सुनवाई पर टिकी हैं, जब मुख्य न्यायाधीश की पीठ इस संवेदनशील मामले पर विस्तृत विचार करेगी.

 एएसआई सर्वे पर आमने सामने दोनों पक्ष

भोजशाला विवाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस जारी है. हिंदू पक्ष इस वैज्ञानिक सर्वेक्षण को अपने पक्ष में मानते हुए इसे निर्णायक सबूत बता रहा है. उनका कहना है कि 15 जुलाई 2024 को प्रस्तुत रिपोर्ट से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. वहीं, मुस्लिम पक्ष ने सर्वे की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जांच के दौरान अनियमितताएं हुई हैं. उनका दावा है कि कुछ पत्थर और सामग्री रात के समय लाकर रखी गईं और उन्हें सर्वे का हिस्सा बनाया गया. मुस्लिम पक्ष का यह भी कहना है कि उनकी पुरानी आपत्तियों पर पहले सुनवाई होनी चाहिए.

 क्या है पूरा विवाद?

धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है. हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है. वर्तमान व्यवस्था के तहत मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई है. हाल ही में हुए वैज्ञानिक सर्वेक्षण का उद्देश्य इस ढांचे की मूल प्रकृति का निर्धारण करना था. अब यही रिपोर्ट न्यायालय में बहस का मुख्य आधार बनी हुई है.

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भोजशाला विवाद केवल कानूनी मसला नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी एक अहम विषय रहा है. अदालत के इस ताजा निर्णय के बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया है. अब देखना होगा कि मुख्य न्यायाधीश की पीठ इस ऐतिहासिक और विवादित स्थल से जुड़े मामलों पर क्या दिशा तय करती है. हालांकि, आज की सुनवाई इस लंबे विवाद में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है.

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