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This Article is From Feb 11, 2026

Guna District Hospital: गरीब मासूम के गले में फंसा 5 का सिक्का,  जिला अस्पताल ने भगाया,  बोले-हमारे पास मशीन और डॉक्टर नहीं है !

Guna District Hospital: बच्ची के पिता ऊंधल महावत जोगी ने बताया कि सुबह नेहा ने खेलते समय 5 रुपये का सिक्का निगल लिया, जो उसके गले में फंस गया. बच्ची कुछ भी खा-पी नहीं पा रही थी और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी. जब पिता उसे लेकर सरकारी अस्पताल की नई बिल्डिंग में पहुंचा, तो वहां सोनोग्राफी में सिक्का फंसा हुआ दिखा, लेकिन डॉक्टरों ने संवेदनहीनता दिखाते हुए कह दिया कि यहां न तो मशीनरी है और न ही डॉक्टर, इसे किसी निजी अस्पताल ले जाओ.

Guna District Hospital: गरीब मासूम के गले में फंसा 5 का सिक्का,  जिला अस्पताल ने भगाया,  बोले-हमारे पास मशीन और डॉक्टर नहीं है !
मासूम के गले में फंसा 5 का सिक्का,  जिला अस्पताल ने भगाया, बोले-हमारे पास मशीन और डॉक्टर नहीं!
Vijit rao Mahadik

Guna District Hospital News: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गुना (Guna) जिला अस्पताल की चकाचक नई बिल्डिंग, करोड़ों का साजो-सामान और गोल्डन ऑवर में जीवन बचाने के बड़े-बड़े दावे. ये सब बुधवार को उस समय धरे के धरे रह गए, जब एक 4 साल की मासूम बच्ची की जान पर बन आई. दरअसल, गले में सिक्का अटकने के बाद तड़पती बच्ची को सरकारी अस्पताल ने मशीन और डॉक्टर नहीं होने का बहाना बनाकर बाहर का रास्ता दिखा दिया. यह हृदय विदारक स्थिति तब बदली, जब जिला कलेक्टर ने सीधे हस्तक्षेप किया और रेडक्रॉस के माध्यम से निजी अस्पताल में बच्ची के इलाज की व्यवस्था कराई.

गौरतलब है कि गुना जिला अस्पताल महज दो दिन पहले ही अपनी नई और भव्य बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ. इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से दावा किया गया था कि नई बिल्डिंग में अत्याधुनिक मशीनरी और विशेषज्ञ डॉक्टरों के माध्यम से गंभीर से गंभीर मरीजों को तत्काल इलाज किया जाएगा, लेकिन अयोध्या (यूपी) से आकर यहां तंबू में रहकर चटाई, चूड़ी और कंगन बेचने वाले एक गरीब परिवार की 4 साल की बच्ची नेहा के मामले ने इन दावों की कलई खोल दी.

बच्ची को कुछ भी खाने-पीने और सांस लेने में हो रही थी तकलीफ

बच्ची के पिता ऊंधल महावत जोगी ने बताया कि सुबह नेहा ने खेलते समय 5 रुपये का सिक्का निगल लिया, जो उसके गले में फंस गया. बच्ची कुछ भी खा-पी नहीं पा रही थी और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी. जब पिता उसे लेकर सरकारी अस्पताल की नई बिल्डिंग में पहुंचा, तो वहां सोनोग्राफी में सिक्का फंसा हुआ दिखा, लेकिन डॉक्टरों ने संवेदनहीनता दिखाते हुए कह दिया कि यहां न तो मशीनरी है और न ही डॉक्टर, इसे किसी निजी अस्पताल ले जाओ.

पैसे नहीं होने पर निजी अस्पताल ने इलाज करने से किया मना

सरकारी अस्पताल से दुत्कारे जाने के बाद गरीब पिता बच्ची को लेकर राम हाईटेक नामक निजी अस्पताल पहुंचा. वहां इलाज के लिए 10 हजार रुपए की मांग की गई. हालांकि, गरीबी की मार झेल रहे पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो निजी अस्पताल में इलाज करा सके. इसकी वजह से वह अस्पताल के बाहर बैठकर बेबसी के आंसू बहाने लगा. इसी दौरान रेडक्रॉस के एक सदस्य की नजर उन पर पड़ी, जिन्होंने तत्काल मामले की जानकारी जिला कलेक्टर किशोर कन्याल को दी. कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल निजी अस्पताल प्रबंधन को फोन लगाया और बच्ची का इलाज प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने के निर्देश दिए. साथ ही, उन्होंने रेडक्रॉस के माध्यम से इलाज का पूरा खर्च वहन करने की व्यवस्था की. कलेक्टर के फोन पहुंचते ही जो निजी अस्पताल पहले पैसों के लिए परिवार को बाहर बिठा दिया था, उसने तत्काल बच्ची को अंदर बुलाकर इलाज शुरू कर दिया. वहीं, इसके बाद निजी अस्पताल प्रबंधन ने भी कहा कि जितना होगा हम मदद करेंगे.

...तो निजी अस्पताल भी मदद के लिए हुआ तैयार

राम हाईटेक अस्पताल के प्रबंधक डॉ. वायएस रघुवंशी ने बताया कि बच्ची को भर्ती कर लिया गया है. चूंकि उसने कुछ खा लिया था, इसलिए फिलहाल उसे दवाएं दी जा रही हैं. बुधवार सुबह उसे खाली पेट रखकर एनेस्थीसिया (बेहोशी) के तहत गले से सिक्का निकालने की प्रक्रिया की जाएगी. डॉ. रघुवंशी ने यह भी कहा कि रेडक्रॉस के निर्देशों के अलावा अस्पताल प्रबंधन भी अपनी ओर से आर्थिक मदद करेगा.

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यह घटना गुना जिले के स्वास्थ्य महकमे के लिए एक बड़ा तमाचा है. इस मामले के सामने आने के बाद सवाल यह उठता है कि यदि करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई नई बिल्डिंग में एक मासूम के गले से सिक्का निकालने जैसी सामान्य सुविधा भी नहीं है, तो फिर इन भव्य इमारतों का क्या लाभ? गरीब पिता का कहना है कि वह चार-पांच महीने से यहां तंबू डालकर फेरी लगा रहा है, लेकिन सरकारी अस्पताल के इस व्यवहार ने उसे झकझोर कर रख दिया है. फिलहाल, कलेक्टर की सक्रियता से मासूम नेहा की जान खतरे से बाहर बताई जा रही है.

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