Bhojshala Kamal Maula Masjid Controversy: इंदौर हाईकोर्ट में सोमवार को धार स्थित भोजशाला मंदिर सह कमाल मौला मस्जिद के विवादित परिसर को लेकर अहम सुनवाई के बाद उसके अब फैसले पर सबकी निगाहें टिक गई हैं. अगली सुनवाई 16 मार्च को होनी है. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के कार्यकर्ता का कहना है कि एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर हम यह सकते हैं कि माननीय न्यायालय का आदेश हमारे पक्ष में ही आएगा.
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ASI ने करीब 100 दिनों तक जांच, सर्वेक्षण और उत्खनन किया
गौरतलब है एएसआई ने हाईकोर्ट के आदेश पर 22 मार्च 2024 से करीब 100 दिनों तक जांच, सर्वेक्षण और उत्खनन किया। जांच में परिसर और 50 मीटर की परिधीय रिंग क्षेत्र को भी शामिल किया गया. टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद्, रसायनविद्, संरक्षक और अन्य विशेषज्ञ शामिल थे.रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण सामने आए हैं. इनमें संस्कृत, प्राकृत और स्थानीय बोली में नागरी लिपि के साथ अरबी और फारसी भाषा के लेख भी मिले हैं.
सभी पक्षों द्वारा दाखिल जवाबों पर न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी हाईकोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार परिसर में पारिजातमंजरी-नाटिका, अवनिकर्मसातम और नागबंध जैसे महत्वपूर्ण शिलालेखों का उल्लेख है। साथ ही 56 अरबी-फारसी शिलालेख भी मिले, जिनमें धार्मिक वाक्य, दुआएं और ऐतिहासिक विवरण शामिल हैं. अब 16 मार्च को सभी पक्षों द्वारा दाखिल जवाबों पर विचार किया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी.
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'लंदन की कोर्ट में पेश रिपोर्ट को आधार बनाकर आपत्ति दर्ज कराएंगे'
उधर, मौलाना वेलफेयर सोसाइटी के सदर अब्दुल समद ने इंदौर हाई कोर्ट की बेंच में पेश एएसआई कि सर्वे रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि सर्वे के दौरान ही हमारे द्वारा समय-समय पर इसकी मौखिक को लिखित शिकायत दर्ज की जाती रही है और संबंध में हमने कोर्ट को भी अवगत किया है. हम पूर्व केंद्रीय मंत्री भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी के द्वारा भोजशाला के संबंध में लंदन की कोर्ट में पेश रिपोर्ट को आधार बनाकर हम आगे भी अपनी आपत्ति दर्ज कराएंगे.
'भोजशाला बाबा कमाल मौला मस्जिद थी, है और आगे भी रहेगी'
बकौल अब्दुल समद, हम साल 2019 से लगातार एएसआई के अधिकारियों को भोजशाला में अवैध गतिविधियों के संबंध में लिखित रूप से शिकायत दर्ज करते रहे हैं, जिसे हमने कोर्ट में दर्ज याचिका में बताया है उस पर कोर्ट द्वारा अभी कोई सुनवाई नहीं की गई है जबकि हमारे बाद लगी याचिका पर पहले प्रकरण की सुनवाई की है. 16 मार्च अपनी आपत्ति में दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करेंगे. हम आश्वस्त हैं कि भोजशाला बाबा कमाल मौला मस्जिद थी, है और आगे भी रहेगी.