
Bhopal Municipal Corporation Innovation: मध्य प्रदेश के भोपाल नगर निगम (Nagar Nigam Bhopal) के आर्थिक हालात बेहद खराब हैं. निगम के ऊपर 800 करोड़ रुपये का कर्ज है. जिसके चलते निगम के वाहनों के टायर और बैट्री तक के लिए पैसे नहीं है. आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम ने देश में पहली बार टायर रिमोल्डिंग और बैट्री एसेंबलिंग यूनिट शुरू की है. भोपाल नगर निगम, जो अब तक गड्ढों, कचरे और अफसरों की टेबल पर धूल फांक रहे फाइलों के लिए मशहूर था, अब आत्मनिर्भरता की लौ जला चुका है और लौ भी ऐसी कि अगर नगर निगम पर बनी बायोपिक बने, तो नाम होगा- "टायरनामा: कर्ज़ से जुगाड़ तक की यात्रा!"

Bhopal Nagar Nigam: टायर रिमोल्डिंग यूनिट
अफसरों ने दिमाग दौड़ाया, निगम का पैसा बचाया
कभी यहां गाड़ियों की टायरें पंचर होती थीं, अब अफसरों के दिमाग में आइडिया फटाक से निकलते हैं! कचरा उठाने वाली 1600 गाड़ियाँ रोज़ सड़कों पर दौड़ती थीं, मगर जब उनके टायर घिस गए तो अफसरों ने पहली बार सरकारी कुर्सी से उठकर दिमाग दौड़ाया. भोपाल नगर निगम ने अब इनोवेशन की ऐसी गंगा बहा दी है कि विज्ञान और इंजीनियरिंग वाले लड़के-लड़कियाँ भी सोच रहे हैं कि UPSC छोड़कर निगम की वर्कशॉप जॉइन कर लें! अब ये तंज नहीं सच है. दरअसल, नगर निगम के पास पैसा नहीं था, मगर ‘दिमाग' (यानी जुगाड़) था और यही जुगाड़ आज नगर निगम के हर कोने में यहां तक की टायर तक चमका रहा है.

Bhopal Nagar Nigam: बैटरी असेम्बलिंग यूनिट
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इस यूनिट के इंचार्ज शाहिद खान बताते हैं कि खपत ज्यादा आती है गाड़ी खड़ी नहीं होती, सफाई को लेकर किसी भी दिक्कत नहीं आए, जो बैट्री मार्केट से लेते हैं मार्केट से आधे रेट पर काम हो रहा है, टायर नहीं मिलते थे घाटे से उबरने में मदद मिल रही है.

Bhopal Nagar Nigam: "भोज छाप बैटरी"
इस आत्मनिर्भर नगर निगम का पहला महान आविष्कार "भोज छाप बैट्री"!
पुरानी बैटरियों में नई आत्मा डाल दी गई, नगर निगम का कहना है कि एक नई बैट्री 6000 रुपये में आती थी, मगर अब भोज छाप बैट्री' सिर्फ 1500 रुपये में तैयार हो जाती है यानि 55 लाख रुपये की बचत. बैट्री इंचार्ज इफ्तिखार कहते हैं कि निगम को रोजाना गाड़ियों की बैटरी को री प्रोसेस कर रहे हैं, ताकि गाड़ियों का बेहतर संचालन किया जा सके, बैट्री बेहतर तरीके से काम कर रही है.
टायर इंचार्ज असलम का कहना है कि रोजाना टायर रिमोल्डिंग का काम करते हैं. 10 से 15 टायर को रिमोल्डिंग करते हैं. ताकि उनकी लाइफ बढ़ सके काफी निगम को फायदा हो रहा है.
इस ‘जुगाड़-जैसे-जुनून' ने 800 करोड़ के कर्ज में डूबे नगर निगम को थोड़ी ऑक्सीजन दी है और निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण ने खुद इस अद्भुत खोज पर गर्वित होते हुए कहा कि हमें बहुत राहत मिली है, कर्ज के बीच में बेहतर शुरुआत हुई है, आर्थिक हालात ठीक नहीं थे उसमें टायर रिमोल्डिंग, बैट्री रीसाइक्लिंग का काम शुरू हुआ. जिससे नगर निगम को काफी मदद मिल रही है. अब वाहनों की बैट्री और टायर की समस्या बहुत हद तक हल हुई है.
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