Bhojshala Controvery: धार स्थित भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि भोजशाला में बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा भी की जाएगी और जुमे की नमाज भी अदा की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि नमाज पढ़ने का समय दोपहर 1 बजे से दोपहर 3 बजे तक रहेगा. पूजा के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन पूजा के लिए अलग जगह निर्धारित होगी. कोर्ट ने आदेश दिया है कि नामज के लिए भी प्रशासन अलग से जगह निर्धारित करेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पूजा और नमाज के लिए लोगों को विशेष पास की व्यवस्था की जाएगी. मामले पर CJI सूर्यकांत , जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने सुनवाई की.

बता दें कि शुक्रवार को बसंत पंचमी का दिन पड़ने की वजह से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था. दरअसल, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस (HFJ) की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने 2 जनवरी को याचिका दायर की थी और मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट के सामने अर्जेंट सुनवाई के लिए अनुरोध किया था. इसपर कोर्ट गुरुवार (22 जनवरी) को सुनवाई के लिए तैयार हो गया था.


धार में रहेगी सुरक्षा मुस्तैद
बसंत पंचमी के मौके पर धार स्थित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के आसपास सुरक्षा-व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), LiDAR और 3D मैपिंग का बड़े पैमाने पर और पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है. शहर के हर कोने की 3D मैपिंग पूरी कर ली गई है, ताकि पुलिस कंट्रोल रूम से छतों, संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की लाइव निगरानी की जा सके.

20 से अधिक एआई ड्रोन निगरानी करेंगे. शहर में 6,461 पुलिस अधिकारी और जवान तैनात किए गए हैं. इनमें 13 एसपी रैंक अधिकारी, 25 एएसपी, 67 डीएसपी/सीएसपी रैंक के अधिकारी शामिल हैं. इसके अलावा 933 महिला पुलिसकर्मी और 8 RAF प्लाटून भी मोर्चे पर हैं. जरूरत पड़ने पर 1,500-2,000 अतिरिक्त जवान रिजर्व में रखे गए हैं.
धार भोजशाला का इतिहास
- 1034 में राजा भोज ने कराया भोजशाला निर्माण
- 1456 में महमूद खिलजी ने भोजशाला को ढहाकर मकबरा बनाया
- 1933 में राजा आनंद राव की तबीयत बिगड़ी तो मुस्लिम समाज को नजाम की अनुमति मिली
- 1902 में हुए सर्वे में भोजशाला में हिंदू चिन्ह, संस्कृत के शब्द आदि पाए गए, लॉर्ड कर्जन ने रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये मंजूर किए
- 1951 में भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया
- 1997 में भोजशाला में आम नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया
- 2003 में हिंदुओं को मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन पूजा और मुस्लिम समाज को शुक्रवार को दोपहर 1-3 बजे नमाज की इजाजत दी गई
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