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Pora Bai Case: हाई लेवल अंग्रेजी और लिखावट... कैसे पकड़ी गई CGBSE की फर्जी टॉपर पोराबाई, चार सवालों में सब जानें

Pora Bai Case CG: छत्तीसगढ़ के चर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में 18 साल बाद चार दोषियों को अदालत ने पांच साल की कठोर सजा और जुर्माने की सजा सुनाई. जानिए, 500 में से 484 अंक लाने वाली CGBSE 2008 की फर्जी टॉपर पोराबाई कैसे पकड़ी गई थी? 

Pora Bai Case: हाई लेवल अंग्रेजी और लिखावट... कैसे पकड़ी गई CGBSE की फर्जी टॉपर पोराबाई, चार सवालों में सब जानें

Pora Bai Case in Chhattisgarh:  छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पोराबाई नकल प्रकरण में पोराबाई समेत चार लोगों को दोषी पाया गया. 29 जनवरी 2026 को कोर्ट ने 18 साल बाद इन्हें पांच साल की कठोर सजा सुनाई और पांच हाजर रुपये का जुर्माना लगाया. यह फैसला द्वितीय अपर सत्र के न्यायाधीश जी आर पटेल ने सुनाया. आइए, अब विस्तार से जानते हैं 2008 का पोराबाई नकल प्रकरण क्या है और यह कैसे पकड़ा गया. कोर्ट ने सजा सुनाते हुए इस मामले में क्या टिप्पणी की. 

सबसे पहले जानिए क्या है पोराबाई नकल प्रकरण? 

यह मामला छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 2008 में हुई परीक्षा से जुड़ा है. जिसमें सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकंडरी स्कूल, बिर्रा में पढ़ने वाली पोराबाई ने प्रदेश में टॉप किया था. उसे 500 में से 484 अंक मिले. लेकिन, कुछ ही समय बाद टॉपर बनी पोराबाई पर सवाल उठ गए. जांच में पता चला कि पोराबाई ने किसी और से पेपर दिलवाकर टॉपर बनी थी. इसके बाद पोराबाई समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. 

कैसे पकड़ा गया टॉपर पोराबाई कांड?

2008 में बीकेएस रे छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष थे. 12वीं के परिणाम घोषित हुए जिसमें पोराबाई ने टॉप किया. एक मीडिया संस्थान से मामले को लेकर की गई बातचीत में बीकेएस बताते हैं कि रिजल्ट घोषित होने के बाद उन्होंने अधिकारियों से टॉपर के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि गांव में रहने वाली एक बच्ची पोराबाई ने टॉप किया है. यह सुनकर वे काफी प्रभावित हुए और बच्ची को खुद सम्मानित करने का फैसला लिया.  लेकिन, इससे पहले उन्होंने पोराबाई की उत्तर पुस्तिका मंगाकर देखी, तो उन्हें नकल का शक हो गया. क्योंकि, उत्तर पुस्तिका में हाईलेवल अंग्रेजी में प्रश्नों के उत्तर दिए गए थे. साथ ही कॉपी भी पूरी तरह साफ-सुथरी थी. किसी गांव की बच्ची के लिए ऐसे उत्तर देना संभव ही नहीं था. इसी दौरानी पोराबाई के इंटरव्यू मीडिया में आने लगे, जिसमें वह खुद कह रही थी कि उसने ऐसा नहीं सोचा था. उसे दूसरे और तीसरे स्थान की उम्मीद थी. इसके बाद मामले की जांच शुरू की गई. 

कैसा था पोराबाई का पुराना रिकॉर्ड? 

अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान पोराबाई का पुराना रिकॉर्ड काफी खराब था. स्कूल से पता चला कि वह कभी फर्स्ट आई ही नहीं, वह कभी फेल हुई तो कभी थर्ड डिवीजन से पास किया था. जांच के दौरान परीक्षा केंद्र से जानकारी लेने पर पता चला कि पोराबाई ने तो परीक्षा ही नहीं दी थी. इसके बाद थाने में केस दर्ज कराया गया. पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर जेल भेजा. पक्के सबूत नहीं मिलने पर कोर्ट ने 12 साल बाद सभी को बरी कर दिया. इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल ने दोबारा अपील की. 

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सजा सुनाते हुए कोर्ट ने क्या कहा?

पोराबाई नकल प्रकरण में द्वितीय अपर सत्र के न्यायाधीश जी आर पटेल ने फैसला सुनाया. उन्होंने पोराबाई, फूलसिंह, एस एल जाटव और दीपक जाटव को 5 साल की सजा और 5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया. फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश जी आर पटेल ने कहा कि यह केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल  के खिलाफ अपराध नहीं है, बल्कि उन छात्रों के विरुद्ध भी है जो अपने भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. 

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