सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के व्यापम परीक्षा घोटाले के व्हिसलब्लोअर और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आनंद राय के खिलाफ कथित जाति आधारित हिंसा के मामले में तय किए गए आरोपों को रद्द कर दिया है. यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनाया है. पीठ ने कहा कि हमने SC/ST एक्ट के दायरे पर विचार किया है और की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं है. इसके साथ ही अदालत ने डॉ. आनंद राय की अपील स्वीकार कर ली है.
दरअसल, डॉ. राय ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें रैली के दौरान एक सांसद, विधायक, सरकारी अधिकारियों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार के मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा गया था. यह मामला 15 नवंबर 2022 को रतलाम जिले के धराड़ गांव में बिरसा मुंडा जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई कथित घटना से जुड़ा है.
40 से 45 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे
अभियोजन के अनुसार, एक संगठन से जुड़े लोगों ने एक सांसद, विधायक, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के वाहनों को रोका, कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया. इस दौरान पुलिस से झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाजी और चोट लगने की बात कही गई. एफआईआर में डॉ. आनंद राय सहित करीब 40 से 45 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे. 18 मार्च 2025 को विशेष सत्र न्यायाधीश (SC/ST एक्ट), रतलाम ने डॉ. राय के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप तय किए थे.
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SC ने हाईकोर्ट के आदेश को पलटा
डॉ. राय ने हाईकोर्ट में इसे चुनौती देते हुए कहा था कि जांच SC/ST नियम 1995 के नियम 7 के विपरीत एक इंस्पेक्टर द्वारा की गई है और उनके खिलाफ जाति आधारित दुर्व्यवहार का कोई विशिष्ट आरोप नहीं है. हालांकि, 3 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने आरोप तय करने के आदेश को सही ठहराया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. राय को जमानत दी थी और SC/ST एक्ट के तहत चल रहे ट्रायल पर रोक भी लगाई थी. अब शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए डॉ. आनंद राय के खिलाफ तय किए गए सभी आरोपों को रद्द कर दिया है.