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स्टंटबाजी का क्रेज: सोशल मीडिया के लिए जान दांव पर लगा रहे स्कूली बच्चे, वीडियो वायरल होते ही एक्शन में पुलिस

बलौदा बाजार जिले में स्कूली छात्रों द्वारा फेयरवेल के नाम पर किए जा रहे खतरनाक स्टंट के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. कार और ट्रैक्टर पर स्टंट कर रील बनाने का यह ट्रेंड छात्रों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है.

स्टंटबाजी का क्रेज: सोशल मीडिया के लिए जान दांव पर लगा रहे स्कूली बच्चे, वीडियो वायरल होते ही एक्शन में पुलिस

School Farewell Stunt Video: सोशल मीडिया पर कुछ सेकेंड की लोकप्रियता पाने की चाह अब बच्चों की जान पर भारी पड़ने लगी है. बलौदा बाजार जिले में स्कूली छात्र फेयरवेल जैसे भावनात्मक और यादगार मौके को खतरनाक स्टंट में बदलते नजर आ रहे हैं. तेज रफ्तार कारों और ट्रैक्टरों पर खड़े होकर, बोनट पर बैठकर और चलते वाहनों से बाहर लटककर बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इन घटनाओं ने न सिर्फ पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, बल्कि समाज के सामने भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

फेयरवेल बना स्टंट शो

आमतौर पर फेयरवेल का दिन छात्रों के लिए भावनाओं और यादों से भरा होता है. लेकिन हाल के दिनों में यही अवसर स्टंट और दिखावे की होड़ में बदलता दिख रहा है. छात्र सज‑धज कर स्कूल पहुंचने के बजाय तेज रफ्तार वाहनों पर सवार होकर रील बनाते नजर आ रहे हैं. हाथ हिलाना, खिड़कियों से बाहर लटकना और चलते काफिलों में वीडियो रिकॉर्ड करना अब आम होता जा रहा है.

कटगी, कसडोल और छेछर से सामने आए मामले

यह कोई एक जगह की घटना नहीं है. पहले कटगी, फिर कसडोल और अब ग्राम छेछर से ऐसे वीडियो सामने आ चुके हैं. छेछर के वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि छात्र बिना किसी सुरक्षा के ट्रैक्टर और कारों पर सवार हैं. न हेलमेट, न यातायात नियमों का पालन सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा है.

लग्जरी गाड़ियों पर खतरनाक स्टंट

कटगी क्षेत्र से सामने आए पहले बड़े मामले में शासकीय स्कूल के छात्रों ने फेयरवेल के दौरान 15 से 20 लाख रुपये की लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल किया. कुछ वाहन किराए पर लिए गए थे, जबकि कुछ छात्रों के परिजनों के बताए जा रहे हैं. छात्र बोनट पर बैठे, गाड़ियों पर खड़े हुए और खिड़कियों से बाहर लटककर स्टंट करते रहे. पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ.

पुलिस की सख्त कार्रवाई

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक सिंह ने बताया कि पुलिस ने इन मामलों को गंभीरता से लिया है. जांच के बाद 16 बालिग छात्रों सहित 26 वाहन चालकों के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में चार आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए. साथ ही मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 के तहत कार्रवाई कर सभी को न्यायालय में पेश किया गया.

कसडोल और छेछर में भी दोहराया गया खतरनाक ट्रेंड

कटगी के बाद कसडोल विकासखंड के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल से जुड़ा मामला सामने आया. यहां भी फेयरवेल के बाद छात्र तेज रफ्तार वाहनों में स्टंट करते दिखे. वहीं ताजा मामला छेछर गांव का है, जहां फेयरवेल के नाम पर ट्रैक्टर और कारों में स्टंट करते हुए स्कूल पहुंचने का वीडियो वायरल हुआ है.

सड़क पर दूसरों की जान भी खतरे में

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे स्टंट सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी बेहद खतरनाक हैं. अगर अचानक ब्रेक लग जाए या वाहन अनियंत्रित हो जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है.

रील्स के चक्कर में भूल रहे जिम्मेदारी

रील्स और वायरल कंटेंट की दौड़ में छात्र खुद को अलग दिखाने की कोशिश कर रहे हैं. “ग्रैंड एंट्री” और “वायरल मोमेंट” की चाह में वे यह भूल जाते हैं कि एक छोटी सी गलती जिंदगी भर का पछतावा बन सकती है.

अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका पर सवाल

इन मामलों में यह बात भी सामने आई है कि कई वाहन छात्रों के परिजनों के हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अभिभावक यह नहीं जानते कि उनके वाहन का इस्तेमाल कैसे हो रहा है. साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि स्कूल प्रबंधन फेयरवेल जैसे आयोजनों के दौरान कितनी निगरानी रखता है.

समय रहते कदम उठाने की जरूरत

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह ट्रेंड और खतरनाक रूप ले सकता है. मांग की जा रही है कि फेयरवेल आयोजनों के लिए स्पष्ट दिशा‑निर्देश बनाए जाएं, नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई हो और छात्रों के लिए जागरूकता व काउंसलिंग कार्यक्रम चलाए जाएं.

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