
Ram Navami 2025: वाल्मिकी रामायण के अनुसार त्रेतायुग में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोपहर में श्रीराम (Shri Ram) का जन्म हुआ था. इस दिन श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के साथ ही भगवान हनुमान (Hanuman) की भी पूजा की जाती है. श्रीराम भगवान विष्णु का सातवां अवतार हैं. ये बात रामायण के साथ ही नारद और ब्रह्मपुराण में भी बताई गई है. रामनवमी (Ram Navami) के दिन ही चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri 2025) की समाप्ति भी हो जाती है. यही कारण है कि इस दिन भगवान श्रीराम के साथ साथ मां दुर्गा की भी पूजा की जाती है.
56 Bhog offered to Bhagwan Shri Ramlalla Sarkar today during his Bhog Aarti.
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) January 11, 2024
आज भगवान श्री रामलला सरकार की भोग आरती के समय उन्हें अर्पित किए गए 56 भोग। pic.twitter.com/2yWjQrXUbx
कब है राम नवमी? (Ram Navami 2025 Date and Time)
"नौमी तिथि मधु मास पुनीता. सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता" पवित्र चैत्र का महीना था, नवमी तिथि थी. शुक्ल पक्ष और भगवान का प्रिय अभिजित् मुहूर्त था, इसी दिन दशरथ नंदन का जन्म हुआ. रामचरितमानस की यह चौपाई बालकाण्ड में वर्णित है जो प्रभु के जन्म का उद्घोष करती है. 6 अप्रैल 2025 को भारत भूमि प्रभु का जन्मोत्सव मनाएगी. भगवान भाव के प्रेमी हैं लेकिन कुछ नियम हैं जिन्हें विधिवत किया तो कृपा जरूर बरसेगी.
नौ दिन के चैत्र नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन राम नवमी है. इस पर्व को लोग भगवान राम जन्म की खुशी के रूप में मनाते हैं, इस दिन भक्त रामायण का पाठ भी करते हैं. इस दिन को लेकर ऐसा माना जाता है कि बिना किसी मुहूर्त के सभी प्रकार के मांगलिक कार्य इस दिन संपन्न किए जा सकते हैं. इस महापर्व पर श्रीराम दरबार की पूजा की जाती है. जिसमें माता सीता, लक्ष्मण और हनुमानजी भी शामिल है. रामनवमी पर पारिवारिक सुख शांति और समृद्धि के लिये व्रत भी रखा जाता है.
व्रत और पूजा विधि (Ram Navami Vrat and Puja Vidhi)
रामनवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ सफाई कर के नहाकर व्रत का संकल्प करना चाहिए. घर, पूजाघर या मंदिर को ध्वजा, पताका और बंदनवार आदि से सजाया जा सकता है. इसके साथ ही घर के आंगन में रंगोली भी बनाई जाती है. रामनवमी की पूजा में पहले राम दरबार यानी सभी देवताओं पर जल, रोली और लेप चढ़ाया जाता है. इसके बाद मूर्तियों पर अक्षत चढ़ाएं जाते हैं. फिर सभी सुगंधित पूजन सामग्री चढ़ाने के बाद आरती की जाती है. इसके बाद श्रीराम जन्मकथा सुननी चाहिए. जिस समय व्रत कथा सुनें उस समय हाथ में गेहूं या बाजरा आदि अन्न के दाने रखें और कथा पूरी होने के बाद उनमें और अनाज मिलाकर आर्थिक क्षमता व श्रद्धानुसार दान करें.
रामनवमी की पूजा का शुभ मुहूर्त | Ram Navami Puja Shubh Muhurat
रामलला की पूजा का शुभ मुहूर्त रामनवमी के दिन कुल ढाई घंटे का होने वाला है. पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजे से शुरू होगा और दोपहर 1:35 बजे तक रहेगा. इस समयावधि में रामनवमी की पूजा संपन्न की जा सकती है.
पूजा सामग्री (Ram Navami Puja Samagri List)
रामनवमी पर पूजा के लिये पूजा सामग्री में रोली, चंदन, चावल, स्वच्छ जल, फूल, घंटी और शंख के साथ श्रद्धा अनुसार अन्य पूजन सामग्री भी ले सकते हैं. इस बार श्रीराम नवमी का पर्व 6 अप्रैल, रविवार को है. श्रीरामनवमी की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद घर के उत्तर भाग में एक सुंदर मंडप बनाएं. उसके बीच में एक वेदी बनाएं. इसके बीच में भगवान श्रीराम व माता सीता की प्रतिमा को स्थापित करें. श्रीराम व माता सीता की पंचोपचार(गंध, चावल, फूल, धूप, दीप) से पूजन करें.
पूजा सामग्री में केतकी के फूल, चंपा, मालती, कमल, गेंदा, गुलाब और कुंद के फूल शामिल किए जा सकते हैं. इसके साथ ही तुलसी, बिल्वपत्र, कुशा, शमी और भृंगराज के पत्ते पूजा सामग्री में शामिल कर सकते हैं.
व्रत नियम (Ram Navami Vrat Bhog Prasad)
पंडित जी के अनुसार फलाहार या निर्जला व्रत कर सकते हैं. व्रत के दौरान भगवान राम का नाम लें और मन को शांत रखें. साथ ही गरीबों की मदद करना न भूलें. उन्हें खाना, कपड़े या पैसे दान करें. ऐसा करने से पुण्य मिलता है और भगवान की कृपा बनी रहती है. अगर मुमकिन हो तो पास के राम मंदिर में जाएं. वहां दर्शन करें और भजन-कीर्तन में हिस्सा लें. इससे मन को बहुत सुकून मिलता है.
इसके बाद परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर श्री राम के भजन गाएं. उनकी जिंदगी की कहानियां सुनें और सत्संग करें. इससे घर का माहौल पवित्र बनता है और भक्ति का भाव जागता है.
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इसके बाद इस मंत्र बोलें (Ram Navami Puja Mantra)
मंगलार्थ महीपाल नीराजनमिदं हरे।
संगृहाण जगन्नाथ रामचंद्र नमोस्तु ते।।
ऊँ परिकरसहिताय श्रीसीतारामचंद्राय कर्पूरारार्तिक्यं समर्पयामि।
आरती (Ram Navami Aarti)
इसके बाद किसी पात्र (बर्तन) में कपूर तथा घी की बत्ती (एक या पांच अथवा ग्यारह) जलाकर भगवान श्री सीताराम की आरती उतारें व गाएं-
आरती कीजै श्रीरघुबर की, सत चित आनंद शिव सुंदर की।।
दशरथ-तनय कौसिला-नंदन, सुर-मुनि-रक्षक दैत्य निकंदन,
अनुगत-भक्त भक्त-उर-चंदन, मर्यादा-पुरुषोत्तम वरकी।।
निर्गुन सगुन, अरूप, रूपनिधि, सकल लोक-वंदित विभिन्न विधि,
हरण शोक-भय, दायक सब सिधि, मायारहित दिव्य नर-वरकी।।
जानकिपति सुराधिपति जगपति, अखिल लोक पालक त्रिलोक-गति,
विश्ववंद्य अनवद्य अमित-मति, एकमात्र गति सचारचर की।।
शरणागत-वत्सलव्रतधारी, भक्त कल्पतरु-वर असुरारी,
नाम लेत जग पवनकारी, वानर-सखा दीन-दुख-हरकी।।
आरती के बाद हाथ में फूल लेकर यह मंत्र बोलें-
नमो देवाधिदेवाय रघुनाथाय शार्गिणे।
चिन्मयानन्तरूपाय सीताया: पतये नम:।।
ऊँ परिकरसहिताय श्रीसीतारामचंद्राय पुष्पांजलि समर्पयामि।
इसके बाद फूल भगवान को चढ़ा दें और यह श्लोक बोलते हुए प्रदक्षिणा करें-
यानि कानि च पापानि ज्ञाताअज्ञात कृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिणा पदे पदे।।
इसके बाद भगवान श्रीराम को प्रणाम करें और कल्याण की प्रार्थना करें.
यह काम दिन की शुरुआत को भक्ति से भर देता है. इसके अलावा रामायण या रामचरितमानस का पाठ करना भी बहुत अच्छा माना जाता है. खास तौर पर अयोध्याकांड की कहानी पढ़ें, जो श्री राम के जन्म से जुड़ी है. इससे मन में सकारात्मक सोच आती है और भक्ति बढ़ती है. कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं.
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