
Madhya Pradesh vidhan sabha chunav 2023: मध्य प्रदेश में सरकार चुनने के लिए होने वाले विधानसभा चुनाव (MP Election 2023) की वोटिंग 17 नवंबर को पूरी हो चुकी है. प्रदेश में इस बार विधानसभा चुनाव में 76.22 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है. इतना ही नहीं इस बार सिवनी में मतदान का नया कीर्तिमान बनाते हुए जागरूक मतदाताओं ने चुनावी महापर्व में बढ़चढ़ कर अपनी भागीदारी निभाई. महिला-पुरूषाें के साथ बुजुर्गो, दिव्यांगों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला. बता दें कि इस बार मध्य प्रदेश के सिवनी जिला में सबसे अधिक 85.68 प्रतिशत मतदान हुआ.
मप्र विधानसभा चुनाव में अबतक का सर्वाधिक मतदान
शुक्रवार को सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक ही चरण में मतदान हुआ. साल 1956 में मध्य प्रदेश की स्थापना के बाद से प्रदेश के इतिहास में इस बार का मतदान प्रतिशत सबसे अधिक है. इस बार 2018 के विधानसभा चुनावों के 75.63 प्रतिशत से भी 0.59 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है.
नक्सल प्रभावित बालाघाट में 85.23 फीसदी मतदान
छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के साथ सीमा साझा करने वाले पश्चिमी क्षेत्र में नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में 85.23 प्रतिशत के साथ दूसरा सबसे बड़ा मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया, जो दर्शाता है कि गोलियों पर मतपत्रों की जीत हुई, क्योंकि माओवादियों ने लोगों को मतदान करने से हतोत्साहित किया और चुनाव प्रक्रिया में बाधाएं डालीं.
कांग्रेस एक बार जीतीं विधानसभा चुनाव
साल 2003 के बाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन बार विधानसभा चुनाव जीता, जबकि कांग्रेस केवल एक बार ही विजयी हो सकी. 2003 के चुनावों में भाजपा को 42.50 प्रतिशत वोट, कांग्रेस को 31.70 प्रतिशत और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अन्य को 10.61 प्रतिशत वोट मिले. उस समय भाजपा ने 173, कांग्रेस ने 38 और बसपा ने 2 सीटें जीती थीं.
इसके बाद के विधानसभा चुनावों (2008) में भाजपा को 38.09 प्रतिशत, कांग्रेस को 32.85 , बसपा और अन्य को 9.08 प्रतिशत वोट मिले. उस समय भाजपा ने 143, कांग्रेस ने 71 और बाकी सीटें बसपा और अन्य ने जीती थीं. वहीं साल 2013 में भाजपा को 45.19 फीसदी, कांग्रेस को 36.79 और बसपा व अन्य को 6.42 फीसदी वोट मिले थे. नतीजे में भाजपा को 165 सीटों पर, कांग्रेस को 58 सीटों पर और बाकी सीटों पर बसपा और अन्य को जीत मिली.
2018 में भाजपा को 41.02 प्रतिशत मिले वोट
जबकि 2018 में भाजपा को 41.02 प्रतिशत वोट, कांग्रेस को 40.89 प्रतिशत और बसपा और अन्य को 10.83 प्रतिशत वोट मिले. कांग्रेस से अधिक वोट शेयर पाने के बाद भी, भाजपा, कांग्रेस के 114 सीटों के मुकाबले केवल 109 सीटें जीत सकी, जबकि बाकी सीटें बसपा, समाजवादी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों के पास चली गईं. पिछली बार कांग्रेस मामूली अंतर से शीर्ष पर रही थी और उसने कमल नाथ के नेतृत्व में बसपा, सपा और निर्दलीयों की मदद से सरकार बनाई थी.
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महज 1 साल 97 दिन में गिर गई थी कांग्रेस की सरकार
हालांकि मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके प्रति करीबी विधायकों के विद्रोह के बाद सरकार गिर गई, जिससे शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की वापसी का रास्ता साफ हो गया. वहीं भाजपा में शामिल होने और उपचुनाव जीतने के बाद सिंधिया के वफादारों को चौहान के मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण विभाग दिए गए और सिंधिया को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया.
3 दिसंबर को होगा प्रत्याशी के बंद किस्मत का फैसला
शुक्रवार को हुए चुनावों में भाजपा के मुख्यमंत्री चौहान और उनके पूर्ववर्ती और राज्य कांग्रेस प्रमुख कमलनाथ सहित 2,533 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में बंद हो गई है. राज्य में कुल 64,626 मतदान केंद्र बनाए गए थे.
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