
Gwalior Police: ग्वालियर जिले में सड़क पर दर्द से छटपटा रहे एक बुजुर्ग की जान बचाने वाले एक पुलिसवाले की खूब तारीफ हो रही है. ग्वालियर पुलिस में सब इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध को जब पता चला कि सड़क पर पड़े एक बुजर्ग को दिल का दौरा पड़ा है, तो बिना देर किए बुजुर्ग को सीपीआर देकर उसकी जान बचा ली. बुजुर्ग को सीपीआर दे रहे पुलिसवाले का वीडियो इंटरनेट पर अब तेजी से वायरल हो रहा है और लोग सब इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध की खूब तारीफ कर रहे हैं.
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सब इंस्पेक्टर ने बुजुर्ग को सीपीआर देना शुरू किया, जिससे बुजुर्ग की जान बच गई
रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को अचानक दिल का दौरा पड़ने से एक बुजुर्ग सड़क पर गिर गया और छटपटाने लगा. तभी वहां खड़े सब इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध ने बुजुर्ग को सीपीआर देना शुरू किया, जिससे बुजुर्ग की जान बच गई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा हैं और लोग जान बचाने वाले सब इंस्पेक्टर की तारीफ़ भी कर रहे हैँ.
पुलिस वाला बना फरिश्ता, CPR देकर बचाई जान
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) April 2, 2025
ग्वालियर से पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया जब सब-इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध ने सड़क पर हार्ट अटैक से तड़प रहे एक राहगीर को सीपीआर देकर उसकी जान बचाई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, और लोग अफसर की जमकर तारीफ कर रहे हैं.… pic.twitter.com/q0fXhRJqH2
सड़क हादसे की आशंका में तड़प रहे बुजुर्ग के पास पहुंचे एसआई राजकुमार बौद्ध
बुजुर्ग की जान बचाने वाले सब इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध मंगलवार को थाटीपुर थाने की ऒर जा रहे थे. तभी रेलवे स्टेशन की तरफ जाने वाले फुट ओवर ब्रिज के पास लोगों की भीड़ देखकर उनके कदम ठहर गए. किसी सड़क हादसे की आशंका में गाड़ी रोककर नजदीक पहुंचे तो देखा कि एक बुजुर्ग सड़क पर तड़फ रहा है.
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बुजुर्ग के परिजनों को सूचित किया और फिर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया
जब मरीज को थोड़ा होश आया और स्थिति में सुधार दिखा तो उन्होंने बताया कि उनका नाम घनश्याम गौड़ है और वे बहोड़ापुर के रहने वाले हैं. इसके पहले भी उन्हें एक बार दिल का दौरा पड़ चुका है. सब इंस्पेक्टर राजकुमार बौद्ध ने इसके बाद घनश्याम से नम्बर लेकर उनके परिजनों को सूचित किया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया.
पीड़ित की जान बचाने के लिए व्यक्ति को मुंह से मुंह लगाकर दी जाती है सांस
सब इंस्पेक्टर ने बताया कि ऐसे केस को हैंडल करने के लिए ही उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है. ताकि पीड़ितों को सीपीआर देकर अस्पताल तक पहुंचाया जा सके. उन्होंने बताया कि सीपीआर प्रक्रिया के दौरान पीड़ित की जान बचाने के लिए व्यक्ति को मुंह से मुंह लगाकर सांस दी जाती है अथवा छाती को दबाकर धड़कन को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है.
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