Indore Contaminated Water Death: दूषित पेयजल से मंगलवार को इंदौर में हुई दो मौतों को लेकर हुए एक नए खुलासे में दावा किया जा रहा है कि दो वर्षीय मासूम रिया प्रजापति की मौत की वजह दूषित पेयजल नहीं था, बल्कि उसकी मौत की वजह दूसरी बीमारी थी. पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष की मानें तो मासूम लिवर में पस और निमोनिया से जूझ रही थी और सर्जरी के बाद संक्रमण बढ़ने और मिर्गी के दौरे से उसकी मौत हुई.
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भागीरथपुरा इलाके में बेबी सिया की मौत को लेकर आया स्पष्टीकरण
रिपोर्ट के मुताबिक पीडियाट्रिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक लड्डा ने दो वर्षी बेबी सिया प्रजापति पिता सूरज प्रजापति निवास भागीरथपुरा की मौत को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए मंगलवार को बताया कि गत 5 फरवरी को बेबी सिया को अस्पताल में भर्ती किया गया था. उन्होंने बताया कि लिवर में पस और निमोनिया से पीड़ित के लिवर से ऑपरेशन के द्वारा पस निकाला गया, लेकिन इन्फेक्शन बढ़ने और मिर्गी के दौरे के चलते उसकी मौत हो गईं.
हाई कोर्ट में पेश MP सरकार के स्टेटस रिपोर्ट में 26 मौतों का उल्लेख
गौरतलब है आंकड़े कुछ भी हों, लेकिन इंदौर शहर में दूषित पेयजल अब तक 34 लोगों की जान ले चुकी है और यह सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है. शहर में दूषित पानी से मरने वालों लोगों की संख्या को लेकर गुत्थी भी जस की तस है. बीते 27 जनवरी को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से हाई कोर्ट में इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों को लेकर पेश स्टेटस रिपोर्ट में कुल 26 मौतों का उल्लेख किया गया था.
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अब तक दूषित पेयजल से भागीरथपुरा में 34 लोगों की हो चुकी है मौत
उल्लेखनीय है इंदौर के कई इलाकों में पिछले कई हफ्तों से गंदे और दूषित पानी की सप्लाई की शिकायतें आ रही हैं और अब तक इस संक्रमण की वजह से 34 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में बैक्टीरिया के फैलाव के कारण लोगों को गैस्ट्रोएंटेराइटिस और लीवर इन्फेक्शन जैसी बीमारियां हो रही हैं, जबकि प्रशासन पाइपलाइनों की जांच और क्लोरीनेशन का दावा कर रहा है.
हाई कोर्ट ने दूषित पेयजल से मौत की न्यायिक जांच का दिया आदेश
उल्टी-दस्त के प्रकोप में इंदौर में हुई कई लोगों की मौत के मामले में बीते 27 जनवरी को हुई एक सुनवाई में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच का आदेश दिया था. माननीय हाई कोर्ट ने इसके लिए उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश की अगुवाई में एक सदस्यीय जांच आयोग गठन किया है, जो चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी.
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जांच आयोग को 4 हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का दिया था निर्देश
मालूम हो, दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि ‘एक स्वतंत्र और विश्वसनीय प्राधिकरण' द्वारा इस मामले की 'तुरंत न्यायिक जांच' किए जाने की आवश्यकता है. कोर्ट ने न्यायिक आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तारीख से चार हफ्ते के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया था.