Bundelkhand Culture
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सागर के भगवानदास रैकवार को मिलेगा पद्मश्री, बुंदेली मार्शल आर्ट के लिए छोड़ी थी बैंक की नौकरी
- Sunday January 25, 2026
- Written by: विश्वनाथ सैनी
सागर के 83 वर्षीय भगवानदास रैकवार ने वर्ष 1982 में बैंक की नौकरी छोड़कर बुंदेली मार्शल आर्ट को जीवन समर्पित किया. पारंपरिक अखाड़ा कला को सहेजने और आगे बढ़ाने के उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा.
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Gwalin Puja on Diwali: बुंदेलखंड में दीपावली पर लक्ष्मी पूजा से पहले क्यों की जाती है ग्वालिन की पूजा?
- Saturday October 18, 2025
- Written by: Honey Dube, Edited by: विश्वनाथ सैनी
Bundelkhand में Diwali केवल Lakshmi Puja तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां सदियों पुरानी Gwalin Puja की परंपरा भी निभाई जाती है. मान्यता है कि बिना ग्वालिन पूजा के दीपावली अधूरी रहती है. Sagar district समेत पूरे बुंदेलखंड में मिट्टी की Gwalin idol के आगे 16 दीप जलाए जाते हैं, जो Chandra की 16 कलाओं का प्रतीक हैं. पूजा में wheat grains डालने की परंपरा भी है, जिससे घर में prosperity और ann samriddhi बनी रहती है. यह परंपरा आज भी बुंदेलखंड की cultural identity मानी जाती है.
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MP में बुंदेली साहित्य के विकास के लिए बुंदेलखंड साहित्य अकादमी की होगी स्थापना; राज्य मंत्री का ऐलान
- Thursday June 26, 2025
- Written by: अजय कुमार पटेल
Bundeli Sahitya: राज्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता हमें संस्कृति के क्षेत्र में अग्रणी बनाती है, इसे संरक्षित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए. उन्होंने भवन के रेनोवेशन के बाद अकादमियों के कार्यालय को कार्य अनुसार व्यवस्थित करने के निर्देश दिए.
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Folk tradition: बुंदेलखंड की लोक परंपरा, बच्चे रचाते हैं मिट्टी के दूल्हा-दुल्हन का विवाह, परंपरा और उल्लास का है संगम
- Tuesday April 29, 2025
- Written by: संजीव चौधरी, Edited by: Priya Sharma
Akshaya Tritiya 2025: बुंदेलखंड क्षेत्र में अक्षय तृतीया के मौके पर मिट्टी के दूल्हा-दुल्हन का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
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Bundelkhandi Diwali Culture: नजर उतारने के लिए है अनोखी परंपरा, आज भी रैकवार माझी द्वारा रखा गया है जीवित
- Saturday November 2, 2024
- Reported by: आज़म खान, Edited by: Ankit Swetav
MP News: मछली के जाल की मदद से नजर उतारने की परंपरा आज भी रैकवार माझी समाज ने बचाकर रखी है. इसका नजारा दिवाली के एक दिन बाद दमोह जिले में देखने को मिला.
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सागर : 206 साल पुरानी है "पुतरियो के मेले" की यह परंपरा
- Thursday October 5, 2023
- Reported by: रचित दुबे, Edited by: प्रेरणा किरण
भादों के माह में प्रतिवर्ष गाँव में एक मेले का आयोजन होता है ,जिसे "पुतरियो के मेले" के नाम से जाना जाता है. आपको बता दे बुंदेलखंड में मिट्टी की मूर्तियों को "पुतरिया" कहा जाता है. प्राचीनकाल में ग्राम के पाण्डेय परिवार द्वारा प्रारम्भ की गई मिट्टी की मूर्तियो की झांकी की परम्परा चौथी पीढ़ी तक बरकरार है.
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सागर के भगवानदास रैकवार को मिलेगा पद्मश्री, बुंदेली मार्शल आर्ट के लिए छोड़ी थी बैंक की नौकरी
- Sunday January 25, 2026
- Written by: विश्वनाथ सैनी
सागर के 83 वर्षीय भगवानदास रैकवार ने वर्ष 1982 में बैंक की नौकरी छोड़कर बुंदेली मार्शल आर्ट को जीवन समर्पित किया. पारंपरिक अखाड़ा कला को सहेजने और आगे बढ़ाने के उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा.
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Gwalin Puja on Diwali: बुंदेलखंड में दीपावली पर लक्ष्मी पूजा से पहले क्यों की जाती है ग्वालिन की पूजा?
- Saturday October 18, 2025
- Written by: Honey Dube, Edited by: विश्वनाथ सैनी
Bundelkhand में Diwali केवल Lakshmi Puja तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां सदियों पुरानी Gwalin Puja की परंपरा भी निभाई जाती है. मान्यता है कि बिना ग्वालिन पूजा के दीपावली अधूरी रहती है. Sagar district समेत पूरे बुंदेलखंड में मिट्टी की Gwalin idol के आगे 16 दीप जलाए जाते हैं, जो Chandra की 16 कलाओं का प्रतीक हैं. पूजा में wheat grains डालने की परंपरा भी है, जिससे घर में prosperity और ann samriddhi बनी रहती है. यह परंपरा आज भी बुंदेलखंड की cultural identity मानी जाती है.
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MP में बुंदेली साहित्य के विकास के लिए बुंदेलखंड साहित्य अकादमी की होगी स्थापना; राज्य मंत्री का ऐलान
- Thursday June 26, 2025
- Written by: अजय कुमार पटेल
Bundeli Sahitya: राज्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता हमें संस्कृति के क्षेत्र में अग्रणी बनाती है, इसे संरक्षित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए. उन्होंने भवन के रेनोवेशन के बाद अकादमियों के कार्यालय को कार्य अनुसार व्यवस्थित करने के निर्देश दिए.
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Folk tradition: बुंदेलखंड की लोक परंपरा, बच्चे रचाते हैं मिट्टी के दूल्हा-दुल्हन का विवाह, परंपरा और उल्लास का है संगम
- Tuesday April 29, 2025
- Written by: संजीव चौधरी, Edited by: Priya Sharma
Akshaya Tritiya 2025: बुंदेलखंड क्षेत्र में अक्षय तृतीया के मौके पर मिट्टी के दूल्हा-दुल्हन का प्रतीकात्मक विवाह कराया जाता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
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Bundelkhandi Diwali Culture: नजर उतारने के लिए है अनोखी परंपरा, आज भी रैकवार माझी द्वारा रखा गया है जीवित
- Saturday November 2, 2024
- Reported by: आज़म खान, Edited by: Ankit Swetav
MP News: मछली के जाल की मदद से नजर उतारने की परंपरा आज भी रैकवार माझी समाज ने बचाकर रखी है. इसका नजारा दिवाली के एक दिन बाद दमोह जिले में देखने को मिला.
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सागर : 206 साल पुरानी है "पुतरियो के मेले" की यह परंपरा
- Thursday October 5, 2023
- Reported by: रचित दुबे, Edited by: प्रेरणा किरण
भादों के माह में प्रतिवर्ष गाँव में एक मेले का आयोजन होता है ,जिसे "पुतरियो के मेले" के नाम से जाना जाता है. आपको बता दे बुंदेलखंड में मिट्टी की मूर्तियों को "पुतरिया" कहा जाता है. प्राचीनकाल में ग्राम के पाण्डेय परिवार द्वारा प्रारम्भ की गई मिट्टी की मूर्तियो की झांकी की परम्परा चौथी पीढ़ी तक बरकरार है.
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