PM Awas Yojana: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में आवेदक जगत यादव ने अनावेदक भरत वर्मा, सचिव ग्राम पंचायत कदारी के विरुद्ध 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का केस दर्ज कराया था. इसकी लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त कार्यालय सागर में पेश की गई. शिकायत में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसका आवास स्वीकृत हुआ था, जिसकी कुल राशि 1 लाख 50 हजार रुपये थी. इसमें से 1 लाख 20 हजार रुपये उसे प्राप्त हो चुके थे. शेष 30 हजार रुपये खाते में डालने के एवज में ग्राम सचिव भरत वर्मा 5 हजार रुपये की रिश्वत की मांग कर रहा है.
शिकायत के सत्यापन के लिए आवेदक को एक डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर दिया गया और रिश्वत मांग संबंधी बातचीत रिकॉर्ड करने के निर्देश दिए गए. 18 मार्च 2019 को आवेदक ने सचिव भरत वर्मा से संपर्क कर बातचीत रिकॉर्ड कर ली. बातचीत के दौरान आरोपी ने 5 हजार रुपये की मांग की और 1 हजार रुपये ले लिए व शेष 4 हजार रुपये लेकर आने को कहा. अगले दिन 19 मार्च को लोकायुक्त ट्रैप दल छतरपुर चौबे तिराहा पहुंचा.
आरोपी से मोबाइल पर संपर्क कराने पर उसने चौबे तिराहा आने को कहा गया. आवेदक को रिश्वत लेनदेन के लिए चौबे नर्सिंग होम भेजा गया. ट्रैप दल ने आसपास छिपकर निगरानी रखी. कुछ देर बाद आरोपी सचिव भरत वर्मा आवेदक के पास आया और बातचीत करने लगा. रिश्वत देने के बाद आवेदक ने संकेत दिया और ट्रैप टीम ने आरोपी को घेर लिया. इसके बाद उसकी जेब से रिश्वत के रुपये बरामद किए गए. आरोपी के दोनों हाथों की उंगलियों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलाने पर घोल का रंग हल्का गुलाबी हो गया. विवेचना पूर्ण होने और अभियोजन स्वीकृति के बाद अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.
तीन साल की सजा और पांच हजार का जुर्माना
अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक एवं एडीपीओ अभिषेक मेहरोत्रा ने मामले में पैरवी करते हुए सभी साक्ष्य और गवाह न्यायालय में प्रस्तुत किए. विचारण उपरांत विशेष न्यायाधीश लोकायुक्त एवं प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव, छतरपुर के न्यायालय ने आरोपी सचिव भरत वर्मा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत दोषी पाते हुए 3 वर्ष का सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है.