काले हिरण को बिश्नोई समाज अपना आराध्य मानता है, उन्हें पूजता है, महिलाएं हिरणों को स्तनपान तक कराती हैं. लेकिन, सागर जिले के सबसे हाई-प्रोफाइल काले हिरण शिकार मामले को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है. इसके बाद भी इस पूरे शिकार रैकेट का खुलासा नहीं हो सका है. राहतगढ़ के जंगल में हुए इस शिकार के मामले ने वन विभाग और जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं.
जानकारी के अनुसार, बीते दिनों राहतगढ़ के जंगल में काले हिरण के शिकार के मामले में वन विभाग ने मौके से मुख्य आरोपी डॉक्टर वसीम खान और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया था. तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया और मामले की जांच वन विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम को सौंपी गई. प्रारंभिक जांच में काले हिरण के शिकार को एक बड़े संगठित सिंडिकेट से जोड़कर देखा गया, इस आशंका के चलते कोर्ट ने तीनों आरोपियों को फॉरेस्ट रिमांड पर भी भेजा था. हालांकि, रिमांड अवधि पूरी होने के बाद भी वन विभाग के हाथ कोई ठोस सफलता नहीं लग सकी है. हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर की अदालत ने सख्त रुख अपनाया और तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद से तीनों आरोपी सागर जेल में बंद हैं.
800 रुपये का ईंधन डलवाया
इस मामले की जांच को लीड कर रहे ट्रेनी आईएफएस अधिकारी जयप्रकाश ने बताया कि शिकार कांड में एक अन्य आरोपी की संलिप्तता के भी पुख्ता संकेत मिले हैं. जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी डॉक्टर वसीम खान किसी तीसरे व्यक्ति के इशारे पर ही सागर के राहतगढ़ जंगल तक पहुंचा था. घटना की रात करीब 8 बजे चार लोग राहतगढ़ स्थित एक पेट्रोल पंप पर बुलेरो वाहन में पेट्रोल भरवाने पहुंचे थे. आरोपियों ने वाहन में लगभग 800 रुपये का ईंधन डलवाया, जिसकी पूरी गतिविधि पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई. सीसीटीवी फुटेज में एक ऐसा व्यक्ति भी नजर आ रहा है, जो अब तक गिरफ्तार आरोपियों में शामिल नहीं है.
फाइव स्टार होटल और विदेशी कनेक्शन से जुड़ सकते हैं तार
जानकारी के अनुसार, यह संदिग्ध राहतगढ़ क्षेत्र का ही निवासी है. सूत्रों का दावा है कि यही व्यक्ति पहले भी इंदौर में पकड़े गए काले हिरण शिकार मामले के आरोपियों को राहतगढ़ लाता रहा है. इंदौर में गिरफ्तार आरोपी पहले सागर क्षेत्र में भी काले हिरण का शिकार कर चुके थे, जिससे इस पूरे नेटवर्क के अंतर-जिला और अंतर-राज्यीय होने की आशंका और गहराती जा रही है. सूत्रों की मानें तो इस मामले में आगे चलकर किसी नामी फाइव स्टार होटल और विदेशी कनेक्शन का भी खुलासा हो सकता है. हालांकि, मामले की जांच जारी है और अधिकारी किसी भी आधिकारिक पुष्टि से बच रहे हैं. लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक इस हाई-प्रोफाइल शिकार रैकेट से जुड़े सभी गुनहगार सामने आएंगे.