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This Article is From Nov 18, 2024

जन सुनवाई के दौरान हंसना पड़ा महंगा, अधिकारी को कारण बताओ नोटिस, जानें कहां का है मामला

MP NEWS: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में जन सुनवाई के दौरान अपने वरिष्ठ सहकर्मियों की मौजूदगी में कथित तौर पर हंसने पर एक सरकारी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस मिला है.

जन सुनवाई के दौरान हंसना पड़ा महंगा, अधिकारी को कारण बताओ नोटिस, जानें कहां का है मामला

MP NEWS: छतरपुर जिले में जन सुनवाई के दौरान तरह-तरह के लोग अपनी शिकायतें लेकर आते हैं, लेकिन कभी इस प्रकार की भी शिकायत आ जाती है कि पूरा सदन हंसने लगता है और कभी गंभीर हो जाता है, लेकिन हंसने पर पाबंदी लगा दी जाए तो यह तो गलत फरमान नहीं तो क्या होगा?

छतरपुर अपर कलेक्टर ने रविवार को ई गवर्नेंस के अधिकारी को हंसने के लिए नोटिस देकर जवाब मांगा है, इससे जिले के सभी अधिकारी परेशान है. उनका कहना है कि जब सब अधिकारी हंस रहे थे उसमें सभी शामिल थे तो क्यों ना सभी को नोटिस मिलना चाहिए, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ दो लोगों को नोटिस देखकर हंसने पर पाबंदी लगाई है. 

सरकार के फैसले के खिलाफ कलेक्टर ने सुनाया तुगलकी फरमान

दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने एक नया विभाग बनाया है, जिसमें कर्मचारियों के हंसने और हंसाने और ताली बजाने जैसे अन्य अभ्यास से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता हैं. प्रशासन का कहना है कि जो कर्मचारी निराश और हताश हो जाते हैं, इस अभ्यास से उनका रक्तचाप अच्छा हो जाता है और उनकी जो कार्य करने की क्षमता भी बढ़ जाती है 

जन सुनवाई के दौरान हंसने पर दो अधिकारियों को भेजा गया नोटिस

 जन सुनवाई के दौरान हंसने पर कलेक्टर ने दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. गत 30 अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया गया, जो शनिवार शाम सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. यह घटना जन सुनवाई के दौरान हुआ जब कलेक्टर वरिष्ठ सहकर्मियों के साथ जनसुनवाई कर रहे थे.  

 जन सुनवाई में हंसते मिले अधिकारी को अनुशासनहीन करार दिया गया

यह नोटिस कथित तौर पर अतिरिक्त कलेक्टर मिलिंद नागदेव द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालय में ई-गवर्नेंस के सहायक प्रबंधक केके तिवारी को जारी किया गया था. नोटिस में कहा गया है कि तिवारी 29 अक्टूबर को जन सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हंसते हुए पाए गए, जो अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही के बराबर है.  

नोटिस में क्या है? 

नोटिस में अतिरिक्त कलेक्टर ने कहा कि यह मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचार है और मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1966 के तहत दंडनीय है.

क्या बोले अधिकारी? 

पत्रकारों से बात करते हुए अतिरिक्त कलेक्टर ने दावा किया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि कारण बताओ नोटिस कैसे जारी किया गया और वे अपने कार्यालय में इसकी जांच करेंगे. हालांकि, तिवारी ने कहा कि उन्होंने नोटिस का जवाब पहले ही दे दिया है. 

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