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Durg में अधर में लटका 85 छात्रों का भविष्य: स्कूल बंद होने से नहीं मिल रहा एडमिशन, DEO से परिजन लगा रहे गुहार

Chhattisgarh News: दुर्ग जिले के धनोरा क्षेत्र में स्कूल बंद हो जाने से लगभग 85 छात्र परेशान हैं. RTE के तहत दूसरे निजी स्कूल में एडमिशन के लिए पिछले एक साल से जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

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Durg में अधर में लटका 85 छात्रों का भविष्य: स्कूल बंद होने से नहीं मिल रहा एडमिशन, DEO से परिजन लगा रहे गुहार

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग (Durg) के धनोरा क्षेत्र में स्कूल बंद हो जाने से लगभग 85 छात्र परेशान हैं.  RTE के तहत दूसरे निजी स्कूल में एडमिशन के लिए पिछले एक साल से जिला शिक्षा अधिकारी से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है. दरअसल, धनोरा में स्थित अमरेश पब्लिक स्कूल के बंद हो जाने से केंद्र की योजना राइट टू एजुकेशन के तहत पढ़ रहे लगभग 85 बच्चों का भविष्य खतरे में आ गया है. नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इन्हें अभी तक किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं मिला है.

85 बच्चों का भविष्य अधर में अटका

परिजन अपने बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर से एडमिशन के लिए गुहार लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जल्द एडमिशन दिला दें, नहीं तो रोड पर बैठकर ही पढ़ने के लिए मजबूर होंगे.

संविधान हमें समान शिक्षा का अधिकार देता है. इसी के तहत केंद्र की नीति राइट टू एजुकेशन के तहत सभी बच्चों को अच्छे स्कूलों में पढ़ने का मौका मिल रहा है, लेकिन धड़ल्ले से बंद होते स्कूल चिंता का विषय बने हुए हैं. दुर्ग जिले के धनौरा स्थित अमरेश पब्लिक स्कूल के बंद हो जाने से 85 बच्चों का भविष्य मजधार में अटका हुआ है. आज ये सभी छोटे-छोटे बच्चे दुर्ग कलेक्ट्रेट पहुंचे और दुर्ग कलेक्टर रिचा प्रकाश चौधरी से अपना शिक्षा का अधिकार मांगा.

बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर परिजनों ने लगाई गुहार

छात्रा ने कहा कि जिस स्कूल में हम पढ़ रहे थे और स्कूल अब बंद हो चुका है, अब हम कहां जाएंगे. कलेक्टर मैडम से मिले हैं, जल्द एडमिशन दिलाने का आश्वासन मिला है.

अभिभावकों ने कहा कि अगर 15 जून तक बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं मिला तो सभी धरने पर बैठेंगे.

परिजन ने बताया कि बच्चों को जब आरटीई के तहत दाखिला मिला, तब उन्होंने एक नए सवेरा देखा था. समान शिक्षा अधिकार से उन्होंने भी बेहतर भविष्य की कल्पना की थी, लेकिन स्कूल के बंद हो जाने से अब आंखों में आंसू है. कारण छात्रों के अभिभावक उतना ही कमा पाते हैं, जितने में गुर्जर बसर हो सके और स्थिति ऐसी नहीं है कि प्राइवेट स्कूलों के फीस भर सके. बच्चे शिक्षा नीति के तहत अंग्रेजी माध्यम स्कूल में शिक्षा ले रहे थे, लेकिन अब इन्हें आरटीई का फायदा नहीं मिल रहा है.

100 से अधिक स्कूलों में लग चुके ताले

दुर्ग-भिलाई को एक समय में एजुकेशन हब कहा जाता था, लेकिन अब शिक्षा धनी अपनी पहचान खोते जा रही है. टाउनशिप क्षेत्र में सेल की यूनिट बीएसपी दर्जनों स्कूल संचालित करती थी, लेकिन अब महज गिनती के स्कूल बच गए हैं. सेल बड़े-बड़े दावे जरूर करती है, लेकिन शिक्षा देने में शून्य हो चुकी है. जिले में अन्य प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो विगत कुछ सालों में 100 से अधिक स्कूलों में ताले लग चुके हैं.

फिलहाल बच्चों को दाखिला को लेकर जिला शिक्षा अधिकार अरविंद मिश्रा ने कहा कि एडमिशन मिल जाएगी, हम प्रयास करेंगे कि स्वामी आत्मानंद में इन सभी बच्चों का एडमिशन हो जाए.

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