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सीहोर में एक माह में आगजनी की 430 घटनाओं से अन्नदाता हुए कंगाल, करोड़ों की फसलों को एक चिंगारी ने कर दिया खाक

Incidents Of Arson : मार्च माह में सीहोर में आगजनी की 430 घटनाएं घटी है. इन घटनाओं में किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है. लेकिन बड़ी सवाल सरकारी सर्वे के बाद दो मुआवजा दिया जा रहा है, वो बेहद कम है. किसानों में पर्याप्त राहत की मांग की है.

सीहोर में एक माह में आगजनी की 430 घटनाओं से अन्नदाता हुए कंगाल, करोड़ों की फसलों को एक चिंगारी ने कर दिया खाक

Sehore : मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीहोर (Sehore) से आगजनी (Arson) के जो आंकड़े आए हैं, बेहद ही चिंता वाले हैं. जिले में मार्च महीने में आगजनी की 140 छोटी-बड़ी घटनाएं घटी हैं. इस दौरान किसानों का करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है. ये आंकड़े जिले दमकल विभाग के अधिकारियों से मिले हैं. जिले में इन दिनों रबी फसल की कटाई, गहाई का काम जोरों से चल रहा है. वहीं, अभी-अभी अधिकांश खेतों में किसानों की फसल पकी खड़ी है. ऐसे में बिजली लाइन से निकलने वाली एक चिंगारी पल भर में भीषण आग का रूप धारण कर लेती है. खेत के खेत मिनटों में जलकर राख हो जाते हैं.  

जिले भर में मार्च महीने में 430 आगजनी की घटनाएं हुई हैं. इन घटनाओं में सबसे ज्यादा फसलों को क्षति पहुंची हैं. इसके साथ आवास, गृहस्थी, कृषि यंत्र, मवेशी आदि जलने से करोड़ों रुपये का नुकसान होता है.

बड़ा सवाल :  नुकसान होता है ज्यादा, राहत कम

प्रदेश में अग्नि सुरक्षा और राहत को लेकर कोई स्पष्ट नीति ही अब तक नहीं बनाई हैं. यदि किसान के खेत में आग लग जाए, तो फसल जलने पर लाखों रुपयों का नुकसान होता है. लेकिन किसान को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाता. इसकी वजह फसल बीमा की इकाई हल्का क्षेत्र होना है. जब पूरे पटवारी हल्के में आग से फसल जलेगी, तब प्रभावित किसानों को फसल का मुआवजा मिलेगा. अभी प्रशासन स्तर पर राजस्व अधिनियम के तहत राहत राशि दी जाती है, जो बहुत ही कम होती है.

100 से अधिक गांव शामिल

जिले की श्यामपुर तहसील क्षेत्र में 100 से अधिक गांव शामिल हैं, यहां पर दमकल नहीं है, सीहोर जिला मुख्यालय से फायर ब्रिगेड वाहन आता है, जिसमे एक घंटे का समय लग जाता है. इसी प्रकार लाड़कुई और चकल्दी 40 गांव के सेंटर हैं, यहां आगजनी होने पर इछावर और भेरुन्दा क्षेत्र से दमकल बुलानी पड़ती है. यहां के लोग कई सालों से दमकल की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है.

मार्च माह में आग लगने की बड़ी घटनाएं

  • 13 मार्च को पाटन के किसान जगदीश चरकी वाले, जगदीश पिता भवर जी, राहुल पिता बद्री प्रसाद,रामसिंह पिता बंसी लाल, सुनिल पिता रामसिंह,बीरबल पिता बाबू लाल, रमेश पिता कवर जी, मांगीलाल जराती, राकेश पिता भवर जी एवं तकिया, बरखेडा के किसानो की भी खड़ी गेंहू की 60 एकड़ से अधिक फसल जलकर खाक हो गई.
  • 17 मार्च को बिलकिसगंज के एक किसान के खेत में अज्ञात कारणों की वजह से लगी आग ने 10 एकड़ जमीन में खड़ी गेहूं फसल को जलाकर खाक कर दिया। किसान मानसिंह परमार के खेत में आग लगी आग के कारण किसान सहित आसपास के लोगों में अफरा तफरी की स्थिति बन गई थी.
  • 18 मार्च को रेहटी तहसील के ग्राम श्यामूगांव के आधा दर्जन से अधिक किसानों के खेतों में आगजनी की घटना से उनके खेतों में लगी गेहूं की फसल जलकर खाक हो गई. इस दौरान दमकलों ने पहुंचकर आग पर काबू पाया। शुरुआती आंकलन में 5 से 6 एकड़ की फसल को नुकसान होना सामने आया है.
  • 21 मार्च को भैरुंदा क्षेत्र के तिलाडिया, राला, डिग्वाड, बाबरी व खडगांव के खेतों में आग लग गई, जिसके कारण खेत में खड़ी किसान की सौ एकड़ से अधिक की फसल जलकर राख हो गई. आग बुझाने गई नगर पंचायत की फायर गाड़ी अचानक खराब हो गई, जिससे खेत में लगी आग बुझाने में फायर गाड़ी का उपयोग नहीं हो सका.
  • 22 मार्च को अहमदपुर थाना क्षेत्र के तहत मंडखेड़ा के किसान उमा मीणा पति नरेंद्र मीणा की 8 एकड़, राजमल प्रेम सिंह मीणा की 8 एकड़, बाबूलाल की 4 एकड़ सहित अन्य किसानों की आग लगने से फसल जल गई. सूचना मिलने पर मंदखेड़ा, हिनौती सहित आसपास के किसान बड़ी संख्या में आग बुझाने मौके पर पहुंचे.
  • 28 मार्च को श्यामपुर के ग्राम सिराड़ी में आग लगने से 7 किसानों की 40 एकड़ फसल खाक हो गई. अज्ञात कारण से खेत में खड़ी गेहूं की फसल में आग लगी. आग से सिराड़ी के किसान रघुवीर सिंह दांगी, हरिनारायण दुबे, दिलीप सिंह, जीवन सिंह दांगी, लखन सिंह दांगी, दीपक मीना, कंचन मीना आदि की 40 एकड़ खेतों में खड़ी फसल जल गई.

कम मुआवजे पर ये बोलीं एसडीएम

इस संबंध में एसडीएम सीहोर तन्मय वर्मा का कहना है कि घटना होने पर राजस्व टीम मौके पर जाकर मुआयना करती है , पंचनामा तैयार कर, राजस्व गाइडलाइन के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है.

ऐसे करें बचाव 

बचाव के लिए बिजली विभाग दिन (दोपहार) के समय में बिजली की सप्लाई को कुछ घंटे के लिए बंद रखता है. ताकि बिजली लाइन की वजह खेतों में लगने वाली आग की घटनाएं कम हो सकें.  वहीं, खेतों में किसान कटी, फटी तार को हटा रहे हैं. सावधानी रखी जा रही है. 

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