Pesticides Mixed In Drinking Water: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पेय जल सप्लाई करने वाले फिल्टर प्लांट में नगर पालिका परिषद के एक कर्मचारी द्वारा गलती से कीटनाशक मिला दिया. गनीमत यह रही कि समय रहते इसका पता चल गया अन्यथा इंदौर के भागीरथपुरा इलाके जैसी घटना बैतूल जिले में भी हो सकती थी. बड़ी चूक का पता चलते ही 45 लाख लीटर पीने के पानी को नदी और नाले में बहाना पड़ा.
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दो दिनों पहले नगर में पेयजल की सप्लाई अचानक बंद हो गई
रिपोर्ट के मुताबिक दो दिनों पहले अचानक नगर में पेयजल की सप्लाई करने वाली फिल्टर प्लांट से पानी की आपूर्ति अचानक बंद हो गई. वजह सामने आई तो लोगों को हाथ-पांव फूल गए. पेजयल सप्लाई बाधित होने से शहरवासी नल कूप और अन्य साधनों के भरोसे काम चलाने को मजबूर हो गए. पानी का आपूर्ति में शहर में नहीं होने से उत्पन्न जल संकट से आसपास त्राहिमाम मच गया.
आरोपी को पता नहीं था कि कौन सा केमिकल में डालना था
मामले पर कांग्रेसी पार्षद ने बताया कि फिल्टर प्लांट में कीटनाशक मिलाने वाले आरोपी मजदूर को पता नही था कि कितनी मात्रा में कौन सा केमिकल फिल्टर प्लांट में डालना है, क्योंकि फिल्टर प्लांट पर कोई भी ज़िम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं रहता है. उन्होंने कहा कि गनीमत थी कि फिल्टर प्लांट में कीटनाशक का पता समय रहते पता लग गया वरना अनहोनी हो सकती थी.
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45 लाख लीटर हार्मफुल केमिकल वाला पानी नदी में छोड़ा गया
नगर पालिका के जल प्रदाय शाखा के ज़िम्मेदार भी मानते है कि गलती हुई है. फिलहाल, फिल्टर प्लांट के पानी को नदी में वापस छोड़ा जारहा है और गलती करने वाले मजदूर को फिल्टर प्लांट से हटा दिया गया है. सवाल यह उठता है कि हार्मफुल केमिकल को नदी में छोड़े जाने के बाद नदी के जीव जंतु ओर नदी पर आश्रित पक्षियों को होने वाले नुकसान की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
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