
NDTV CSDS Lokniti Chhattisgarh Opinion Polls: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव (Assembly Election) की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. प्रदेश की 90 में 20 विधानसभा सीटों के लिए 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. ऐसे में ये सभी के मन यही सवाल है कि इस बार राज्य की जनता का क्या है मूड है और प्रदेश की अवाम किस मुद्दे पर वोट करने जा रही है. क्या चुनाव में वोटिंग (Voting in Chhattisgarh) सिर्फ मुद्दों के आधार पर होगी या फिर इस में जाति और संप्रदाय भी अपना असर डालेगा?
इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए एनडीटीवी और सीएसडीएस की टीम ने राज्य में चुनाव पूर्व सर्वे किया. इस सर्वे में आगामी चुनाव में जातियों के आधार पर पार्टी विशेष के प्रति रुझान देखने को मिला है.
पिछड़ा और अति पिछड़ा कांग्रेस के साथ
भाजपा जहां बड़ी संख्या में सवर्णों के वोट हासिल करने में कामयाब होती दिख रही है. वहीं, कांग्रेस पार्टी राज्य के पिछड़े और अति पिछड़ों के वोट बड़े पैमाने पर हासिल करने में कामयाब होती नजर आ रही है. एनडीटीवी और सीएसडीएस के सर्वे में 48 प्रतिशत पिछड़े वर्ग के लोगों ने कांग्रेस के प्रति अपना समर्थन जताया. वहीं, 42 प्रतिशत ने भाजपा को वोट देने की बात कही. इसके अलावा अति पिछड़ा वर्ग भी कांग्रेस के समर्थन में खड़ा नजर आ रहा है. राज्य के 42 प्रतिशत अति पिछड़ों ने कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही, जबकि 33 अति पिछड़ों ने भाजपा के प्रति अपना समर्थन जताया है.
आदिवासियों ने भी कांग्रेस पर जताया भरोसा
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अहम किरदार निभाने वाले आदिवासी समाज भी इस बार कांग्रेस के पक्ष में नजर आ रहे हैं. इस सर्वे में 42 प्रतिशत आदिवासियों ने कांग्रेस को वोट देने की बात कही है. वहीं, 36 प्रतिशत आदिवासियों ने भाजपा को समर्थन देने की बात कही है.
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सवर्ण भाजपा के साथ
हालांकि, राज्य की सत्ता के संघर्ष कर रही बीजेपी को प्रदेश के सवर्ण वोटरों का सबसे ज्यादा समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है. प्रदेश के 50 प्रतिशत सवर्ण समाज का रुझान भाजपा की ओर है. वहीं, 24 प्रतिशत सवर्णों ने कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही है. हालांकि, बाकी जातियों के वोट कांग्रेस के पाले में जाते हुए नजर आ रहे हैं.
अब देखना ये होगा कि चुनाव पूर्व सर्वे वोटों में कितना तब्दील हो पाता है. अगर इस सर्वे का रुझान इसी तरह बरकरार रहता है, तो साफ है कि कांग्रेस प्रदेश में बढ़त बना लेगी. लेकिन इसका फैसला तो 3 दिसंबर को मतों के गिनती के बाद ही हो पाएगा कि कौन सी पार्टी रुझानों को वोट में बदलने में सफल रही है और कौन सी पार्टी दूसरे के वोट बैंक में सेंधमारी में सफल हो पाती है.
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