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This Article is From Feb 16, 2026

Dhar Bhojshala Case: आज से इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला की सुनवाई, खोली जाएगी ASI की रिपोर्ट, क्या है हिंदू-मुस्लिम विवाद?

Dhar Bhojshala Case Hearing: एएसआई के आधिकारिक दस्तावेजों में धार की “भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर” 11वीं सदी का संरक्षित स्मारक लंबे समय से धार्मिक दावों के केंद्र में रहा है. हिंदू और मुस्लिम पक्ष इसे लेकर अगल-अलग दावे करते हैं.

Dhar Bhojshala Case: आज से इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला की सुनवाई, खोली जाएगी ASI की रिपोर्ट, क्या है हिंदू-मुस्लिम विवाद?

Bhojshala Hearing MP High Court: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर एक अहम सुनवाई सोमवार 16 फरवरी 2026 से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में शुरू होगी. पहले ही दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की 98 दिनों तक चली वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट खोली जाएगी. यह पहली बार होगा जब इस रिपोर्ट के निष्कर्ष औपचारिक रूप से अदालत में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के सामने रखे जाएंगे. यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही है. न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी, जो सूची में 62वें क्रम पर है.

दरअसल, एएसआई के आधिकारिक दस्तावेजों में धार की “भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर” 11वीं सदी का संरक्षित स्मारक लंबे समय से धार्मिक दावों के केंद्र में रहा है. हिंदू पक्ष भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर मानता है, जिसे परमार वंश के राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा के एक भव्य केंद्र के रूप में स्थापित किया था. ऐतिहासिक विवरणों में इसे एक शैक्षणिक और आध्यात्मिक केंद्र बताया गया है, जिसमें नक्काशीदार स्तंभ, संस्कृत और प्राकृत में अभिलेख तथा प्राचीन विद्वानों के उल्लेख मिलते हैं. 

मुस्लिम पक्ष मानता है मस्जिद 

वहीं, मुस्लिम समुदाय इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है और सदियों से चली आ रही नमाज़ की परंपरा का हवाला देता है. ऐतिहासिक अभिलेखों में मध्यकाल में संरचनात्मक बदलावों का उल्लेख है और परिसर के एक हिस्से में इस्लामी स्थापत्य शैली के अनुरूप नमाज़ स्थल दिखाई देते हैं. 

कई बार तनाव की स्थिति बनी 

पिछले दशकों में विशेषकर वसंत पंचमी और जुमे की नमाज़ के एक साथ पड़ने पर यहां तनाव की स्थिति बनी है. प्रशासन ने दोनों समुदायों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है, लेकिन मामला अदालतों में जारी रहा है.

महत्वपूर्ण साबित हो सकती है सुनवाई 

एएसआई का वैज्ञानिक सर्वे स्थल की स्थापत्य परतों, अभिलेखों और संरचनात्मक साक्ष्यों की जांच पर आधारित है. इतिहास, आस्था और कानून के संगम पर खड़ी यह सुनवाई भोजशाला विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है. 

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