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सागर के भगवानदास रैकवार को मिलेगा पद्मश्री, बुंदेली मार्शल आर्ट के ल‍िए छोड़ी थी बैंक की नौकरी

सागर के 83 वर्षीय भगवानदास रैकवार ने वर्ष 1982 में बैंक की नौकरी छोड़कर बुंदेली मार्शल आर्ट को जीवन समर्पित किया. पारंपरिक अखाड़ा कला को सहेजने और आगे बढ़ाने के उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा.

सागर के भगवानदास रैकवार को मिलेगा पद्मश्री, बुंदेली मार्शल आर्ट के ल‍िए छोड़ी थी बैंक की नौकरी

Bhagwandas Raikwar Padma shri 2026:  पद्म पुरस्कार 2026 के लिए केंद्र सरकार द्वारा 54 नामों का ऐलान कर दिया गया है. इनमें मध्‍य प्रदेश के मध्य प्रदेश के भोपाल के प्रख्यात लेखक कैलाश चंद्र पंत, सागर के मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार और मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर व  नारायण व्यास का नाम भी  शाम‍िल है. 

सागर जिले के रामपुरा वार्ड निवासी 83 वर्षीय भगवानदास रैकवार का नाम पद्मश्री पाने वालों में शामिल होने से पूरे बुंदेलखंड में हर्ष की लहर दौड़ गई है. उन्हें बुंदेली अखाड़ा (मार्शल आर्ट) के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा.

बुंदेली मार्शल आर्ट के संरक्षक

भगवानदास रैकवार बुंदेलखंड की पारंपरिक मार्शल आर्ट परंपरा के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं. वे लंबे समय तक छत्रसाल बुंदेला अखाड़े के उस्ताद रहे और अपने जीवन का अधिकांश समय बुंदेली संस्कृति और अखाड़ा कला को सहेजने और आगे बढ़ाने में समर्पित किया.

बचपन से ही अखाड़े से जुड़े रैकवार की दिनचर्या में प्रतिदिन अखाड़ा जाना शामिल रहा. उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पारंपरिक कला न केवल जीवित रहे, बल्कि नई पीढ़ी तक इसका ज्ञान पहुंचे.

वर्ष 1982 में उन्हें बैंक में नौकरी लगी, लेकिन नियमित छुट्टी न मिलने के कारण उनकी अखाड़ा साधना प्रभावित होने लगी. बुंदेली अखाड़ा कला के प्रति अपने समर्पण को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ने का कठिन निर्णय लिया. यह फैसला उनके जीवन और कला के प्रति समर्पण की मिसाल है.

परिवार और जीवन संघर्ष

भगवानदास रैकवार के पांच बच्चे हैं. सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. जीवन भर उन्होंने बुंदेली मार्शल आर्ट और संस्कृति को जीवित रखने का कार्य किया.

उन्होंने कई पीढ़ियों को अखाड़ा कला का प्रशिक्षण दिया और बुंदेलखंड की पारंपरिक विरासत को नई पहचान दिलाई. उनके समर्पण और कठिन परिश्रम ने उन्हें स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया.

पद्मश्री सम्मान पर खुशी का माहौल

पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद सागर शहर और पूरे बुंदेलखंड में खुशी और गर्व का माहौल है. स्थानीय नागरिकों, कला प्रेमियों और शिष्यों ने इसे बुंदेली संस्कृति और अखाड़ा कला के सम्मान का ऐतिहासिक क्षण बताया.

प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने वीडियो कॉल के माध्यम से भगवानदास रैकवार से बातचीत कर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी. उन्होंने बुंदेली मार्शल आर्ट को प्रदेश के खेल विभाग में शामिल करने का आश्वासन भी दिया, ताकि युवाओं तक इसे पहुँचाया जा सके और पारंपरिक कला सुरक्षित रहे.

मंत्री सारंग ने कहा, “भगवानदास रैकवार जैसे साधकों ने वर्षों तक बिना किसी सरकारी सहयोग के पारंपरिक खेलों और कला को संरक्षित किया. उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है. यह सम्मान उन्हें और उनके प्रयासों को पूरे देश में पहचान दिलाएगा.” 


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